हुदहुद को कलगी कैसे मिली?

हुदहुद को कलगी कैसे मिली।

एक बार सुलेमान नाम के बादशाह आकाश में चलने वाले अपने उड़नखटोले पर बैठे कहीं जा रहे थे। बड़ी गर्मी थी। धुप से वह परेशान हो रहे थे। आकाश में उड़ने वाले गिद्धों से उन्होंने कहा कि अपने पंखों से तुम लोग मेरे सिर पर छाया कर दो। पर गिद्धों ने ऐसा करने से मना कर दिया। उन्होंने बहाना बनाते हुए कहा, “हम तो इतने छोटे-छोटे हैं। हमारी गर्दन पर पंख भी नहीं हैं। हम छाया कैसे कर सकते हैं!”

सुलेमान आगे बढ़ गए। कुछ दूर जाने पर उनकी भेंट हुदहुदों के मुखिया से हुई। सुलेमान ने उससे भी मदद माँगी। वह चतुर था। उसने फौरन अपने दल के सभी हुदहुदों को इक्कठा करके बादशाह सुलेमान के ऊपर छाया कर दी।
सुलेमान बोले, “मैंने गिद्धों से भी मदद माँगी थी। वे मेरी मदद कर सकते थे पर उन्होंने मेरी मदद नहीं की। तुम गिद्धों से छोटे तो हो पर चतुर अधिक हो। तुम सबने मिलकर मेरी सहायता की है। मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हारी कोई इच्छा पूरी करूँगा। बताओ, तुम्हारी क्या इच्छा है?”

मुखिया ने कहा, “महाराज, मैं अपने सभी साथियों से सलाह करने के बाद अपनी इच्छा बताऊँगा।”

मुखिया ने साथियों से सलाह करने के बाद कहा, “महाराज! यह वरदान दीजिए कि हमारे सिर पर आज से सोने की कलगी निकल आए।”

बादशाह हँसे और बोले-“मुखिया, इसका फल क्या होगा, यह तुमने सोच लिया है?”

मुखिया बोला “हाँ, महाराज! मैंने खूब परामर्श करके यह वर माँगा है।”

सुलेमान ने प्रार्थना स्वीकार कर ली। सभी हुदहुदों के सिर पर सोने की कलगी निकल आई। लोगों ने साने की कलगी को देखा, तो वे हुदहुदो के पीछे पड़ गए। तीर से उन्हें मार-मारकर सोना इक्कठा करने लगे। हुदहुदों का वंश समाप्त होने पर आ गया। तब मुखिया घबराकर बादशाह सुलेमान के पास पहुँचा और बोला “इस सोने की कलगी के कारण तो हमारा वंश ही समाप्त हो जाएगा।”

सुलेमान ने कहा “मैंने तो शुरू में ही तुम्हें चेतावनी दी थी। खैर, जाओ, आज से तुम्हारे सिर का ताज सोने का नहीं, सुंदर परों का हुआ करेगा।”
और तभी से हुदहुदो के सिर पर परों का यह ताज (कलगी) शोभा पा रहा है।

hudhud bird photoहुदहुद एक बहुत ही सुन्दर पंछी है। इसके शरीर का सबसे सुंदर भाग इसके सिर की कलगी होती है। वैसे तो यह इसे समेटे रहता है। पर जैसे ही किसी तरह की आवाज़ होती है, यह चौकन्ना होकर परों को फैला लेता है। तब यह कलगी देखने में हू-ब-हू किसी सुंदर पंखी जैसी लगने लगती है। इसी कलगी के बारे में आपने अभी एक सुंदर कहानी भी पढ़ी।

हुदहुद का सारा शरीर रंग-बिरंगा और चटकीला होता है। पंख काले-काले होते हैं जिन पर मोटी सफ़ेद धारियाँ बनी होती हैं। गर्दन का अगला हिस्सा बादामी रंग का होता है। चोटी भी बादामी रंग की होती है, मगर उसके सिरे काले और सफ़ेद होते हैं। दुम का भीतरी हिस्सा सफ़ेद और बाहरी हिस्सा काले रंग का होता है। चोंच पतली, लंबी तथा तीखी होती है। इस चोंच से यह आसानी से ज़मीन के भीतर छिपे हुए कीड़े मकोड़ों को ढूँढ निकालता है। इसकी चोंच नाखून काटने वाली ‘नहरनी से बहुत मिलती है और शायद इसीलिए कहीं-कहीं इसे ‘हजामिन चिड़िया के नाम से भी पुकारते हैं। हुदहुद हमारे देश के सभी भागों में पाए जाते हैं।

आपने इसे अपने घर के आसपास अपनी तीखी चोंच से ज़मीन खोदते हुए अवश्य देखा होगा। बोलते समय यह तीन बार ‘हुप-हुप-हुप’ सा कुछ कहता हैं, इसीलिए इसे अंग्रेजी में ‘हुप ऊ’ कहा जाता हैं। हिन्दी में इसे हुदहुद कहते है। दूब में कीड़ा ढूँढने के कारण हमारे देश में कही-कही इसे ‘पदुबया’ भी कहते हैं और सुंदर कलगी की वजह से कुछ देशों में लोग इसे ‘शाह सुलेमान’ कहकर पुकारते हैं।

हुदहुद पंछी के बारे में जानकारी

मादा हुदहुद तीन से दस तक अंडे देती है। जब तक बच्चे अंडे से बाहर नहीं निकल जाते, वह अंडों पर बैठी रहती है, हटती नहीं। नर वहीं भोजन लाकर उसे खिला जाता है। पर दोनों में से कोई भी घोंसले की सफाई नही करता। संसार के विख्यात पक्षियों में से एक है यह हुदहुद। यह अपनी सुंदरता के लिए तो मशहूर है, पर इसे पालतू नहीं बनाया जा सकता और न ही इसकी बोली में मिठास है।




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