भूकंप आने के संकेत देते हैं यह 4 जानवर।

bhukamp aane se pahle sanket dete hain yeh jaanwar

प्राचीन युग से इस बात को स्वीकार किया जाता हैं की पशु-पंछियों के पास आने वाले तबाही के बारे में पहले से पता लग जाने की शक्ति होती हैं। चाहे इस बात को विज्ञानिक रूप से प्रूफ नहीं किया गया हो, लेकिन फिर भी साइंस ने इसे पूरी तरफ से झूठा भी नहीं माना हैं। भूकंप आने को लेकर कई सारे देश हमेशा चिंता में रहते हैं, क्योंकि इन देशों में भूकम्प आते ही रहते हैं। आज विज्ञान ने कितनी भी ज्यादा उन्नति क्यों न कर ली हो? लेकिन आज भी साइंटिस्टों द्वारा भूकंप आने की भविष्यवाणी करने वाली कोई भी मशीन नहीं बनाई जा सकी हैं। मतलब की भूकंप कब आएगा और किस समय पर आएगा? इसका उत्तर देने के लिए वैज्ञानिक भी पूरी तरह से असफल ही हैं।

लेकिन कुदरत ने कुछ जानवरों को भूकंप आने से पहले पता लग जाने की खास शक्ति प्रदान की हैं। वैज्ञानिको के अनुसार ग्राउंड वाटर के रसायनों में परिवर्तन आने की वजह से पानी में रहने वाले जानवरों को भूकम्प आने के संकेत पहले ही मिल जाते हैं। आइये जानते हैं कुछ जानवरों के बारे में जिन्हें भूकम्प आने से पहले ही पता लग जाता हैं और यह जानवर भूकम्प आने के संकेत भी देते हैं।

भूकम्प आने के संकेत देते हैं यह 4 जानवर :-

■ बिल्ली :-

बिल्ली भी भूकंप आने से पहले देती हैं संकेत

एनिमल प्लेनेट के रिसर्चर्स यह कहते हैं की बिल्लियाँ भी भूकम्प आने के सन्देश वाहक हो सकती हैं। जैसा की विज्ञान का यह मानना हैं की वाइब्रेशन को इंसान के मुकाबले जानवर ज्यादा अच्छी तरह से समझ पाते हैं। इसलिए अगर आपकी पालतू बिल्ली अचानक से बिस्तर से निकल कर बाहर भागने लगे और वह बिना किसी वजह से ज्यादा डरी और घबराई हुई नज़र आने लगे तो यह भूकम्प के आने के संकेत हो सकते हैं। क्योंकि बिल्ली भूकंप आने के सूचक होती हैं।

■ मेंढक :-

भूकंप आने से पहले संकेत देता हैं मेंढक

साल 2009 में इटली में भूकंप आने से पहले वहा के एक तालाब के सारे मेंढक तालाब के बाहर आ गये थे। ऐसा मेंढकों ने भूकंप आने से ठीक पहले किया था। इस पर इटली में काफी ज्यादा रिसर्च की और रिसर्च के नतीजे में यह बताया गया,” हो सकता हैं की धरती के भीतर प्रेशर की वजह से चट्टानों से चार्ज कण निकले हो और पानी के साथ उसकी प्रतिक्रिया हो गयी हो।“ रिसर्च टीम के मुखिया ने यह कहा, उनके थ्योरी के आधार पर बायोलॉजिस्ट और जिओलॉजिस्ट्स को इस विषय पर आगे काम जरूर करना चाहिए।“

■ ओरफिश :-

Oarfish

समुंदर के किनारे ओरफिश का मिल पाना काफी ज्यादा मुश्किल होता हैं। क्योंकि यह ऐसी मछलियाँ हैं जो समुंदर के गहराई में रहती हैं। परन्तु 18 से 20 फूट लम्बाई वाली कुछ ओरफिश को जब समुंदर के किनारे पाया जाता हैं तो भूकंप आने की ख़बरें ज्यादा तेज़ी के साथ फैलने लगती हैं। क्योंकि साल 2011 में सूनामी आने से ठीक पहले लगभग 20 ओरफिश पानी से बाहर आ गयी थी। उस समय जापान टाइम्स ने इन मछलियों को Messenger from the Sea God के नाम से संबोधित किया था। साल 2010 में भूकंप आने से पहले वहां के कुछ मछुआरों ने कुछ ओरफिश को बीच के किनारे पर आते हुए देखा था।

■ लाल चींटी :-

Lal Chinti bhi deti hain earthquake aane ke sanket

यूरोपियन जिओसाइंस यूनियन ने अपनी वार्षिक मीटिंग में एक रिपोर्ट पेश की, जिसमे लाल चींटी को भूकंप आने के संदेशवाहक के रूप में बताया गया। इस रिपोर्ट के मुताबिक लाल चींटी भी भूकम्प आने के संकेत को अच्छी तरह से समझ लेती हैं। गैबरियल बर्बेरीच नाम के जिओ बायोलॉजिस्ट ने इस बात को जानने के लिए लाल चींटी पर 3 सालों तक रिसर्च की और चींटी की सभी एक्टिविटीज की निगरानी की। उसके बाद उन्होंने अपनी रिसर्च में यह बताया की अगर 2 रेक्टर स्केल का भूकम्प आता हैं तो चींटियाँ अपनी गतिविधियों को बदल लेती हैं। पहले चींटीया रात के समय अपने बिलों में रहती थी, लेकिन भूकम्प के समय वह बिल से बाहर निकलने लगती हैं।






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