इन चीज़ों के सेवन से थाइरोइड ग्रंथि को होता हैं नुकसान।

इन चीज़ों के सेवन से थाइरोइड ग्रंथि को होता हैं नुकसान।

गले के बीच में और सबसे आगे की तरफ थाइरोइड ग्रन्थि होती हैं। इसका काम थाइरोइड हॉर्मोन का उत्पादन करना होता हैं, जिससे शरीर की पाचय क्रियाएं कण्ट्रोल होती हैं। जब थाइरोइड ग्रन्थि से थाइरोइड हॉर्मोन कम स्त्रावित होने लगे तो इसे हाइपोथायरोडिज़्म या अंडर एक्टिव थायराइड कहा जाता है। आज के युग में थाइरोइड एक ऐसी आम बीमारी बन गयी हैं जो ज्यादातर महिलाओं को होने लगी हैं।

गर्भवती स्त्रियों में हाइपोथायरोडिज़्म होना सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता हैं। इससे गर्भपात भी हो सकता हैं। इसके अलावा गर्भधारण करने में भी मुश्किल आती हैं। यह पुरुषो और स्त्रियों दोनों में बाँझपन होने की वजह बन सकता हैं। हाइपोथायरोडिज़्म की समस्या होने पर ड्राई स्किन, रूखे बाल, फोकस करने में परेशानी होना, मोटापा, गर्भपात, बाँझपन, थकान, चिडचिडापन जैसी प्रोब्लम्स होने लगती हैं। क्योंकि थायराइड से बॉडी मेटाबोलिज्म की कमी होने लगती हैं, जिससे पुरे बॉडी में मेटाबोलिज्म का लेवल कम हो जाता हैं।

आज हम आपको ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो थायरोइड ग्रंथि को नुकसान ही पहुंचाती हैं।

इन चीजों से थाइरोइड ग्रन्थि को होता हैं नुकसान :-

ज्यादा फ्लोराइड मिला हुआ  पानी को पीने से

वैसे भी पानी में फ्लोराइड तो होता ही हैं, लेकिन अगर पानी में ज्यादा मात्रा में फ्लोराइड हो तो इस तरह के पानी को पीने से थायराइड ग्रन्थि को काफी ज्यादा हानि होती हैं। इसके अलावा पानी और भोजन में मिला क्लोरीन भी थाइरोइड ग्रन्थि को नुकसान पंहुचा सकता हैं।

प्लास्टिक के कारण

प्लास्टिक बैग्स, प्लास्टिक के बर्तन, प्लास्टिक के डिब्बे आदि में खाने-पीने वाली चीजों को रखने से या फिर प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से, या फिर प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर पीने से भी थाइरोइड ग्रन्थि पर बुरा असर पड़ता हैं। प्लास्टिक में ऐसे हानिकारक टोक्सिंस पाए जाते हैं जो शरीर में दाखिल हो कर न सिर्फ थायराइड ग्रन्थि को नुकसान पहुचाते हैं, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने की वजह भी बनते हैं।

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फ्यूल का परक्लोरेट

इंधन के जलने के बाद परक्लोरेट बनता है, जो फ्यूल के धुएं के साथ मिलकर शरीर के अंदर चला जा सकता हैं। यह केमिकल खाने और पीने वाली चीजों के साथ पानी में भी पाया जाता हैं। यह थाइरोइड ग्रन्थि पर बुरा असर डालता हैं और साथ ही कई सारी हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह भी बनता हैं।

सोया के सेवन से

सोया में सायटोस्टरोजेन पाया जाता है जो थायराइड के स्त्राव को रोकता हैं। सोया थायराइड ग्रन्थि से आयोडीन ज्यादा मात्रा में सोख लेता हैं, जिससे थायरोइड होर्मोन को पैदा होने में रूकावट आने लगती हैं।

कीटनाशक वाले फल और सब्जियों को खाने से

फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से धो कर ही खाना चाहिए। क्योंकि इन पर केमिकल से भरे हुए कीटनाशको का छिड़काव किया गया होता हैं। यह कीटनाशक दिमाग को नुकसान पहुचा सकते हैं और थाइरोइड ग्रंथि पर भी बुरा प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा कीटनाशकों से भरे हुए फलों और सब्जियों को खाने से शरीर में अन्य बीमारियाँ भी होने लगती हैं।








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