गंगा नदी के बारे में जानिए 7 रोचक तथ्य.

गंगा नदी के बारे में जानिए 7 रोचक तथ्य

गंगा सप्तमी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को कहा जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार वैशाख मास की इस तिथि को ही मां गंगा स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थीं। इसलिए इस दिन को ‘गंगा सप्तमी’ कहते हैं। कहीं-कहीं पर इस तिथि को ‘गंगा जन्मोत्सव’ के नाम से भी पुकारा जाता है।

श्रीराम के वंशज भागीरथ गंगा जी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाए थे। उन्होंने कठिन तप किया था, क्योंकि उनके पूर्वजों का तर्पण सिर्फ गंगा नदी में ही हो सकता था। इस पौराणिक कथा का उल्लेख कई धर्म ग्रंथों में मिलता है।

 

गंगा नदी के बारे में कुछ रोचक बातें

 

  • गंगा नदी की प्रधान शाखा भागीरथी है जो कुमायूं में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है। गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है। यहां गंगा जी को समर्पित एक मंदिर भी मौजूद है।

  • गंगा में उत्तर की ओर से आकर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियां यमुना, रामगंगा, करनाली (घाघरा), ताप्ती, गंडक, कोसी और काक्षी हैं तथा दक्षिण के पठार से आकर इसमें मिलने वाली प्रमुख नदियां चंबल, सोन, बेतवा, केन, दक्षिणी टोस आदि हैं। यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है जो हिमालय की बन्दरपूंछ चोटी के आधार पर यमुनोत्री हिमखण्ड से निकली है।

  • उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा नदी विशाल भू भाग को सींचती है, 2, 071 किमी तक भारत तथा उसके बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है।

  • उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर कुशवार्ता घाट इंदौर (मप्र) की मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाया गया था। यहां दिवंगत आत्माओ का श्राद्ध किया जाता है यहां मौजूद हरकी पौड़ी घाट को राजा विक्रमादित्य ने उनके भाई भ्रीथरी की याद में बनवाया था। मान्यता है कि यहां राजा विक्रमादित्य के भाई ने तपस्या की थी। इसे ब्रम्हकुंड के नाम से भी जाना जाता है।

  • झारखंड के रामगढ़ में एक ऐसा मंदिर है। जहां गंगा जल अपने आप भोले नाथ के शिवलिंग पर गिरता है। गंगा की यह धारा का उद्भव कहां से हो कोई नहीं जानता। यहां जलाभिषेक 12 माह स्वतः होता रहता है। इस जलाभिषेक का विवरण पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि इस मंदिर में मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है।

  • गंगा नदी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो गंगा जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। गंगा की इस असीमित शुद्धीकरण क्षमता और सामाजिक श्रद्धा के बावजूद इसका प्रदूषण रोका नहीं जा सका है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रयास जारी हैं।

  • डालफिन की दो प्रजातियां गंगा में पाई जाती हैं। जिन्हें गंगा डालफिन और इरावदी डालफिन के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा गंगा में पाई जाने वाले शार्क की वजह से भी गंगा की प्रसिद्धी है जिसमें बहते हुये पानी में पाई जाने वाली शार्क के कारण विश्व के वैज्ञानिकों की काफी रुचि है।

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