मेहनत क्यों करनी चाहिए? एक लकड़हारे की रोचक कहानी जरूर पढ़े।

Story About Hard Work In Hindi.

एक गाँव में एक लकड़हारा रहता था, जो अपने गुजारे के लिए रोजाना जंगल से लकड़ीयां काट कर उन्हें बाज़ार में बेच देता था। लकड़हारे के साथ एक लड़का जिसका नाम रामू था, रामू को आप लकड़हारे का शिष्य या नौकर कुछ भी कह सकते हैं, वह भी लकड़हारे के साथ रहता था। रामू लकडहारे के साथ जंगल में जाता और लकड़ियों को इकट्ठा करता और लकड़हारे के काम में उसकी मदद करता।

दिन बितते गये, एक दिन लकड़हारा और रामू जंगल में लकड़ियाँ काट रहे थे, की अचानक उन्हें शेर के दहाड़ने की आवाज सुनाई दी। जैसे ही उन्होंने शेर की गर्जना सुनी, वह दोनों घबरा कर जल्दी से पेड़ पर चढ़ गये। उन्होंने देखा की एक शेर ने हिरण का शिकार किया और उसे मूंह में दबाकर पेड़ के नीचे लेकर आया और शिकार किये गये हिरण को खाने लगा। लकड़हारा और उसका शिष्य डर के मारे पेड़ पर चुपचाप करके बैठे रहे और शेर को खाते हुए देखते रहे।

जब शेर का पेट भर गया तो वह बचे हुए हिरण को वहां छोड़ कर चला गया। शेर के जाने के बाद जब लकड़हारा और रामू पेड़ से नीचे उतरने लगे तो उन्होंने एक घायल लोमड़ी को आते हुए देखा। वे दोनों फिर से पेड़ की डाल पर बैठ गये। लोमड़ी लंगड़ाते हुए चल रही थी, वह धीरे-धीरे करके मरे हुए हिरण के पास आने लगी।

बचे हुए हिरण के पास जाकर लोमड़ी ने हिरण का मांस खाया और अपनी भूख को शांत किया। जब लोमड़ी चली गयी तो कुछ और छोटे जानवर जैसे की जंगली बिल्ली आदि ने भी बचे हुए हिरण के मांस को खाया और अपनी भूख मिटाई। फिर कुछ गिद्ध और कौवों ने भी बचे हुए हिरण का मांस खाया और अपना पेट भरा। और अंत में छोटे-मोटे कीड़े-मकौड़े ने भी उसी हिरण से अपना-अपना पेट भरना शुरू कर दिया।

इस तमाम दृश्य को देख कर लकड़हारे के मन में एक अजीब सा विचार आया। वह कहने लगा, “हे भगवान! आप धन्य हैं प्रभु, आप अपने बनाये गये जीवों को कभी भी भूखा नहीं रहने देते हैं, और तो और उनकी भूख को शांत करने के लिए उनका भोजन उनके मूंह तक भी पंहुचा देते हैं।“

लकड़हारा फिर बोलने लगा, “वाह, ईश्वर आप सच में महान हो, उनको भी आप भोजन देते हैं, जो मेहनत करके खाने के लायक न हो, उन्हें भी भोजन प्रदान करते हो, वाह मेरे मालिक।“

इस दृश्य का उस लकड़हारे पर इतना ज्यादा प्रभाव पड़ा की उसने अपनी कुल्हाड़ी अपने शिष्य को दे दिया और बोला,” जब भगवान् किसी जीव को भूखा नहीं रहने देते हैं तो हमें काम करने की क्या जरूरत हैं? क्यों न हम भी आराम से बैठ जाये, क्योंकि भगवान हमारा पालन पोषण खुद ही करेंगे। और हम अपनी कुटीया में बैठ कर ईश्वर की भक्ति करेंगे।“

लकड़हारा ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “जब ज़ख़्मी लोमड़ी की भूख ईश्वर बिना कुछ परिश्रम किये मिटाता हैं तो मुझे यकीन हैं की भगवान हमें कभी भी भूखा नहीं रहने देगा।“

इसके बाद लकड़हारा अपनी कुटिया में भगवान की भक्ति में डूब गया। और दुनिया से अपना नाता तोड़ लिया। लेकिन उसके शिष्य ने मेहनत के रास्ते को चुना और अपने गुरु की जगह पर काम करने लगा। रामू अब जंगल से लकड़ियाँ काटने लगा और उन्हें बाज़ार में बेचने गया।

पहले ही दिन जब वह बाज़ार में काटी हुई लकड़ियों को बेचने के लिए पंहुचा। तो एक अमीर सेठ ने रामू से सारी लकड़ियाँ खरीद ली। और उसने रामू को लकड़ियों का बहुत ही अच्छा मूल्य भी दिया। सेठ ने रामू से कहा की जब भी वह लकड़ियाँ काटे तो उसे वह उसके गोदाम में पहुंचा दिया करे।

रामू खुश होकर सेठ द्वारा दिए गये पैसों को लेकर लकड़हारे के घर गया। और अपनी कमाई में से कुछ हिस्सा अपने गुरु (लकड़हारे) के हाथ पर रखा। रामू ने लकड़हारे के मना करने बावजूद उसको वह रकम दे ही दी। इसपर लकड़हारा बहुत ज्यादा प्रसन्न हुआ और बोला, “देखा आज मेरा पहला दिन हैं और किस तरह मेरे प्यारे प्रभु ने मेरा हक मेरे तक पंहुचा ही दिया।“

इस पर रामू बोला, “आप फ़िक्र न करे, अब मैं हर दिन आपको अपनी आमदनी का एक हिस्सा आपको लगातार देता रहूँगा।“

दिन बीतते गये, और रामू की आमदनी में लगातार वृद्धि होने लगी। और अब रामू न सिर्फ अपने गुरु को  अपनी आमदनी का हिस्सा देता, बल्कि दुसरे गरीब लोगो की भी मदद करता। रामू गरीब लोगो को भोजन आदि भी करवाता रहता था। दूसरी ओर लकड़हारा इसे ईश्वर का दिया हुआ वरदान समझते हुए लेता रहा और सारा दिन कोई काम न करता।

एक दिन शिष्य अपने गुरु के पास आया। रामू ने लकड़हारे को अपना नया घर लेने की ख़ुशी में रात के भोज का आमंत्रण दिया। यह सुनकर लकड़हारा बहत्त प्रसन्न हुआ और उसे आशीर्वाद देते हुए, उसके साथ चल दिया।

जब लकड़हारा अपने शिष्य रामू के साथ रामू के नए घर में गया। तो वह रामू के शानदार घर को देखकर हैरान रह गया। लकड़हारा बोला, “अरे! इतना शानदार घर और यह इतना बड़ा रात्री भोज, यह कैसे हुआ?”

रामू बोला, “उस्ताद यह सब आपकी तालीम और आपके द्वारा दी गयी इस कुल्हाड़ी के कारण हैं। जिसकी वजह से भगवान ने मुझे इतना अच्छा घर खरीदने की हैसियत दी।“

रात्री भोज करने के बाद लकड़हारा अपनी कुटिया में वापिस आ गया। इस समय लकड़हारा बहुत ज्यादा परेशान और दुःखी था। और वह गुस्से में बडबडाते हुए बोला, ओह! मैंने अपनी कुल्हाड़ी उसे क्यों दी थी? आज अगर वो कुल्हाड़ी मेरे पास होती तो यक़ीनन मैं भी ऐसा ही शानदार घर खरीद लेता। वाह रे भगवान! यह तेरा कैसा न्याय हैं? की उसको तो तूने इतना ज्यादा अमीर बना दिया और मुझे इतना गरीब बना दिया। मुझे हर दिन उसकी दी गयी थोड़ी सी खैरात पर गुजारा करना पड़ा, जबकि वो कल का लड़का जिसने काम भी मुझसे ही सीखा, आज इतनी ठाठ से जिन्दगी जी रहा हैं। यह सरासर नाइंसाफी हैं।“

इसके बाद लकड़हारा फूट-फूट कर रोने लगा। तभी उसे एक आवाज़ सुनाई दी, “तूने लोमड़ी से प्रेणना लेकर अपने लिए जो रास्ता चुना, उससे तुझे तेरी भूख को मिटाने के लिए उतना धन मिलता रहा। लेकिन तेरे इस शिष्य ने लोमड़ी की बजाये, शेर से शिक्षा ली की न सिर्फ अपने खाने का इंतजाम किया, बल्कि तेरे और तेरे जैसे कई सारे गरीब बन्दों की भूख मिटाने का जरिया बना। अब तू बता, तेरी शिकायत जायज़ हैं या गलत।“

तो दोस्तों देने वाला हाथ लेने वाले हाथ से हमेशा ऊपर ही रहता हैं। एक मजबूत और खुशहाल व्यक्ति वही हैं जो दुसरो की मदद करता हैं। आप सभी को शेर बन कर ही जीना चाहिए ताकि अपने से कमजोर लोगो का भी आप सहारा बन सके। इसलिए कभी भी हाथ पर हाथ धर कर किस्मत के सहारे नहीं बैठे रहना चाहिए, बल्कि मेहनत करते रहे, एक न एक दिन आपकी मेहनत जरूर सफल होगी।

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