गलत अर्थ न निकाले इस “ढोल गंवार क्षुद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी” दोहे को!

Tulsidas controversial Doha. This doha real meaning is here.

अंग्रेजी में भी कहते है “गिव रेस्पेक्ट एंड टेक रेस्पेक्ट”, अगर गैरो के साथ सही व्यव्हार करोगे तो वो भी तुम्हारे साथ वैसा ही पेश आएगा. लेकिन कुछ ऐसे पात्र भी है जिनसे हम अगर सदा ऐसा ही व्यव्हार करेंगे तो वो उसका फायदा उठकर हमें नुकसान ही पहुंचाएंगे.

ऐसा हम नहीं हमारे शास्त्र कहते है चाहे वो तुलसी कृत रामायण हो या फिर गरुड़-पुराण ही क्यों न हो. दोनों ने दुष्ट,नौकर,श्रमिक, ढोल और पत्नी का उल्लेख किया है वंही रामायण में तुलसी के भाव और पात्र लगभग वही है जो की गरुड़ द्वारा रचित गरुड़ पुराण में है.

रामायण का श्लोक “ढोल गंवार क्षुद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी”

इस दोहे में ऐसे स्वाभाव वाले 5 व्यक्तियों से सख्ती से निपटने को कहा गया है. अगर आप को ढोल से मधु ध्वनि निकलनी है तो उसको कठोरता से पीटना होगा. वंही गंवार व्यकित अलसी होता है उसे अगर कठोरता से नहीं डराएंगे तो वो आप का कहा नहीं मानेगा क्योंकि उसे किसी चीज की परवाह या समझ ही नहीं है.

क्षुद्र यानि मजदुर उनसे भी आपको ज्यादा काम लेना है तो आपको है तो उन्हें भय जता कर रखना होगा नहीं तो वो मौका देख कर के कामचोरी करने से नहीं चुकेगे. जानवरो में गाय को छोड़ कर सभी पशु जिद्दी स्वाभाव के होते है उन्हें भी कडाई से काम में न ले तो वो निट्ठल्ले हो जाते है.

अंतिम कड़ी महिलाये, हिंदू धर्म में महिलाओ को बहुत सम्मानीय माना गया है, पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करने के बारे में सोचना भी गलत है. पर अगर नारी मनमानी पर उत्तर आये तो वो आपका नुकसान कर सकती है. इसका ये मतलब नहीं है की उसे मारा या पिता जाये या कैद करके रखा जाये.

पत्नी अगर अपने पति की इच्छा के विपरीत व्यव्हार कराती है तो वो उसके लिए हराम है. इस लिए पति को चाहिए की वो शुरू से ही इस बाबत पत्नी से कटुता से पेश आये ताकि वो अपनी मर्यादा भय वष या हानि वष न भूले.








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