इन 11 तरह की कमाई पर नहीं लगता हैं कोई टैक्स.

इन 11 तरह की कमाई पर नहीं देना पड़ता हैं कोई टैक्स

हम सभी की दिली इच्छा इनकम टैक्स बचाने की रहती है। इसके लिए हम नए-नए तरीके भी ढूंढ़ते रहते हैं। आइए, आपको ग्यारह ऐसी कमाई के बारे में बताते हैं, जिन पर भारत में किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगता है।

बचत खाते के ब्याज पर

वर्ष 2013 में सेक्शन 80 टीटीए पेश किया गया, जिसमें सेविंग अकाउंट में एक वित्त वर्ष में अधिकतम 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स नहीं लगता है। इससे अधिक रकम पर टैक्स लगेगा।

एनआरई अकाउंट के ब्याज पर

एनआरई (नॉन रेजिडेंट एक्सटर्नल)अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज भारत में 100 फीसदी टैक्स फ्री होता है। इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट और सामान्य सेविंग अकाउंट ब्याज दोनों शामिल हैं। एनआरआइ के लिए यह दोनों टैक्स फ्री हैं। कई एनआरआइ यूएई या सिंगापुर जैसे देशों में लोन लेते है जहां ब्याज दरें 2 से 3 फीसदी हैं और उस राशि को भारत के एनआरई अकाउंट में जमा कर देते हैं, जिसपर उन्हें 8 फीसदी से 9 फीसदी तक का ब्याज मिलता है। एनआरई अकाउंट डिपॉजिट पर टीडीएस भी नहीं कटता क्योंकि इसमें किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगाया जाता। एनआरई अकाउंट में जमा संपत्ति किसी भी एक देश से दूसरे देश में लाई जा सकती है।

प्रॉफिट का एक हिस्सा फर्म के पार्टनर को देने पर

अगर पार्टनरशिप फर्म के तौर पर आपने कोई प्रोफिट कमाया और उसे शेयर ऑफ प्रॉफिट के तौर कुछ हिस्सा पार्टनर को दिया जाए तो पार्टनर के लिए यह इनकम टैक्स फ्री होगी, क्योंकि कंपनी पहले ही इस पर टैक्स अदा कर चुकी होती है। ध्यान रहे कि कंपनी से मिलनी वाली सैलरी टैक्स योग्य होगी।

बीमा की मैच्योरिटी या क्लेम

जीवन बीमा कंपनी की ओर से मैच्योरिटी पर दी जाने वाली राशि पूर्ण रूप से टैक्स फ्री होती है अगर उसका प्रीमियम सम एश्योर्ड के 20 फीसदी से कम हो। फाइनेंस एक्ट 2003 में हुए संशोधन के तहत सम एश्योर्ड के 20 फीसदी ज्यादा का प्रीमियम कर योग्य है। उदाहरण के तौर पर अगर सालाना प्रीमियम 10,000 रुपये है तो टैक्स छूट के दायरे में आने के लिए सम एश्योर्ड 50,000 रुपये का होना चाहिए। अगर सम एश्योर्ड बताई गई वैल्यू से कम है तो राशि टैक्स योग्य होगी।

नियोक्ता से दिया गया एलटीए

कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को हर वर्ष एलटीए देती हैं, जिसे कर्मचारी अपने परिवार के साथ घूमने के लिए इस्तेमाल करता है। यात्रा का प्रमाण देने पर इस राशि पर टैक्स नहीं लगता है। यदि आपकी कंपनी आपको एलटीए नहीं देती है तो आप अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा एलटीए के मद में डालने के लिए अपने नियोक्ता से कह सकते हैं।

वीआरएस की 5 लाख की राशि

अगर किसी व्यक्ति ने वीआरएस यानि कि वॉलेंटरी रिटायरमेंट स्कीम लिया है तो पांच लाख रुपये तक की प्राप्त राशि टैक्स फ्री होगी। इसके लिए सब लोग योग्य नहीं है। केवल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां या फिर केंद्र या राज्य सरकार की ऑथोरिटी के कर्मचारी ही योग्य हैं।

पांच साल बाद ईपीएफ की राशि

ईपीएफ अकाउंट से मिलने वाली राशि टैक्स फ्री होती है, लेकिन यह सर्विस के पांच वर्ष के बाद की गई निकासी पर योग्य होता है। कई बार निवेशक अपनी नौकरी 3 से 4 साल के भीतर ही बदल लेते हैं और ईपीएफ का पैसा निकाल लेते हैं। ऐसे में उन्हें टैक्स देना पड़ता है।

एक साल बाद इक्विटी पर प्रॉफिट

एक साल के बाद शेयरों या इक्विटी म्यूूचुअल फंडों को बेचने पर मिलने वाला प्रॉफिट टैक्स फ्री होता है। यदि आप खरीदे गए शेयर या म्यूचुअल फंडों को अपने पास कम से कम एक साल तक रखते हैं तो उन्हें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। भारत में अभी यह 100 फीसदी टैक्स फ्री है।

शेयरों का लाभांश

स्टॉक या फिर इक्विटी म्यूचुअल फंडों पर मिलेन वाला लाभांश टैक्स फ्री होता है। कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स को लाभांश देने से पहले सरकार को डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स का भुगतान कर चुकी होती हैं। इसकी वजह से कंपनी के प्रॉफिट में कम हिस्सा मिलता है, लेकिन जो भी मिलता है वह टैक्स फ्री होता है।

वेडिंग गिफ्ट्स

शादी पर उपहार के रूप में मिलने वाली राशि और कीमती चीजें भी टैक्स फ्री होती हैं। शादी पर दोस्त या रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट्स टैक्स फ्री होते हैं। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी शादी की तारीख और उपहार मिलने की तारीख एक जैसी है। आप ऐसा नहीं कर सकते कि शादी के दो साल बाद उपहार के रूप में मिली राशि पर टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकते।

वसीयत या विरासत में मिली राशि

भारत में अभी तक किसी तरह का इनहेरिटेंस टैक्स नहीं है। मसलन, वसीयत या फिर विरासत में मिली संपत्ति या राशि टैक्स फ्री होती है। वह आपकी प्रॉपर्टी बन जाती है और उस पर केवल कमाए गए इंटरेस्ट पर कर देना होता है। भारतीय समाज में प्रचीन काल से ही वसीयत बनाने का चलन है।




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