जानिए ऐसे रहस्य के बारे में जिन्हें विज्ञान भी सही तरह से व्याख्या नहीं कर पाता हैं।

इन बातों या तथ्यों का जवाब तो विज्ञान के पास भी नहीं हैं.

ज्यादातर लोग प्रतिदिन अपने आसपास हज़ारों चीजों को देखते हैं और सोचते हैं जो जिस चीज़ वे देख रहे हैं, उन्हें उनके बारे में अच्छी तरह पता हैं और वे इनके बारे में पूरी जानकारी रखते हैं। लेकिन वास्तव में कई ऐसी चीज़े हैं, जिन्हें आप इस्तेमाल करते हैं या जो फिर आपके आसपास हैं, वैज्ञानिक भी उनकी सच्चाई बताने में असमर्थ हैं। आज हम आपको बताएँगे ऐसी चीजों के बारे में जो की साइंस के लिए भी किसी रहस्य से कम नहीं हैं। Mysterious Things (Facts) that Science doesn’t explain well (ऐसा क्यों होता हैं? यह तो विज्ञान को भी नहीं पता हैं) Why it Happened,  Science has also no any right answer?

जानिए ऐसे रहस्य या तथ्यों को जिनके बारे में साइंस भी खामोश हैं :-

1. पीनट से एलर्जी (मूंगफली से एलर्जी होना)

यह एलर्जी आमतौर पर होने वाली एलर्जी से बिलकुल अलग हैं। पिछले 20 सालों में यह नयी एलर्जी दुनिया के सामने आई हैं। और वैज्ञानिकों के पास अभी तक कोई जवाब नहीं हैं की ऐसा क्यों हैं? उनका यह मानना हैं की पिछले 50 सालों के मुकाबले आज के बच्चे बहुत ही साफ़-सुथरे माहौल में पल बढ़ रहे है, जिसकी वजह से उनका इम्यून सिस्टम अब उतना ज्यादा मजबूत नहीं हैं। जिसकी वजह से वह तुरंत एलर्जी का शिकार हो जाते हैं।

2. टमाटर

आप में से ज्यादातर लोग यह नहीं जानते होंगे की टमाटर एक फल हैं, नाकि सब्जी। लेकिन फिर भी हर घर में टमाटर को सब्जी में डाला जाता हैं। साइंटिस्ट हैरान हैं की ऐसा क्यों हैं? उनके अनुसार टमाटरों में मनुष्यों के मुकाबले ज्यादा जीन्स मौजूद होते हैं और वो यह नही जानते की ऐसा क्यूँ हैं? वैज्ञानिक लगातार इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश में लगे हुए हैं की आखिर टमाटर में इतने ज्यादा सर्वाइवल जीन्स क्यों हैं? उदाहरण के तौर पर आप कोई ऐसी जगह पर फँस जाये, जहाँ पर कोई खाने की चीज़ मौजूद न हो तो उस जगह पर आप सिर्फ 1 टमाटर खा कर जिंदा रह सकते हैं।

3. Magnetoreception (magnetoception) यानि मैगनेटपंती

जानवरों के पास कुछ ऐसा हैं जो मनुष्यों के पास नहीं है। यानि मैगनेटपंती और इसे Magnetoception कहते हैं। साइंस के लिए इस प्रश्न का उत्तर देना बहुत ज्यादा कठीन हैं की इसकी क्या वजह है? उदाहरण के रूप में कबूतर की चोंच में यह Magnetoception का गुण हैं। इसलिए एक थ्योरी के मुताबिक़ ऐसा माना जाता हैं की शायद जानवरों के डीएनए सेल्स में Magnetoception मौजूद हैं। जिसकी वजह से जानवरों के यह महसूस होता हैं की वह अपने शिकार को आसानी से पकड़ लेंगे। लेकिन एक और थ्योरी भी हैं, जिसके मुताबिक जानवरों की Eye sight यानी दृष्टि इतनी ज्यादा तेज़ हैं, जिसकी वजह से वह ऐसा कर पाते हैं। यानी हर हाल में अपना शिकार पकड़ ही लेते हैं। लेकिन फिर भी विज्ञान के पास कोई पक्का सबूत नहीं हैं।

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4. हिचकी

हम सबको ही इसका हिचकी का अनुभव हैं। क्योंकि ज्यादातर लोग कभी न कभी हिचकी लेते ही हैं और यह उन्हें परेशान भी करती हैं। लेकिन आप लोगो से ज्यादा यह हिचकी और किसी को परेशान करती हैं। सोचिये कौन हैं वो? यह हैं साइंटिस्ट। यानी वे अभी तक इसको भी सही तरह से पता नहीं लगा पाए हैं की हिचकी क्यों आती हैं? लेकिन आमतौर हमें यही बताया जाता हैं की अनबैलेंस सांस लेने की वजह से, या जल्दी-जल्दी खाने या पीने की वजह से ऐसा होता हैं। लेकिन साइंस के पास कोई बायोलॉजिकल फैक्ट नहीं हैं, हमें बताने के लिए की हिचकी क्यों आती हैं और उससे भी मुश्किल यह की इसे रोका कैसे जाये?

5. Smiling (मुस्कुराना)

स्माइलिंग हमारे behavior का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ज्यादातर लोग दिन भर में हँसते तो नहीं हैं, लेकिन वे मुस्कुराते तो जरूर ही है। और हँसने मुस्कुराने की एक ही वजह होती हैं, यानी कोई ख़ुशी। लेकिन मनुष्य हँसना कैसे सीखता हैं? यह एक रहस्य हैं। जैसे की अंधे बच्चे जो देख भी नहीं सकते, वो भी हँसना जानते हैं। लेकिन आखिर वे यह कैसे सीखते हैं? लेकिन विज्ञान को यह भी नहीं पता की हम कैसे स्माइल करना सीखता हैं?

6. रोना (Crying)

कोई ज्यादा रोता हैं तो कोई कम। लेकिन कभी न कभी तो आप सभी लोग रोते ही हैं। यानी यह भी एक कॉमन फैक्ट हैं की हम सब तभी रोते हैं जब बहुत उदास और दुःख में होते हैं। लेकिन विज्ञानिक इस बात की खोज में लगे हुए हैं की जब हम उदास होते हैं तो हमें क्यों रोना आता हैं? हालांकि हम तब भी रोते हैं जब प्याज को काटते हैं और जब हमें दर्द होता हैं। और जानवर भी तभी रोते हैं, जब उन्हें दर्द होता हैं। लेकिन यह इंसान के लिए कुछ ज्यादा ही अनसुलझा रहस्य हैं। साइंटिस्ट्स के मुताबिक़ मनुष्य के रोने के सम्बन्ध उसके प्रारंभिक जीवन से हैं, जिसमे बहुत ज्यादा डर, निराशा और उदासी पाई जाती थी।

7. Cat’s Purr (बिल्लियों का गुर्राना या खरखर की आवाजें निकालना)

हम सब जानते हैं की बिल्लियाँ मूंह से खर-खर की आवाजें निकालती हैं। और हमारी ग़लतफ़हमी यह हैं की हम यह सोचते हैं की बिल्लियाँ ऐसा तब करती हैं जब वे खुश होती हैं। लेकिन विज्ञानिको का यह कहना हैं की यह सच नहीं हैं। उनके मुताबिक वे तब भी ऐसा करती हैं, जब उन्हें भूख लगी हो, और जब-जब उन्हें ख़तरा महसूस हो। लेकिन उनके पास ऐसा कोई डाटा मौजूद नहीं हैं जो यह बात साबित कर सके की exactly बिल्लियों के दिमाग में उस वक़्त ऐसा क्या चल रहा होता हैं, जिससे वह ऐसी आवाजें निकालने लगती हैं। तो यह भी एक मिस्ट्री ही हैं।

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8. नीली आँखें

शायद आप इस बात से अनजान हैं की ज्यादातर यूरोप के बच्चे नीली आँखों के साथ पैदा होते हैं। लेकिन 2 साल की उम्र तक पहुचते ही, उनकी आँखों का रंग बदल जाता हैं। बहुत ही कम लोग हैं जिनकी आँखों का नीला रंग बरक़रार रहता हैं। यह बहुत ही हैरान करने वाली बात हैं। लेकिन विज्ञान के पास इसका भी कोई जवाब नहीं हैं। एक विचार के अनुसार ऐसा मेलेनिन की कमी की वजह से होता हैं। Melanin कलर को बरक़रार रखने वाला एक तत्व हैं। लेकिन यह विचार इस रहस्य को सुलझाने के लिए काफी नहीं हैं।

9. Sexual Orientation (समलैंगिकता)

पिछले कुछ सदियों से यह टॉपिक बहुत ही ज्यादा चर्चा का विषय रहा हैं की समलैंगिकता नहीं होनी चाहिए। लेकिन तंग आकर कई सारे देशों ने इसे मंज़ूर कर लिया हैं। लेकिन विज्ञान अब भी इस बात से परेशान हैं की एक समान लिंग के लोग एक दुसरे के प्रति कैसे आकर्षित हो सकते हैं। वे इस बात को मानते हैं की यह एक मानसिक समस्या हैं। लेकिन वैज्ञानिक इस बात से हैरान हैं की बायोलॉजी का वह कौन सा पार्ट हैं जो यह समस्या पैदा करता हैं। हमारा समाज, धर्म हमें यह बताते हैं की हमें विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होना चाहिए और यही कुदरत का नियम भी हैं। लेकिन जिनके साथ यह प्रॉब्लम हैं, उनके माइंड और बॉडी उनको कुछ और भी बताते हैं।

10. गायों का सिर्फ उत्तर या दक्षिण दिशा में मूंह करके रखना

जो आपमें से किसी ने भी कभी भी नोटिस नहीं किया होगा। लेकिन वैज्ञानिकों की एक टीम ने दुनियाभर की गायों पर रिसर्च किया तो उन्हें पता चला की दुनिया की हर गाय सिर्फ उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर मूंह करके ही घास खाती हैं। यहाँ तक जब वे आराम भी करती हैं तो भी उनकी पोजीशन यही होती हैं। यह भी एक बहुत ही interesting fact हैं। लेकिन साइंस के पास इसका भी कोई जवाब नहीं हैं।








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