जानिए समोसे का इतिहास, समोसा भारत का नहीं हैं.

जानिए समोसे के बारे में रोचक जानकारी और तथ्य.

हमारे देश की घर गली-नुक्कड़ से लेकर फाइव स्टार होटल तक में नजर आने वाला समोसा भारतीयों का पसंदीदा है, बहुत कम लोग ही ऐसे होंगे जिसे समोसा ना पसंद हो। बच्चे हो या बूढ़े समोसा सभी को पसंद होता है, लेकिन क्या आपने ये जानने की कोशिश की है, कि आखिर समोसे की शुरुआत कैसे हुई।

मिस्र से जुदा हैं समोसे का इतिहास :-

समोसे का इतिहास काफी पुराना है और खास बात ये है कि इसकी शुरुआत भारत में नहीं बल्कि किसी और देश में हुई थी। इतिहासकारों और जानकारों की माने तो समोसा भारत में मध्यपूर्वं एशिया के रास्ते यहां पहुंचा हैअगर हम खान-पान के इतिहास पर नजर डालें तो पाएंगे की समोसे ने जितनी लंबी यात्रा तय की है शायद ही किसी और व्यंजन ने की होगी। जानकार बताते हैं कि समोसे का जन्म मिस्र में हुआ था जिसके बाद ये लीबिया पहुंचा और उसके बाद मध्यपूर्व एशिया होते हुए भारत तक।

शाही और अमीर परिवारों का व्यंजन था समोसा :-

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि दसवीं शताब्दी में मध्य एशिया में समोसा एक व्यंजन के रूप में सामने आया था। 13-14वीं शताब्दी में व्यापारियों के माध्यम से समोसा भारत पहुंचा। महान कवि अमीर खुसरो (1253-1325) ने एक जगह जिक्र किया है कि दिल्ली सल्तनत में उस दौरान स्टड मीट वाला घी में डीप फ्राई समोसा शाही परिवार के सदस्यों व अमीरों का प्रिय व्यंजन था।

आईने अकबरी में भी समोसे का हुआ हैं ज़िक्र :-

14 वीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आए इब्नबतूता ने मो. बिन तुगलक के दरबार के बारे में बताते हुए लिखा है कि दरबार में भोजन के दौरान मसालेदार मीट, मूंगफली और बादाम स्टफ करके तैयार कर लजीज समोसा परोसा गया, जिसे लोगों ने बड़े चाव से खाया। यही नहीं 16वीं शताब्दी के मुगलकालीन दस्तावेज आईने अकबरी में भी समोसे का जिक्र बकायदा मिलता है।

कहाँ और किस नाम से जाना जाता हैं समोसा :-

समोसे को अंग्रेजी में तो समोसा ही कहा जाता है लेकिन इसके और भी की नाम है जैसे अरबी में इसे सम्बुसका, बांग्ला में सिंघाड़ा, गुजराती में सुमोस, फारसी और उर्दू में सम्बुसक, तुर्की और मध्य एशिया में सम्सा और ईरान में सन्बुसे के नाम से जाना जाता है।

1000 साल बाद भी समोसे के तिकोने आकार में परिवर्तन क्यों नहीं हुआ :-

समोसे का यह सफर बड़ा ही निराला रहा है। समोसे की उम्र भले ही बढ़ती गई पर पिछले एक हजार साल में उसकी तिकोनी आकृति में जरा भी बदलाव नहीं आया। आज समोसा भले ही शाकाहारी-मांसाहारी दोनों रूप में उपलब्ध है पर आलू के समोसों का कोई सानी नहीं है और यही सबसे ज्यादा पसंद भी किया जाता है। इसके बाद पनीर एवं मेवे वाले समोसे पसंद किए जाते हैं। अब तो मीठे समोसे भी बाजार में उपलब्ध हैं। समोसे का असली मजा तो उसे डीप फ्राई करने में है पर पश्चिमी देशों में जहां लोग कम तला-भुना पसंद करते हैं, वहां लोग इसे बेक करके खाना पसंद करते हैं। भारत विभिन्नताओं का देश है, सो हर प्रांत में समोसे के साथ वहां की खूबियां भी जुड़ती जाती हैं।

भारत में कितनी तरह के मिलते हैं समोसे :-

उत्तर प्रदेश और बिहार में आलू के समोसे खूब पसंद किए जाते हैं तो गोवा में मांसाहारी समोसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। पंजाबी समोसा खूब चटपटा होता है तो चाइनीज क्यूजीन पसंद करने वालों के लिए नूडल्स स्टड समोसे भी उपलब्ध हैं। बच्चों और बूढ़ों दोनों में समोसे के प्रति दीवानगी को भुनाने के लिए तमाम बहुराष्ट्रीय कम्पनियां इसे फ्रोजेन फूड के रूप में भी बाजार में प्रस्तुत कर रही हैं।

समोसे की बिना नाश्ता पूरा क्यों नहीं माना जाता हैं?

आज भी दुनिया में समोसा एक मात्र ऐसा व्यंजन है जो टाइम पास करते हुए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ लोग भारत में चाय भी लेना पसंद करते हैं। आज भी जब कोई मेहमान भारतीय घरों में आते हैं तो उन्हें नाश्ते में समोसा जरूर दिया जाता है। समोसे का स्वाद ही कुछ ऐसा है कि ये हर किसी की जुबान पर अपना प्रभाव छोड़ ही जाता है और इसके बिना तो नाश्ता पूरा माना ही नहीं जाता है।

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