calendula (गेंदे) के तेल से होते हैं यह गजब के फायदे

Calendula ke tel ke fayde.

गेंदे के फूल तरह दिखाई देने वाला Calendula भी गेंदे की प्रजाति का फूल हैं। आज के लेख में कैलेंडुला और गेंदे के फूल के तेल के फायदे के बारे में जानेंगे।

गेंदे को मेरीगोल्ड भी कहा जाता हैं। कैलेंडुला लेटिन शब्द “केलेंड” से निकला हैं, जिसका मतलब होता हैं “छोटा कैलंडर”, क्योंकि यह फूल ज्यादातर महीने की शुरुवात होने पर खिलता हैं। प्राचीन मिस्र में इसे वर्जिन मेरी को सम्मान देने के लिए चढ़ाया जाता था, साथ ही इसे फ्रेशनेस देने वाले गुण के लिए भी जाना जाता था।

केलैन्ड्यूला ऑइल (गेंदे के तेल) के फायदे :-

1. केलैन्ड्यूला ऑइल में एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-सेप्टिक गुण पाए जाते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल कीड़े के काटने पर, बेड सोर, कटने-जलने और पिम्पल्स के ट्रीटमेंट में भी किया जाता हैं।

2. कैलेंडुला के तेल में एंटी-फंगल गुण भी पाए जाते हैं। जिसके कारण आप इसे दाद-खाज, खुजली, रिंगवर्म और एथलीट फूट के इलाज लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। केलैन्ड्यूला ऑयल दाग-धब्बों को दूर करने में भी सक्षम हैं।

3. मेरीगोल्ड ऑयल और केलैन्ड्यूला ऑइल में प्रदाहनाशी गुण होते हैं। इसके इस्तेमाल से मसल्स में आये तनाव की वजह से हुई सूजन या चोट की सूजन को दूर करने में मदद मिलती हैं। यह चोट लगने के कारण हुई सूजन की समस्या को दूर कर सकता हैं।

4. प्राचीन काल से ही इसका इस्तेमाल पेट दर्द, कब्ज़ और पाचन तन्त्र से जुड़ी बिमारियों को दूर करने के लिए किया जाता रहा हैं। यह लीवर और गॉल ब्लैडर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करता हैं।

5. केलैंड्यूला ऑयल स्किन से समबन्धित कई सारी प्रॉब्लम्स जैसे की एक्जिमा, डर्मटाईटिस और सोरेसिस से भी छुटकारा दिलाता हैं। इन समस्याओं से होने वाली स्किन की जलन को भी कम करता हैं।

6. इसमें प्रदाहनाशी गुण होते हैं इसलिए इस तेल का इस्तेमाल स्पाईडर वेंस, पैर के अल्सर, वेरिकोस वेन्स और शीतदंश के इलाज के लिए भी किया जाता हैं।

7. यह कोलेजन के लेवल को बढ़ाने का काम करता हैं और दाग-धब्बे बनाने वाले टिश्यू को पैदा होने से रोकता हैं।

8. यह सेंसटिव स्किन के लिए भी फायदेमंद होता हैं। यह ड्राय स्किन के लिए मॉइस्चराइजर का काम करता हैं। इससे बुरी तरह से फटी हुई स्किन को ठीक करने में मदद मिलती हैं। इसके अलावा यह डायपर की वजह से होने वाले रैशेज को भी दूर करता हैं।

कैलेंड्यूला ऑयल के नुकसान और साइड-इफेक्ट्स :-

इसके भी कुछ साइड-इफेक्ट्स होते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल भी सावधानी के साथ ही करना चाहिए। प्रेग्नेंट महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भपात भी हो सकता हैं। इसके अलावा दूध पिलाने वाली माओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

कई लोगो को केलैन्ड्यूला ऑइल से एलर्जी भी हो सकती हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करवा ले। सर्जरी के दौरान या इसके बाद दूसरी दवाओं के साथ कैलेंडुला ऑयल का सेवन करने से उनींदेपन की समस्या हो सकती हैं। इसलिए सर्जरी से 15 दिन पहले इसका इस्तेमाल करना बंद कर दे।

कैलेंडुला ऑयल या गेंदे का तेल घर पर आसानी के साथ बनाया जा सकता हैं।

गेंदे के तेल को घर पर बनाने का तरीका :-

गेंदे का तेल बनाने के लिए सबसे पहले गेंदे के सूखे हुए फूल ले। इन फूलों को सूखे हुए अच्छी तरह से साफ़ किये गये कांच के जार में रखे। फिर इस कांच के मर्तबान में ओलिव ऑयल डाले। लेकिन जार में कम से कम एक या 2 इंच की जगह जरूर छोड़ दे, ताकि गेंदे के फूल इसमें पर्याप्त रूप से फ़ैल सके। फिर इन्हें अच्छी तरह से मिक्स करे और ढक्कन लगा कर जार को बंद करदे।

इस कांच के जार को किसी गर्म जगह पर रख दे। इस जार को दिन भर में कई बार हिलाते रहे। 4 से 6 हफ्ते बीतने के बाद इस तेल को मलमल के कपड़े से छान ले और इसे ठंडे अँधेरे कमरे में रखे। लीजिये गेंदे के फूलों से बना हुआ तेल तैयार हैं। इस तेल का इस्तेमाल लगभग एक साल तक किया जा सकता हैं।








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