पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रोचक तथ्य और रहस्य के बारे में जानिए।

Jagannath Mandir ke baare mein interesting facts

हिन्दू धर्म में चार धामों में एक प्रमुख्य धाम पुरी का जगन्नाथ मंदिर भी हैं। यह पवित्र धाम भारत के ओडिशा राज्य में पुरी शहर में स्तिथ हैं। जगन्नाथ पूरी में भगवान श्री कृष्ण अपने जयेष्ठ भ्राता भगवान बलराम जी और बहन देवी सुभद्रा के साथ विराजित हैं। आज के लेख में हम जगन्नाथ मन्दिर के कुछ रोचक तथ्य, जानकारी और रहस्य आपको बताएँगे जो आपको हैरान कर सकते हैं।

प्रतिवर्ष जगन्नाथ पुरी में जून-जुलाई के महीने में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती हैं। जिसमे भाग लेने के लिए विश्व के तमाम हिस्सों से श्रद्धालू आते हैं। ज्यादातर लोगो की यह मान्यता हैं की इस रथयात्रा में भगवान के रथ की रस्सी खींचने या रस्सी को छूने मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती हैं। इस रथयात्रा को बड़ी धूमधाम से निकाला जाता हैं। इस रथयात्रा में भगवान श्री कृष्ण, भगवान बलराम और देवी सुभद्रा के अलग-अलग रथ निकाले जाते हैं, जिसमे उनकी मूर्तियों को सुसज्जित करके रथ में विराजित किया जाता हैं। जो की देखने में काफी ज्यादा भव्य और आकर्षित लगता हैं और यह काफी मनमोहक दृश्य होता हैं। आइये जानते हैं जगन्नाथ जी मंदिर के और कुछ रोचक जानकारी और बातें, जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो। यानी जगन्नाथ मंदिर के रहस्य और फैक्ट्स आदि के बारे में।

चार धाम की यात्रा का महत्व और चार धाम कहाँ पर स्तिथ हैं?

चार धाम की यात्रा के बारे में यह मान्यता हैं की भगवान विष्णु जब यात्रा पर निकलते हैं तो वह भारत के उत्तरी भाग के उत्तराखंड के चमोली में बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, फिर पक्षिम दिशा में स्तिथ गुजरात के द्वारिका में वस्त्र धारण करते हैं। फिर वह भारत के पूर्व दिशा में स्तिथ पुरी में जाकर भोजन ग्रहण करते हैं और अंत में दक्षिण में स्तिथ रामेश्वरम जाकर विश्राम करते हैं। ऐसा विश्वास हैं की भगवान श्री कृष्ण पुरी में साक्षात् निवास करते हैं। भगान श्री कृष्ण को यहाँ जग के नाथ जगन्नाथ जी के नाम से जाना जाता हैं।

जगन्नाथ पुरी के मंदिर के रोचक रहस्य और बातें :-

■ मंदिर के ऊपर कोई भी पंछी नहीं उड़ता हैं :-

यह बात आपको हैरान कर सकती हैं की इन मंदिर की गुबंद के आसपास अभी तक कोई भी पंछी उड़ता हुआ दिखाई नहीं दिया हैं। साथ ही इस मंदिर के ऊपर से हवाई जहाज़ भी नहीं उड़ाया जा सकता। भारत के ज्यादातर मंदिरों की गुबंद पर आपको पंछी बैठे हुए या उड़ते हुए दिखाई दे ही जायेंगे, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर पंछी उड़ते हुए नज़र ही नहीं आते हैं। इस भव्य मंदिर का निर्माण 7वीं सदी में किया गया हैं। यह रोचक जानकारी सच में आश्चर्यजनक हैं।

■ हर 12 साल बाद विराजित मूर्तियाँ बदल जाती हैं

पुरी में भगवान श्री कृष्ण को जगन्नाथ कहा जाता हैं। भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम जी और बहन सुभद्रा जी के साथ विराजित होते हैं। यह तीनो मूर्तियाँ काष्ठ की बनी हुई होती हैं। हर 12 साल बाद इन प्रतिमाओं को नव कलेवर दिया जाता हैं। मूर्तियाँ जरूर नयी बनाई जाती हैं, लेकिन इनका आकार और रूप पहले जैसे ही रहता हैं। ऐसा कहा जाता हैं की इन मूर्तियों की पूजा नहीं की जाती हैं, बल्कि इन्हें मात्र दर्शन करने के लिए ही रखा गया हैं।

■ इस मंदिर के रसोई घर में भोजन की कभी भी कमी नहीं होती हैं

इस मंदिर की रसोई घर में 300 रसोइये अपने 500 सहयोगियों के साथ मिलकर भगवान जगन्नाथ जी का प्रसाद बनाते हैं। लगभग 20 लाख भक्त यहाँ पर भोजन कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है की चाहे प्रसाद कुछ हजार लोगो के लिए क्यों न बनाया गया हो, लेकिन इससे लाखों लोगो का पेट भर सकता हैं। मंदिर के अंदर भोजन पकाने की सामग्री पुरे साल तक जमा रहती हैं। प्रसाद की एक भी मात्रा को कभी भी व्यर्थ नहीं किया जाता हैं।

इस मंदिर में प्रसाद पकाने का तरीका भी काफी ज्यादा अनोखा और मज़ेदार हैं। प्रसाद पकाने के लिए 7 बर्तन एक-दुसरे के उपर रखे जाते हैं और प्रसाद को लकड़ी की आंच पर ही पकाया जाता हैं। इस प्रक्रिया में प्रसाद बनाने में शीर्ष पर रखे गये बर्तन में सामग्री सबसे पहले पकती हैं, फिर क्रमश: निचे की तरफ एक के बाद एक पकती चली जाती हैं। सबसे हैरानी वाली बात यह हैं की सबसे निचे वाले बर्तन का भोजन सबसे पहले न पक कर सबसे ऊपर रखे बर्तन का भोजन सबसे पहले पकता हैं।

■ मन्दिर के गुबंद की परछाई नहीं बनती हैं

यह विश्व का सबसे ऊँचा और भव्य मंदिर हैं। यह मंदिर 4 लाख वर्गफूट एरिया में फैला हुआ हैं, इस मंदिर की ऊंचाई तकरीबन 214 फुट हैं। मंदिर के पास खड़े रह कर इसका गुबंद यानि शिखर देख पाना नामुमकिन सी बात हैं। मुख्य गुबंद की छाया दिन भर में किसी भी समय अदृशय ही रहती हैं। यानी की इस मंदिर के गुबंद की परछाई दिखाई ही नहीं देती हैं।

■ वायु के उल्टी दिशा में लहराता हैं झंडा

यह बात आपको हैरान कर सकती हैं की मंदिर के शिखर में जो लाल रंग का ध्वज लगाया गया हुआ हैं, वह हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता हैं। जो की काफी आश्चर्यजनक हैं। साथ ही रोजाना शाम के समय मंदिर में लगाए गये ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़ कर बदला जाता हैं। झंडे पर शिव का चन्द्रमा बना हुआ हैं।

■ सुदर्शन चक्र भी हैं रहस्यमयी

इस मंदिर के शिखर पर बने सुदर्शन चक्र को आप पुरी शहर में किसी भी जगह से आसानी के साथ देख सकते हैं। इस सुदर्शन चक्र की खासियत यह हैं की इसे आप किसी भी जगह से देखे यह आपको हमेशा सामने की ओर से दिखाई देगा, इसे नीलचक्र भी कहा जाता हैं। यह अष्टधातु से बनाया गया हैं और इसे काफी पवित्र और पावन माना जाता हैं।








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