मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी क्यों बनाई और चढ़ाई जाती हैं?

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी क्यों बनाई और चढ़ाई जाती हैं?

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी क्यों बनाई और चढ़ाई जाती हैं? इस प्रशन का उत्तर जानिए। जानते हैं इस मज़ेदार और रोचक जानकारी के बारे में।

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनायीं जाती हैं और भगवान सूर्य या अपने इष्टदेव या देवी-देवताओं को चढ़ाया जाता हैं। आखिर ऐसा क्या कारण हैं की लोग मकर संक्रान्ति के लिए दिन खिचड़ी ही बनाते हैं और अपने भगवान पर इसे चढ़ाते हैं?

खिचड़ी का नाम सुनते ही मूंह में पानी आ गया न! हो सकता हैं आपको खिचड़ी खाए कई दिन हो गये हैं। कई व्यक्ति ऐसे होते हैं जो पुरे साल खिचड़ी नहीं बनाते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के लिए दिन खिचड़ी जरूर बनाते हैं। इसका कारण यह हैं की मकरसंक्रांति के दिन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में खिचड़ी बनाने की परम्परा की शुरुवात हुयी। इसलिए कई स्थानों पर मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता हैं।

खिचड़ी बनाने की परम्परा गुरु गोरखनाथ जी ने शुरू की थी। बाबा गोरखनाथ को भगवान शंकर का अंश माना जाता हैं। कथा के अनुसार खिलजी के आक्रमण के समय नाथ जोगियों को खिलजी की सेना से लड़ाई के दौरान खाना पकाने का समय नहीं मिल पाता था। जिससे जोगी अकसर भूखे रह जाते थे।

अकसर भूखे रहने की वजह से नाथ जोगी कमजोर होने लगे थे। तब इस समस्या का समाधान करने के लिए बाबा गोरखनाथ ने सब्जी, दाल और चावल को एक साथ पकाने को कहा। यह बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक पकवान बन गया। खिचड़ी को खा कर शरीर को तुरंत उर्जा मिलने लगी। नाथ योगियों को यह पकवान बहुत ही पसंद आया। गुरु गोरखनाथ जी ने इसका नाम खिचड़ी रख दिया।

आसानी से और जल्दी बन जाने वाली खिचड़ी नाथ योगियों की भोजन की समस्या को हल करने वाला व्यंजन बन गया और खिलजी के आतंक को दूर करने में नाथ योगियों ने जीत प्राप्त की। खिलजी से मुक्ति के कारण मकर संक्रांति को गोरखपुर में विजय दर्शन पर्व के रूप में भी मनाया जाता हैं। गोरखपुर का खिचड़ी मेला विश्व प्रसिद्ध मेला हैं।

गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ जी के मंदिर में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी मेले का प्रारम्भ होता हैं। कई दिनों तक चलने वाले इस मेले में गुरु गोरखनाथ जी को खिचड़ी का भोग लगाया जाता हैं और प्रसाद के रूप में इसे लोगो में बांटा जाता हैं।








इन्हें भी जरूर पढ़े...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *