हमें भूख क्यों लगती हैं ? जानिए

हमें भूख क्यों लगती हैं?

भोजन के बिना जीवन की कल्पना करना भी बेकार हैं। जब आपको भूख लगने का अहसास होने लगे तो आपको खाना खाने के जरूरत पड़ती हैं। आखिर हमें भूख क्यों लगती हैं? साइंटिस्टों की माने तो हमारे ब्रेन में मौजूद हाइपोथैलेमस में ऐसे 2 पॉइंट होते हैं, जो हमारे खाने से जुड़ी एक्टिविटीज को कण्ट्रोल करते हैं। इनमे से एक पॉइंट हमें खाना खाने के लिए प्रेरित करता हैं तो दूसरा हमें भूख शांत हो जाने का संकेत देता हैं।

इन दोनों पॉइंट्स को सम्मलित रूप से एपेस्टेट कहा जाता हैं। इससे अलावा हॉर्मोन भी भूख लगने और जरूरत पूरी हो जाने के चक्र को कण्ट्रोल करता हैं। कई साल पहले हावर्ड ह्यूग्स मेडिकल इंस्टीट्यूट के जेफरे फ्रीडमान ने चूहों में ओबेस जीन की खोज की थी, जिसके द्वारा उत्पादित प्रोटीन असल में उसके बैलेंस को बनाये रखता हैं, तब ही उन्होंने इंसानों में इसकी प्रतिपक्षी जीन की पहचान की।

यह जीन लेप्टिन प्रोटीन के लिए कोडिट होता हैं। यह प्रोटीन खास तौर पर किसी भी व्यक्ति में भूख और मेटाबोलिज्म रेट को बढ़ाने-घटाने के लिए जिम्मेवार होते हैं। बाद में मिलेनियम फार्मास्युटिकल्स ने कोशिका भित्ति पर पाए जाने वाले ग्राही की पहचान की, जो लेप्टिन के एटम के साथ जुड़े हुए होते हैं।

यह प्रोटीन सेल्स में इस तरह से दाखिल होते हैं की स्पेशल उपापचयी क्रिया शुरू हो जाती हैं। इस जीन या ग्राही प्रोटीन में कोई भी गड़बड़ी इस उपापचयी क्रिया को खराब कर देता हैं, जिसके रिजल्ट के तौर पर आपकी पाचन से सम्बन्धी क्रियाएं भी ठीक नहीं रह पाती हैं।








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