जानिए धर्मराज युधिष्ठिर ने कौन से झूठ बोले थे?

जानिए धर्मराज युधिष्ठिर ने कौन से झूठ बोले थे?

महाभारत में पांडवो में ज्येष्ठ युधिष्ठिर को धर्मराज कह कर बुलाया जाता हैं। धर्मराज का अर्थ यह हैं की जो व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलता हैं। जो हमेशा सत्य का साथ दे और सत्य बोले और सत्य का पालन करे।

लेकिन आपको यह रोचक बात पता हैं की धर्मराज युधिष्ठिर ने भी कुछ असत्य बातें कही थी? आप उनके द्वारा बोले गये असत्य के बारे में जानते हो। लेकिन उन्होंने सिर्फ 1 असत्य नहीं बोला था, बल्कि और भी कई असत्य बोले थे।

यह बात तो सभी जानते हैं की गुरु द्रोणाचार्य का वध करने के लिए श्रीकृष्ण के कहने पर धर्मराज युधिष्ठिर ने गुरु द्रोण से कहा की अश्वत्थामा मारा गया, जबकि अश्वत्थामा नाम का हाथी मारा गया था। लेकिन युधिष्ठिर ने यह भी कहा था की वह आपका पुत्र नहीं एक हाथी था। परन्तु जब युधिष्ठिर ने यह बात कही तब शंख की ध्वनि को तेज़ कर दिया गया। जिससे गुरु द्रोण को सिर्फ इतना ही सुनाई दिया की अश्वत्थामा मारा गया और हाथी के मरने की बात वह सुन नहीं पाये। अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर वे बेसुध हो गये। तब धृष्टद्युम्न ने अपने पिता द्रुपद की हत्या का बदला लेने के लिए गुरु द्रोणाचार्य का सिर धढ़ से अलग करके उनका वध कर दिया।

उपरोक्त बताया गया अर्धसत्य जिसे असत्य भी माना जा सकता हैं। यह बात सभी लोग जानते हैं की धर्मराज युधिष्ठिर ने यह असत्य कहा था। लेकिन आपको हम बता दे की युधिष्ठिर ने और भी कई असत्य और झूठ बातें भी कही थी।

जब पांडवो को 1 साल का अज्ञातवास के लिए जाना था तो उनके सामने यह शर्त रखी गयी थी की अगर अज्ञातवास के दौरान उन्हें कोई भी पहचान लेगा तो उन्हें फिर से दुबारा वनवास जाना पड़ेगा। इस अज्ञातवास के दौरान पांडव राजा विराट के नगर में पहुचे। जब राजा विराट ने उनसे उनका परिचय पूछा तो अपनी पहचान छुपाने के लिए युधिष्ठिर ने कुछ झूठ बोले।

अपना परिचय देते हुए युधिष्ठिर ने कहा की वह एक ब्राह्मण हैं और उनका नाम कनक हैं। वह वैयधरा नाम के ब्राह्मण परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। उन्होंने स्वयं को धर्मराज युधिष्ठिर का मित्र भी बताया। उन्होंने कहा की मैं भी पाशे खेलने में कुशल हूँ। मैं सुदूर एक नगर से आया हूँ।

इस प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने और अपने परिवार के बारे में भी राजा विराट को झूठ जानकारी दी। इतना ही नहीं उन्होंने अपने भाईयो के बारे में भी राजा विराट से झूठ बोला।

उन्होंने सभी पांडवो के जूठा परिचय राजा विराट को दिया। उन्होंने सभी पांडवो के झूठे नाम राजा विराट को बताने के बाद यह भी कहा की इनसे मेरा कोई नजदीकी रिश्ता नहीं हैं, बल्कि यह सब लोग मेरे परिचित हैं।

आखिरी झूठ यह बोला की उन्होंने कई राजाओं के दरबार में काम किया हैं। महाभारत ग्रन्थ में सारा वार्तालाप लिखा गया हैं। राजा विराट ने उनसे क्या क्या प्रश्न किये और उन्होंने अपनी और अपने परिवार की पहचान छुपाने के लिए क्या क्या उत्तर दिए और कौन कौन से असत्य कहे इन सभी का उल्लेख महाभारत में मिलता हैं।

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