गले का कैंसर क्या हैं और इसके लक्षण और इलाज क्या हैं?

गले का कैंसर क्या हैं और इसके लक्षण और इलाज क्या हैं?

आवाज़ की जिम्मेवारी गले में पाए जाने वाली स्वर पेटी यानि की Larynx की होती हैं। कई बार धुम्रपान और तम्बाकू के सेवन के कारण Larynx पर बुरा असर पड़ने लगता हैं। आवाज़ में भारीपन और व्यक्ति Larynx कैंसर का शिकार हो जाता हैं।

जानते हैं Larynx Cancer यानि की गले का कैंसर क्या हैं :-

Larynx (स्वर पेटी) के जरिये आदमी की आवाज़ निकलती हैं। इसके साथ ही यह फेफड़ो की रक्षा भी करता हैं। भारत में कैंसर के मरीजों में 4.8% को गले का कैंसर होता हैं। इसमें अधिकतर पुरुष ही इसका शिकार बनते हैं। कैंसर से होने वाली मृत्यु में से 4.4% मौतें गले के कैंसर की वजह से होती हैं।

3 प्रकार का होता हैं Larynx कैंसर

यह कैंसर 3 तरह का होता हैं। Supraglottis, Glottis और Subglottis जिसमे से Supraglottis Cancer सबसे ज्यादा लोगो को होता हैं। इसके बाद Glottis कैंसर ज्यादा होता हैं। और तीसरा Subglottis कैंसर के मरीज़ सबसे कम पाए जाते हैं। तम्बाकू को चबाने, स्मोकिंग और शराब आदि की वजह से गले का कैंसर होने की आशंका सबसे ज्यादा होती हैं। इन सबमें तम्बाकू सबसे ज्यादा कैंसर करक पदार्थ के रूप में Laryngeal cancer को बढ़ावा देता हैं। 40 साल की उम्र के बाद इस तरह के कैंसर सबसे ज्यादा पकड़ में आते हैं। हालाँकि की ऐसा नहीं हैं की सिर्फ 40 वर्ष की आयु के लोगो में ही यह कैंसर हो जाये, यह सभी हो हो सकता हैं। इस प्रकार का कैंसर गरीब या कम आमदनी के लोगो को सबसे ज्यादा होता हैं।

Throat Cancer (गले के कैंसर) के लक्षण क्या होते हैं?

इस तरह के कैंसर में आवाज़ में भारीपन आ जाता हैं। अगर आपकी आवाज़ में लगातार भारीपन हो गया हैं और यह कम होने का नाम नहीं ले रहा हैं तो आपको गले का कैंसर हो सकता हैं। अगर यह बीमारी बढ़ जाती हैं तो इससे सांस लेने में परेशानी भी होने लगती हैं। क्योंकि इसके बढ़ जाने के कारण सांस के आने-जाने का रास्ता नही मिल पाता हैं। मरीज़ को कुछ भी निगलने में भी परेशानी होने लगती हैं। इसके अतरिक्त निगलने में दर्द होना और वज़न का लगातार कम होना गले के कैंसर होने के लक्षण होते हैं। यह भी हो सकता हैं की मरीज़ को कुछ तरल पदार्थ पीने पर कफ की समस्या हो जाये। क्योंकि वोकल कॉर्ड (स्वर के तार) इतने ज्यादा शक्तिशाली नहीं रह जाते की इसे छाती में जाने से रोक सके। साथ ही कुछ खा न पाने के कारण शरीर में कमजोरी आने लगती हैं। कुछ मरीज़ कान में दर्द होने की शिकायत करते हैं। इसके अलावा रोगी की गर्दन में सूजन आ जाती हैं, क्योंकि कैंसर तब गर्दन के लिम्फ नोड्स तक फैल चूका होता हैं।

गले के कैंसर की जांच कैसे की जाती हैं?

ऐसी अवस्था में मरीज़ के Aerodigestive tract की जांच की जाती हैं। स्वर पेट में कैंसर के टेस्ट के लिए Indirect Laryngoscopy की जांच की जाती हैं, ताकि इससे पता चला सके की रोग कहाँ तक पहुच चूका हैं। यह भी इससे पता लगता हैं की वोकल कॉर्ड कैसा हैं? रोगी के गर्दन की भी जांच की जाती हैं। इससे यह पता चलता हैं की कैंसर की वजह से गले की ग्रंथियां तो नहीं न प्रभावित हो रही हैं। रोगी की प्राथमिक चेकअप होने के बाद उसे गले की सिटी स्कैन करवाने के लिए कहा जाता हैं। CT Scan के जरिये ही पता चलता हैं की कैंसर कितना फैला हुआ हैं या नहीं। इससे पता चलता हैं की रोग स्वर पेटी के बाहर फैल रहा हैं या थाइरोइड कार्टिलेज को हानि पहुचा रहा हैं। यह भी देखा जाता हैं की कैंसर कंही आहार नली पर प्रभाव तो नहीं न डाल रहा हैं। कैंसर ने शरीर के किन-किन हिस्सों पर असर डाला हैं। उससे आगे के इलाज तय किया जाता हैं। इसके अलावा छाती का x-ray और CT Scan भी की जाती हैं। इससे यह पता लगता हैं की कैंसर कंही फेफड़ो तक तो नहीं न पहुच चूका हैं। यह जानने के बाद मरीज़ को Anethesia देकर बेहोश कर दिया जाता हैं। फिर Laryngoscopy से बिमारी की पंहुचा पता की जाती हैं। इसके बाद Biopsy की जाती हैं। Biopsy के जरिये ही कैंसर होने की पुष्टि होती हैं।

Throat Cancer Treatment in Hindi. गले के कैंसर का इलाज :-

सांस लेने में परेशानी होना

मरीज़ को कैंसर के बढ़ जाने पर साँसे लेने में परेशानी होती हैं तो मरीज़ की emergency Tracheotomy की जाती हैं। इसमें एक ट्यूब गले की साँस नली में डालते हैं ताकि आवाजाई को आसान बना सके। अगर सांस लेने की जगह कम दिखती हैं तो Direct Laryngoscopy टेस्ट के दौरान भी Tracheotomy की जाती हैं। कैंसर की गंभीरता को स्टेज के मुताबिक़ तय की जाती हैं और यह भी तय किया जाता हैं की कैंसर का इलाज कैसे किया जायेगा? तीसरी और चौथी स्टेज में मल्टी मोडेलिटी ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती हैं। इसे किमो रेडिएशन या सर्जरी की जाती हैं। ऑपरेशन के बाद या फिर रेडियोथरेपी या केमोथेरेपी की जरूरत पड़ती हैं।

सर्जिकल रोबोट का इस्तेमाल

पहली और दूसरी स्टेज में या फिर प्राथमिक अवस्था में Microlaryngoscopic surgery की जा सकती हैं। यह सर्जरी माइक्रोस्कोप की मदद से की जाती हैं। ट्यूमर को साफ़ करने में लेज़र का इस्तेमाल किया जाता हैं। इसमें सर्जिकल रोबोट का इस्तेमाल करते हुए कुछ जगहों पर यह सर्जरी की जा रही हैं। इसके अलावा रेडियो थेरेपी के जरिये भी इस प्रकार के कैंसर पर नियंत्रण पाया जाता हैं। तीसरे और चौथे चरण के कैंसर का इलाज पहुच पर निर्भर करता हैं, यानि की शरीर के स्तर पर हैं। एडवांस ट्यूमर की आमतौर पर सर्जरी की जाती हैं। वह total laryngectomy सर्जरी कहलाती हैं। कुछ चुनिंदा मरीजों में आंशिक Laryngectomy की जा सकती हैं। इसमें Larynx के फंक्शन को बरकरार रखने की कोशिश की जाती हैं। Laryngectomy में सारी larynx के अलावा गले में लिम्फ की ग्रंथियां भी हटा दी जाती हैं। यह एक permanent tracheostoma (छड़) के जरिये ही गले से ही सांस की आवाजाही शुरू की जाती हैं।

स्पीच थेरेपी की जरूरत

क्योंकि larynx को हटा दिया जाता हैं, इस कारण मरीज़ ऑपरेशन के बाद कुछ भी बोल नहीं पाता हैं। बोलने के लिए Tracheoesophageal Prosthesis Operation के समय ही गले में लगाते हैं। ऑपरेशन के बाद मरीज़ को स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती हैं। ताकि वह यह सीख सके की किस प्रकार Prosthesis की सहायता से बोला जा सकता हैं।

सूंघ नहीं पाता हैं मरीज़

रोगी का बोलना फिर से शुरू हो सके इसलिए Electrolarynx भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता हैं। यह बैटरी से चलने वाला गैजेट हैं, इसमें मरीज़ computerized या रोबोट के जैसे बोल सकता हैं। Total Laryngectomy के बाद मरीज़ सूंघ नहीं पाता हैं, क्योंकि वह अपने गले से ही सांस लेता हैं। Larynx न होने के कारण मरीज़ ऑपरेशन के बाद भारी वज़न भी नहीं उठा पाता हैं। ऑपरेशन के बाद निकाले गये कैंसर को Histopathological test के लिए भेजा जाता हैं। इसके बाद तय होगा की आगे कौन सा ट्रीटमेंट (कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी) होगा। ट्रीटमेंट के पूरा होने के बाद मरीज़ को रेगुलर चेकअप के लिए डॉक्टर के पास आना पड़ता हैं। यह पता लगाना जरूरी होता हैं की बीमारी के अवशेष तो नहीं न रह गये हैं, या नए सिरे से कैंसर तो नहीं न बन रहा हैं। अगर बन रहे हैं तो मरीज़ को सावधान होने की जरूरत हैं। इसके नज़र आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे। इसके लक्षण दिखाई देने के बाद परीक्षण करवाना बेहद ही जरूरी हैं। देरी आपके लिए नुकसानदेह साबित होती हैं। कई बार किमोथेरेपी के पूरा होने के बाद किसी और जगह आपको गाँठ दिखाई दे सकती हैं। इसलिए आपको सावधान रहने की जरूरत पड़ती हैं।








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