कैसे पहचाने की दूध असली हैं नकली, या फिर दूध में मिलावट की गयी हैं।

नकली दूध की पहचान करने का तरीका क्या हैं?

शरीर को चलाने के लिए प्रोटीन की जरूरत पड़ती हैं और दूध प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक दूध एक ऐसा पौष्टिक पदार्थ हैं, जिसका इस्तेमाल हम किसी न किसी रूप में हम करते चले आते हैं। दूध पीने के फायदे बहुत हैं, लेकिन अगर आप मिलावट वाला दूध पीते हैं तो यह आपकी सेहत को हानि पहुचाने लगता हैं। तो ऐसे में हम कैसे पता लगा सकते हैं की जो दूध हम पीने जा रहे हैं, वह दूध असली हैं या नकली? शुद्ध दूध की पहचान करने के तरीके क्या हैं? मिलावटी दूध से कैसे बचे? नकली दूध की पहचान क्या हैं?

दूध के साथ दूध से बनी चीज़ों में भी होती हैं मिलावट

पहले के जमाने में दूध में सिर्फ पानी मिलाकर बेचा जाता था। इससे यह दूध स्वास्थ्य के लिए उतना ज्यादा नुकसानदेह नहीं था। लेकिन जैसे जैसे समय बदला, वैसे वैसे मिलावटी दूध बनाने के नए-नए तरीके अजमाए गये। आज के समय में मिलावटी दूध एक महत्वपुर्ण समस्या बन गयी हैं। दूध में होने वाली मिलावट के चलते दूध किसी ज़हर से कम नहीं हैं। न सिर्फ गलत तरीको के द्वारा नकली और मिलावटी दूध बनाया जा रहा हैं, बल्कि दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थ जैसे की नकली घी, नकली पनीर आदि भी बनाये जा रहे हैं।

मावा बनाने के लिए यूरिया का होता हैं इस्तेमाल :-

मावा यानी की खोया बनाने के लिए मिलावट का धंधा करने वाले लोगो ने यूरिया खाद और वाशिंग पाउडर की मदद से नकली मावा बनाने का तरीका खोजा। जिसकी वजह से दिवाली और अन्य त्योहारों पर नकली मावे की मिठाइयां बाज़ार में आपको देखने को मिल जाती हैं। मिलावटी मावे की मिठाइयां खाने से न सिर्फ आप बीमार पड़ते हैं, बल्कि मिलावट का कारोबार करने वाले कारोबारियों की आर्थिक रूप से मदद भी कर देते हैं। इसी मिलावटी और नकली मावे की वजह से आपको त्योहारों में मावे से बनी मिठाइयों को न खाने की सलाह दी जाती हैं, आखिर जान हैं तो तभी न जहान हैं।

असली और नकली दूध में फर्क करने का तरीका :-

■ अगर दूध असली और एकदम शुद्ध हैं तो इसे उबालने पर इसका रंग नहीं बदलता हैं, जबकि नकली और मिलावटी दूध को जब उबाला जाता हैं तो यह आसानी से अपना रंग बदलने लगता हैं। नकली दूध का रंग उबालने पर सफ़ेद से पीला होने लगता हैं।

■ असली दूध पीने में हमेशा मीठा लगता हैं, जबकि नकली दूध में डिटर्जेंट और शैम्पू जैसे पदार्थो को मिलाया गया होता हैं। जिसकी वजह से जब आप अशुद्ध दूध को पीते हैं तो इसका स्वाद कड़वा लगता हैं।

■ जब आप असली दूध को हाथो पर लेकर रगड़ते हैं तो कोई भी चिकनाहट महसूस नहीं होती हैं। तो दूसरी ओर नकली दूध को हाथो के बीच में लेकर रगड़ने से इसमें किसी साबुन या डिटर्जेंट की तरह चिकनाहट महसूस होने लगती हैं।

■ सिंथेटिक दूध को सूंघने पर उसमे से साबुन और डिटर्जेंट जैसी महक आती हैं। जिससे यह पता चलता हैं की दूध नकली हैं और इसमें मिलावट की गयी हैं और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। जबकि शुद्ध और असली दूध को सूंघने पर कोई खास महक या गंध नहीं आती हैं।

■ अगर आप यह पता लगाना चाहते हैं की दूध में पानी की मिलावट की गयी हैं तो इसके लिए चिकनी लकड़ी या पत्थर के सतह पर दूध की 1 या 2 बूँद टपकाकर चेक करे। अगर दूध बहता हुआ निचे की ओर गिरे और सफ़ेद सी धार का निशान बनाने लगे तो दूध एकदम शुद्ध हैं।

■ नकली दूध को कुछ समय तक स्टोर करने पर यह अपना रंग बदलने लगता हैं। जबकि असली दूध को स्टोर करने पर इसके रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता हैं। जबकि नकली दूध सफ़ेद से पीला दिखाई देने लगता हैं।

■ दूध में पानी की पहचान के लिए आप किसी काली सतह पर दूध की बूंदे डाले। अगर दूध निचे गिरते हुए अपने पीछे सफ़ेद सी लकीर बनाता दिखे तो यह दूध एक दम से शुद्ध और असली हैं।


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