रात में दही क्यों नहीं खाना चाहिए?

Raat mein dahi kyon nahi khani chahiye? Dahi khane ka sahi samay aur time. Dahi kab khaye? Dahi khane ke niyam.

अक्सर लोगो के मन में यह दुविधा रहती हैं की किस मौसम में दही को खाए, कब खाए और किस रोग में खाए. आयुर्वेद की चरक सहिंता में दही के लिए “दधिह कल्पतरु” लिखा गया हैं. यानी की दही खाना कल्पतरू के समान हैं. जिससे सारे रोग नष्ट हो जाते हैं. इसलिए दही को खाने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

इस मौसम में खाए दही

आयुर्वेद एक्सपर्ट के अनुसार हालांकि आम धारणा यह हैं की बारिश के मौसम में दही नही खाना चाहिए, लेकिन 16वीं सदी के वनौषधिय ग्रंथ “भाव प्रकाश” में दही को बारिश और गर्मी में खाना उपयोगी बताया गया हैं. सर्दी में दही खाने की मनाही हैं. दही ठंडा और भारी होता हैं, इसलिए शीत ऋतु में खाने से मांसपेसियों और नसों में रुकावट आकर नर्वस सिस्टम और चेतना कमजोर होने लगती हैं. जिससे व्यक्ति थकान, निद्रा और आलस का शिकार हो जाता हैं.

रात में ना खाए दही

आयुर्वेद के अनुसार दोपहर 2 से 3 बजे तक दही खाना लाभकारी हैं. रात को दही खाने से यह फेफड़े में इन्फेक्शन, खाँसी-जुकाम के अलावा जोड़ो की तकलीफ बढ़ाता हैं.

इन रोगो में लाभकारी

इसे खाली पेट सुबह के समय खाने से पेट के अल्सर , एसिडिटी, हाथ-पैर में दर्द, आँखों में जलन और आँतो के रोग में आराम मिलता हैं. एक समय में 250 ग्राम दही को खाया जा सकता हैं.

ऐसे करे प्रयोग

जिन्हे शरीर में कमज़ोरी, वजन ना बढ़ने, अपच या भूख ना लगने की समस्या हो उन्हे भोजन के बाद एक कटोरी मीठा दही खाना चाहिए. दही को दूध या दूध से बनी चीज़ो के साथ कभी भी नही खाना चाहिए, वरना अपच की प्राब्लम हो जाती हैं.








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