खाने की इन चीजों में कौन ज्यादा अच्छा हैं?

स्वस्थ्य रहने के लिए सही डाइट का कंफ्यूजन ऐसे दूर करे।

हेल्दी और फिट रहने के लिए सही वज़न का होना बहुत ही जरूरी हैं। वज़न को सही बनाये रखने के लिए सही डाइट को चुनने में अकसर कंफ्यूजन का सामना करना पड़ता हैं। क्योंकि खाने को लेकर हमारे पास ढेर सारे विकल्प मौजूद रहते हैं। ऐसे में आहार की खूबियों और कमियों को जानना बहुत जरूरी हैं। आइये जानते हैं बाज़ार में मिलने वाले कुछ फूड के कंफ्यूजन के बारे में। खाने की चीजों में कौन सी चीज़े सेहत के लिए ज्यादा अच्छी रहती है?

खाने की इन चीजों में कौन ज्यादा अच्छा हैं?

पनीर बनाम टोफू

पनीर आम दूध से बनता हैं, जबकि पनीर की तरह दिखाई देने वाला टोफू सोयाबीन मिल्क से बनता हैं। दोनों ही प्रोटीन के अच्छे सोर्स माने जाते हैं। पनीर को आप घर में आसानी से बना सकते हैं, लेकिन टोफू को घर में बनाना मुश्किल भरा काम हैं। लेकिन टोफू को आप बाज़ार से आसानी से खरीद सकते हैं।

पोषण की मात्रा :- 100 ग्राम पनीर में तकरीबन 18.3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता हैं, जबकि टोफू में 6.9 ग्राम प्रोटीन ही होता हैं। प्रोटीन के अलावा पनीर में टोफू के मुकाबले ज्यादा कैल्शियम और कैलोरी पाई जाती हैं।

किसे खाए :- अगर आप वज़न कम करना चाहते है तो कम कैलोरी होने के कारण टोफू अच्छा विकल्प हैं। जबकि वज़न बढ़ाने के लिए पनीर को खाना अच्छा रहेगा।


दूध बनाम सोया मिल्क

नार्मल दूध और सोया मिल्क दोनों ही बाज़ार में आसानी से मिल जाते हैं। इन्हें पीने से शरीर स्वस्थ्य रहता हैं और कैल्शियम की पूर्ति होती हैं।

पोषण की मात्रा :- सोयाबीन के बीज, तेल और पानी को मिलाकर सोयामिल्क बनाया जाता हैं, जो की आम दूध के मुकाबले इसमें फैट, कार्बोहायड्रेट और कैलोरी तीनो ही कम मात्रा में होते हैं। इसलिए लोग फिट रहने के लिए सोया मिल्क पीते हैं। लेकिन जब सोया मिल्क को बनाया जाता हैं तो काफी सारे न्यूट्रीएंट्स और विटामिन्स की कमी हो जाती हैं।

किसे पिए :- आम दूध की तुलना में सोयामिल्क उतना ज्यादा लाभकारी नहीं होता हैं। डॉक्टर भी आम दूध पीने का परामर्श देते हैं। छोटे बच्चों को भी सोया मिल्क का स्वाद उतना ज्यादा अच्छा नहीं लगता हैं। छोटे बच्चे जब सोया मिल्क पीते हैं तो उन्हें उल्टी भी हो जाती हैं। कैल्शियम की भरपाई के लिए नार्मल दूध ही पीना ज्यादा अच्छा रहेगा।


ब्राउन राइस बनाम सफ़ेद चावल

आजकल आम सफ़ेद चावल के मुकाबले ब्राउन राइस का चलन ज्यादा बढ़ रहा हैं। ब्राउन राइस को सेहत के लिए ज्यादा अच्छा माना जाता हैं। ब्राउन राइस सफेद चावल का रिफाइंड रूप हैं। रंग के अलावा पोषण में भी दोनों चावलों में अन्तर पाया जाता हैं। ब्राउन राइस का एक नुकसान यह भी हैं की यह जल्दी से सड़ जाता हैं।

पोषण की मात्रा :- सफेद चावलों के मुकाबले ब्राउन राइस में ज्यादा फाइबर पाया जाता हैं। जबकि ब्राउन राइस को बनाने के लिए सफ़ेद चावलों को ही एक लम्बे प्रोसेस से गुजरना पड़ता हैं। जिससे ब्राउन राइस में कई सारे न्यूट्रीएंट्स कम हो जाते हैं।

क्या खाए :- एक्सपर्ट्स ब्राउन राइस खाने की सलाह देते हैं। क्योंकि ब्राउन राइस डायबिटीज को रोकने और मोटापा कम करने में मदद करता हैं। ब्राउन राइस मेटाबोलिक रेट को भी बढ़ाता हैं, जो सेहत के लिए अच्छा होता हैं।


मल्टी ग्रेन बनाम Whole Grain

मल्टी ग्रेन का मतलब हैं कई तरह के अनाजों का मिश्रण, लेकिन यह जरूरी नहीं हैं इसमें शामिल सभी अनाज साबुत रूप (भूसी समेत) में मौजूद हो। वहीँ Whole Grain या Whole Wheat का मतलब साबुत गेंहू। यानि की इसमें भूसी आदि शामिल होते हैं और यह रिफाइंड और कई preservative वाला भी नहीं होता हैं।

पोषण की मात्रा :- मल्टी ग्रेन आटे को इस्तेमाल करने से पहले यह पूरी तरह से जांच लेना चाहिए, की यह Whole Grain से भी बना हुआ हो। न की रिफाइंड अनाजों के आटे से। दोनों में फाइबर बहुत ही अच्छी मात्रा में पाया जाता हैं।

किसे खाए :- Multi Grain के मुकाबले Whole Grain में ज्यादा न्यूट्रीएंट्स, फाइबर और विटामिन्स पाए जाते हैं। जो डायबिटीज और कई तरह के कैंसर सेल्स को ख़त्म करते हैं। whole Grain मोटापा कम करने में भी मदद करता हैं।








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