उड़ने वाली गिलहरी के बारे में 27 रोचक मज़ेदार बातें और तथ्य।

उड़ने वाली गिलहरी के बारे में 27 रोचक मज़ेदार बातें और तथ्य।

Interesting facts of flying squirrel in Hindi language. उड़ने वाली गिलहरी के बारे में जानकारी जानने के लिए जरूर पढ़े यह लेख। आज के लेख में हम आपको ऐसे जीव के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके बारे में जानकर आपको वाकई में हैरानी भी होगी और अच्छा भी लगेगा। आज हम आपको उड़ने वाली गिलहरी जिसे Flying Squirrel कहा जाता हैं, उसके बारे में मज़ेदार जानकारी देंगे। आइये जानते हैं इस खास प्राणी की कुछ रोचक और मजेदार बातें और जानकारियां। Interesting Facts about Flying Squirrel in Hindi.

उड़न गिलहरी (उड़ने वाली गिलहरी) के बारे में रोचक जानकारी और तथ्य :-

1. अगर उड़ने वाले स्तनपायी जीवों की बात करे तो चमगादड़ ही एक ऐसा जानवर हैं, जिसके पंख होते हैं, जो हवा में उड़ता हैं। लेकिन हवा में उड़ने के मामले में उड़ने वाली गिलहरी का भी अपना मुकाम हैं। असल में उड़ने वाली गिलहरी उड़ती नहीं हैं, बल्कि यह एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर छलांग लगाती हैं। इस गिलहरी के अगले पंजो से लेकर पिछले पंजो तक खाल की एक झिल्ली होती हैं। जब वह पेड़ से छलांग लगाती हैं तो वह इस झिल्ली को फैला लेती हैं या फिर हम यह भी कह सकते हैं की वह अपने पैरों को खोल देती हैं, जिससे यह झिल्ली पैराशूट की तरह काम करने लगती हैं। और उड़ने वाली गिलहरी एक पेड़ से दुसरे पेड़ तक ग्लाइडिंग करके चली जाती हैं। जिसे देखने पर ऐसा लगता हैं की मानो गिलहरी उड़ रही हैं। लेकिन हकीकत में गिलहरी उड़ती नहीं, बल्कि ग्लाइडिंग करती हैं।

2. उड़ने वाली गिलहरी कनाडा के दक्षिणी भाग से लेकर अलास्का और मध्य अमेरिका तक पाई जाती है। यानी की यह भारत, पाकिस्तान, भूटान, चीन, श्रीलंका, जापान यानी की एशिया महादीप के ज्यादातर देशो में तो पाई ही जाती हैं, इसके अलावा यह नार्वे, स्वीडन और यूरोप के देशों और अफ्रीका के देश जैसे की घाना, कांगो और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में पायी जाती हैं।

3. दुनिया भर में उड़ने वाली गिलहरी की 45 प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जिसमे से 12 प्रजातियाँ सिर्फ भारत में ही पायी जाती हैं। उड़ने वाली गिलहरियों की 90% प्रजातियाँ सिर्फ एशिया महादीप में ही पायी जाती हैं।

4. उड़न गिलहरी रात के समय ही निकलती हैं। जहाँ एक तरह दूसरी गिलहरियाँ दिन में अपना भोजन तलाश करती हुई पायी जाती हैं, वहीँ flying Squirrel निशाचर प्राणी हैं जो रात के समय ही भोजन की तलाश के लिए घर से बाहर निकलती हैं।

5. रात के समय बाहर निकलने की वजह से कुदरत ने इसे बड़ी बड़ी आँखें प्रदान की हैं, ताकि यह रात के समय अँधेरे में भी साफ़-साफ़ देख सके। इनकी आँखे उभरी हुई काले रंग की होती हैं। यह आम गिलहरियों की आँखों के मुकाबले काफी ज्यादा बड़ी होती हैं। इसके अलावा कुदरत ने इन उड़न गिलहरियों को feelers के गुण दिए हैं, यानी की इनकी मूंछ इनके आसपास हो रही गतिविधियों को महसूस करने में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे इन्हें रात में भोजन इक्कठा करने में मदद मिलती हैं।

6. इसके पुरे शरीर पर मुलायम और घने बाल होते हैं। इसकी फ्लैट पूंछ इसे ग्लाइड करते समय बैलेंस बनाये में रखने में मदद करती हैं।

7. उड़ने वाली गिलहरी के परभक्षी बहुत ज्यादा हैं। जैसे की racoons, उल्लू, कुत्ते, बिल्ली, लोमड़ी, सांप, coyotes, बाज़ आदि। जिसकी वजह से उड़न गिलहरी रात के समय ही अपने ट्री होल से बाहर निकलती हैं। लेकिन रात के समय भी कुछ परभक्षी जैसे की उल्लू इनका शिकार कर लेते हैं। इसके अलावा सांप और racoons जैसे जानवर इनके बिलों में घुस जाते हैं और इनके बच्चों को खा लेते हैं। Flying Squirrel के शावकों की मृत्यु दर परभक्षियों के कारण बहुत ज्यादा हैं। इसके अलावा यूरोप और नार्थ अमेरिका के देशों में मनुष्यों द्वारा भी इनका खूब शिकार किया जाता हैं। इसकी मुलायम और बालदार खाल का इस्तेमाल फैशन प्रोडक्ट्स को बनाने के लिए किया जाता हैं। आज दुनियाभर में उड़न गिलहरी की ज्यादातर प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर खड़ी हैं।

8. उड़ने वाली गिलहरियों के आकार की बात करे तो इनका आकार चूहे से लेकर बिल्ली के जितना हो सकता हैं। ज्यादातर Flying Squirrel की प्रजातियों का आकार 9 से 15 इंच (23 से 38 सेंटीमीटर) तक होता हैं।

9. दुनिया में सबसे बड़े साइज़ वाली उड़न गिलहरी की बात करे तो woolly flying Squirrel नाम की प्रजाति को सबसे बड़ा माना जाता हैं। इसका आकार 18 से 24 इंच (45 से 60 सेंटीमीटर) के जितना होता हैं। Woolly Flying Squirrel मुख्य रूप से हिमालय के पर्वतों में पायी जाती हैं। विशेष रूप से यह  पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (जो की भारत का अहम हिस्सा हैं) के नीलम वैली के नंगा पर्वत नाम के स्थान पर पायी जाती हैं। Woolly Flying Squirrel कश्मीर के गिलगिट, चित्राल, अस्तोर, स्क्द्रू आदि में भी पायी जाती हैं। यह सभी भाग पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (यानी भारत) में आते हैं। इसके अलावा यह तिब्बत में भी पाई जाती हैं।

Woolly Flying Squirrel

Woolly Flying Squirrel photo

10. हालांकि साइज़ के मामले में बड़ी उड़ने वाली गिलहरियों की बात करे तो Red and white giant flying squirrel का नाम भी आता हैं। यह मुख्य रूप से चीन और ताइवान में पायी जाती हैं, इसके अलावा यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मलेशिया और सिंगापुर में भी देखी जा सकती हैं। इसकी लम्बाई 3 फूट (1 मीटर) तक हो सकती हैं। और इसका वजन 3 pound (1.5 किलोग्राम) तक हो सकता हैं। और अच्छी बात यह हैं की इस Red and White giant flying squirrel को विलुप्त होने वाली उड़न गिलहरी की श्रेणी में नहीं रखा गया हैं। यानी की इनकी संख्या काफी अच्छी हैं।

Red and White giant Flying Squirrel photo

Red and White giant Flying Squirrel photo

अब आप यह कहेंगे की आपने ऊपर बताया हैं की woolly flying Squirrel दुनिया की सबसे लम्बी और बड़ी प्रजाति हैं तो यह Red & white flying squirrel की लम्बाई तो 1 मीटर तक हैं, फिर भला इसे सबसे बड़ी प्रजाति क्यों नहीं माना जाता हैं । इसका जवाब यह हैं की Woolly Flying Squirrel की लम्बाई उसके सिर से लेकर उसकी बॉडी तक नापने पर 18 से 24 इंच होता हैं, जबकि red & white giant flying squirrel की लम्बाई में उसकी लम्बी पूँछ भी शामिल हैं। यानी की इसकी पूँछ इसके शरीर से भी ज्यादा लम्बी होती हैं, जब शरीर की लम्बाई के मुकाबले की बात करे तो Woolly Flying Squirrel बाज़ी मार लेती हैं।

11. उड़ने वाली गिलहरियाँ सर्वाहारी होती हैं। यानि की यह अपने भोजन में फल, बीज, फूल, पेड़ों से मिलने वाली गोंद, बलूत का फल, जंगली मशरूम, बेरीज, नट्स, पंछियों के अंडे, slugs, मकड़ियाँ, कीड़े-मकौड़े सभी कुछ खाती हैं। कई सारी एशियाई उड़न गिलहरियों के बारे में यह भी देखा गया हैं की भूखे होने पर वह घोंघे और चूहे भी खा जाती हैं।

12. उड़ने वाली गिलहरी एक बार छलांग लगाने के बाद 20 से 40 फूट की दूरी तक हवा में ग्लाइड कर सकती हैं। अभी तक सबसे ज्यादा हवा में ग्लाइड करके लम्बी दूरी तय करने का रिकॉर्ड 90 मीटर (295 फीट) हैं।

13. जंगल में रहने वाली उड़न गिलहरियों का जीवनकाल 5 से 6 साल तक होता हैं। जबकि बंदी अवस्था यानि की चिड़ियाघर में रहने वाली उड़न गिलहरियां 10 से 15 साल तक जीवित रह सकती हैं।

14. क्या आपको पता हैं अफ्रीका के लोग इस जीव को अशुभ और विनाशकारी मानते हैं। अफ्रीका में पाई जाने वाली उड़न गिलहरी की पूंछ के अगले भाग पर तेज धार वाले नुकीले शल्क होते हैं। इन्हें scaly tailed flying squirrel कहा जाता हैं। शायद उल्टा लटकने की वजह से वह लोग इसे अशुभ समझते हो।

Scaly tailed Squirrel

Scaly tailed Squirrel photo

15. जैसा की आपको पता ही चल गया हैं की उड़ने वाली गिलहरियाँ हकीकत में उड़ती नहीं बल्कि हवा में ग्लाइड करती हैं, जिसकी वजह से यह पंछियों की तरह ऊपर की ओर नहीं उड़ सकती हैं। यह एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर ग्लाइड करके जाती हैं। और उन्हें दुसरे पेड़ की शाखाओं पर लैंड करना पड़ता हैं। और उसके बाद फिर दोबारा से छलांग लगा कर अगले पेड़ पर जाना पड़ता हैं।

16. क्या आपको पता हैं ग्लाइड करते समय यह अपनी दिशा को भी बदल सकती हैं। वह 180 डिग्री तक घूम सकती हैं।

17. उड़ने वाली गिलहरियों के पंजे ग्लाइड करने के दौरान लैंडिंग करते समय गद्दे या तकिये की तरह काम करते हैं। जिससे वह बिना किसी परेशानी से एक डाल से दूसरी डाल पर ग्लाइड कर सकती हैं।

18. उड़ने वाली गिलहरियाँ जब दुसरे पेड़ पर लैंड करती हैं तो वह उस पेड़ की सबसे ऊँची शाखा पर चढ़ जाती हैं ताकि उन्हें दुबारा से छलांग लगाने में आसानी हो सके।

19. उड़ने वाली गिलहरियाँ अखरोट में उपरी परत में छोटा सा छेद करके इसके अन्दर पाए जाने वाली गिरियों को खाती हैं, जबकि एक आम गिलहरी अखरोट के छिलकों को पूरी तरह से तोड़कर उसके अन्दर से गिरी निकालकर खाती हैं।

20. उड़ने वाली गिलहरियाँ साल में एक बार बच्चे देती हैं। इनका गर्भकाल 40 दिनों तक होता हैं। एक बार में यह 2 से 7 बच्चों को जन्म देती हैं। ज्यादातर उड़न गिलहरियों का प्रजनन काल बसंत ऋतू से लेकर गर्मियों तक माना जाता हैं।

21. उड़ने वाली गिलहरियों के बच्चे जब पैदा होते हैं तो उनके शरीर पर कोई बाल या फर नहीं होता हैं। उनकी आँखें भी बंद होती हैं। इसके अलावा उनके कान और पंजे एक साथ जुड़े हुए होते हैं। 2 से 6 दिन बाद उनके कान खुलने लगते हैं। इसके अलावा 7 दिन बाद उनके पंजे एक दुसरे से अलग होने लगते हैं। 7 दिन बाद उनके शरीर पर फर यानि की बाल उगने लगते हैं। और 24 से 30 दिन के बाद उनकी आँखें खुलने लगती हैं। इसके अलावा माँ गिलहरी 65 दिनों तक अपने बच्चों की देखभाल अपने घोंसले में करती हैं।

22. जब बच्चे 2 महीने के हो जाते हैं तो वह अपनी माँ को देख कर हवा में उड़ने यानि की ग्लाइड करना सीखने लगते हैं। 1 साल होने पर गिलहरी के बच्चे बड़े हो जाते हैं और वह प्रजनन करने के योग्य भी हो जाते हैं।

23. फ्लाइंग गिलहरियाँ चाहे सर्दी के दिनों में असक्रिय रहने वाले प्राणियों में से नहीं हैं। लेकिन फिर भी वे सर्दियों के दिनों में अपनी एक्टिविटी को बहुत धीमा कर देती हैं और घर से जल्दी बाहर नहीं निकलती हैं। वह पुरे साल आहार जमा करती रहती हैं, जिसे वह सर्दियों के दिनों में खाती हैं। उड़ने वाली गिलहरियाँ एक सीजन में 1,50,000 नट्स तक जमा कर सकती हैं।

24. उड़ने वाली गिलहरियाँ बहुत ही सामाजिक प्राणी हैं। यह गिलहरियाँ ग्रुप में रहना पसंद करती हैं। यह कठफोड़वे द्वारा बनाये गये बिलों में भी रहती हैं। एक ट्री होल में 20 गिलहरियाँ एक साथ मिलकर रहती हैं। एक साथ मिलकर रहने से सर्दी के दिनों में इनके शरीर का तामपान गर्म बना रहता हैं।

25. इसके अलावा यह उड़ने वाली गिलहरियाँ चमगादड़ो के अलावा उल्लुओं के साथ भी रह सकती हैं।

26. उड़ने वाली गिलहरियाँ की आवाज़ को मनुष्य सुन भी सकता हैं और नहीं भी सुन सकता हैं। जब यह गिलहरियाँ चीखती हैं, खर्राटे लेती हैं या कुड़ाकुड़ाती हैं तो इसे मनुष्य आसानी से सुन सकता हैं। लेकिन उनके द्वारा निकाली गयी कुछ ध्वनियाँ अल्ट्रासोनिक होती हैं, जिसे मनुष्य के कानो द्वारा सुन पाना असंभव हैं।

27. उड़ने वाली गिलहरियों को देख कर पता लगा पाना बहुत ज्यादा मुश्किल हैं की वह नर हैं या मादा। क्योंकि नर और मादा दोनों एक जैसे ही दिखाई देते हैं।


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