घर के अन्दर जूतें-चप्पल क्यों नहीं ले जाने चाहिए? जानिए इसके पीछे जुड़े हुए वैज्ञानिक और धार्मिक कारण।

घर के अन्दर जूतें-चप्पल क्यों नहीं ले जाने चाहिए? जानिए इसके पीछे जुड़े हुए वैज्ञानिक और धार्मिक कारण।

भारतीय घरों में ज्यादातर लोग अपने घरों में जूते-चप्पल आदि नहीं पहनते हैं। कहने का मतलब हैं यह की ज्यादातर लोग जब बाहर से घर को आते हैं तो वह अपने जूते-चप्पल घर के बाहर ही निकाल देते हैं। यह करना स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाये तो एकदम सही हैं। क्योंकि जब आप अपने जूते और चप्पल घर के बाहर निकालते हैं तो बाहर की गन्दगी आपके घर में दाखिल ही नहीं हो पाती हैं। जब घर में जूतों और चप्पलों पर लगी धुल-मिट्टी, गन्दगी घर में दाखिल ही नहीं होगी तो निश्चित ही घर में साफ़-सफाई बनी रहेगी और आप बीमार नहीं होंगे। इसलिए घर से बाहर जूते और चप्पलों को निकालने की आदत डाले। आइये जानते हैं घर से बाहर जूते चप्पल निकालने के बारे में मॉडर्न साइंस और धार्मिक मान्यता क्या कहती हैं?

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार आखिर घर के अंदर चप्पल-जूतें क्यों नहीं ले जाने चाहिए :-

धार्मिक कारणों की बात करे तो हिन्दू मान्यता यह हैं की घर एक मंदिर की तरह पवित्र स्थल हैं। ऐसे में पवित्र जगहों पर जूतें या चप्पल पहन कर नहीं जाना चाहिए। इसी तरह घर के अंदर भी जूते या चप्पल पहन कर जाना निषेध हैं। जब भी हम बाहर के गंदे जूते पहन कर घर के अंदर प्रवेश करते हैं तो बाहर की गंदगी घर के अंदर ले लाते हैं और घर का वातावरण भी इससे खराब होता हैं।

वास्तु शास्त्र भी मानता हैं इसे गलत

वास्तु शास्त्र की माने तो बाहर पहने जाने वाले जूतें-चप्पल जब घर में दाखिल हो जाते हैं तो यह यह अपने साथ घर के बाहर की नेगेटिव एनर्जी घर में लेकर आते हैं। इसलिए घर के अंदर जाने से पहले अपने चप्पल और जूतों को घर के बाहर ही निकाल देना चाहिए।

रिसर्च क्या बताते हैं

चप्पल और जूतों को घर से बाहर निकालने का साइंटिफिक रीज़न भी हैं। युनिवेर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना में हुई एक रिसर्च के अनुसार हमारे चप्पलों और जूतों में 421 हज़ार बैक्टीरिया होते हैं। जिनमे से 90% बैक्टीरिया हमारे भोजन और पानी के साथ मिल जाते हैं। इस रिसर्च से यह भी पता चला की जूतों और चप्पलों में 7 Different Types के 27% बैक्टीरिया होते हैं जो श्वसन और पाचन तंत्र दोनों के लिए नुकसानदायक हैं। लेकिन जब आप आप पहने हुए शूज घर के बाहर ही निकाल देते हैं तो आपके घर का फर्श और कमरों में यह बैक्टीरिया पहुच ही नहीं पाते है।

रिसर्च यह भी बताते हैं की जब हम सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करते है, तो उन टॉयलेट्स पर प्रति स्क्वायर इंच के एरिया में 2 मिलियन बैक्टीरिया रहते हैं। वैज्ञानिकों की माने तो सड़क के किनारे पड़े कूड़े-कचरे, गन्दी चीज़ों से हम बच कर चलते हैं, लेकिन बरसात के दिनों में यह सभी चीज़ें पानी के साथ घूल-मिल जाती हैं। जिसके कारण जब आप सड़क पर चलते हैं तो लाखों बैक्टीरिया आपके जूतों या चप्पलों पर चिपक जाते हैं। इसलिए घर के बाहर ही जूतें और चप्पलों को निकालना चाहिए।




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