खाऊं गौरेया के बच्चा।

खाऊं गौरेया के बच्चा। A interesting Story About Greedy Crow in Hindi. एक समय की बात है एक गौरेया थी। किसी कारणवश गौरेया को अपने अंडे एक कौए के घोसले में देने पड़े। कौए का नाम वनचर था। वनचर कौए ने गौरेया के सामने यह शर्त रखी की जब इन अण्डों में से बच्चे निकलेंगे तो वह उन सभी को खा लेगा। गौरेया ने कौए की शर्त मान ली। समय बीतता गया और अण्डों में से बच्चे निकले तो वनचर कौआ गौरेया के पास गया और खाने के लिए उसके बच्चे को मांगने लगा।

तब गौरेया ने कहा”, कौआ भाई अभी तो बच्चे बहुत छोटे है। इन्हें खाने से तुम्हारा पेट भी नहीं भरेगा। थोड़ा समय और प्रतीक्षा करों, यह थोड़े बड़े हो जायेंगे, तब तुम इन्हें खा लेना। “
कौआ वहा से चला गया। इस प्रकार समय और बीतता चला गया। वनचर कौआ एक बार फिर गौरेया के पास गया और अपनी शर्त के अनुसार उसके बच्चे को खाने के लिए मांगने लगा।

तब गौरेया बोली”, ठीक है कौआ भाई, लेकिन इन्हें खाने से पहले जाओ तुम अपना मुँह-हाथ धोकर, कुल्ला आदि करके आओ।“

vanchar kauwa & river

तब वनचर कौआ हाथ मुँह धोने, कुल्ला आदि करने के लिए नदी के पास गया और बोला, “गंगनम गंगनम गंगनम।“

इस पर नदी बोली,”क्या वनचर कौआ!” फिर कौआ बोला,”दियो पनीला, करो कुल्लिला, खाऊं गौरेया के बच्चा।” इस पर नदी बोली,” जाओ घड़ा लेकर आओ और पानी भर के ले जाओ।”

तब वनचर कौआ घड़े के लिए कुम्हार के पास गया और बोला,” कुम्हरम कुम्हरम कुम्हरम।”
“क्या वनचर कौआ।”

“गढ़ों घड़ीला, भरो पनीला, करों कुल्लिला, खाऊं गौरेया के बच्चा।”

तब कुम्हार बोला,”जाओ मिट्टी लेकर आओ ताकि मैं तुम्हारे लिए घड़ा बना दूं।”

तब वनचर कौआ मिट्टी के पास गया और बोला,”मटियम मटियम मटियम”

“क्या वनचर कौआ!”

“दियो मटीला, गढ़ों घड़ीला, भरो पनीला, करों कुल्लिला, खाऊं गौरेया के बच्चा।”

तब मिट्टी बोली,”ठीक है, जाओ खुरपी लेकर आओ, और जितना मर्ज़ी मिट्टी काट ले जाओ।”

तब वनचर कौआ खुरपी लेने के लिए लोहार के पास गया और बोला,”लोहरम लोहरम लोहरम।”

“क्या वनचर कौआ!”

“दियो खुरपिला, कोड़ो मटीला, गढ़ों घड़ीला, भरो पनीला, करों कुल्लिला, खाऊं गौरेया के बच्चा।”

तब लोहार बोला,”बैठो अभी तुम्हारे लिए खुरपी बना देता हूँ।”

Lohar aur Vanchar kauva
फिर लोहार ने लोहे को पिट-पिट कर एक खुरपी बना दिया जो की बहुत गर्म था, उसका रंग सुर्ख-लाल था। लोहार कौए से बोला,”वनचर कौआ, खुरपी किसमें ले जाओगे।, किसमे दे दूं यह खुरपी तुम्हे?”

कौआ बोला,”चौंच में दे दो, मैं इसे ले जाऊँगा।”

फिर लोहार ने गर्म-गर्म खुरपी कौए के चोंच में पकड़ा दी। कौआ ने फिर कायं कायं करते हुए, वही पर अपने प्राण त्याग दिए।”

इस पर लोहार ने कहा,”लो वनचर कौआ, लो अब खाओ गौरेया के बच्चा।”

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