करोड़पति बाप ने अपने बेटे से क्यों करवाई मजदूरी जानिए.

Crorepati Savji ne apne bete se karwayi majdoori.

क्या आप कल्पना कर सकते है की किसी करोड़पति का बेटा मजदूरी कर सकता हैं? जी हाँ, ऐसा ही कुछ मामला गुजरात के एक हीरा व्यापारी के पुत्र के साथ हुआ। इस डायमंड व्यापारी के बेटे को मजदूरी तक करनी पड़ी। आखिर ऐसी क्या वजह थी की करोड़पति बाप ने अपने बेटे से मजदूरी करवाई। हम बात कर रहे हैं डायमंड कारोबारी सावजी ढोलकिया के बारे में, जिनका कारोबार सूरत में काफी ज्यादा फैला हुआ हैं।

सावजी एक डायमंड मर्चेंट हैं, इनकी कम्पनी का नाम हरे कृष्णा डायमंड एक्सपोर्ट्स हैं। जो की 71 देशो में फैली हुई हैं और यह 6,000 करोड़ की कम्पनी हैं। सावजी मीडिया में उस समय चर्चा का विषय बन गये थे, जब उन्होंने बोनस के रूप में अपने कर्मचारियों को कार और फ्लैट्स प्रदान किये थे।

एक इंग्लिश समाचारपत्र की रिपोर्ट के अनुसार सावजी के बेटे का नाम द्रव ढोलकिया हैं। द्रव अमेरिका में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे हैं और पिछले दिनों वह छुट्टियों में भारत आये थे। सावजी अपने बेटे को पैसे और काम का महत्व समझाना चाहते थे।

इसलिए सावजी ने अपने बेटे से साधारण सी नौकरी करने के लिए कहा। इसके लिए उन्होंने बेटे के सामने शर्त भी रखी की वह नौकरी करने के लिए उसे अपनी और अपने पिता की पहचान गुप्त रखनी पड़ेगी। उसे किसी भी एक जगह पर एक हफ्ते से ज्यादा दिन तक नौकरी नहीं करनी हैं, साथ में उसे मोबाइल का इस्तेमाल भी नहीं करना हैं।

सावजी ने अपने बेटे को सिर्फ 7,000 रुपये दिए और यह हिदायत दी की वह इन रुपयों का इस्तेमाल तभी कर सकता हैं, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। सावजी चाहते तो अपने बेटे के सामने दुनिया की सभी ऐशोआराम की चीज़े चुटकी बजाकर उपलब्ध करवा सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को जिंदगी के अनुभव सिखाने के लिए ऐसी चुनौती दी।

उसके बाद द्रव 3 जोड़ी कपड़े और पिता के दिए हुए 7000 रुपये लेकर कोच्ची शहर आ गये। द्रव्य को मलयालम भाषा नहीं आती थी, जिसके चलते कोच्ची में उनके लिए हालात और भी ज्यादा मुश्किल बन गये। द्रव्य यह कहते है की शुरुवाती 5 दिनों तक उनके पास न तो रहने के लिए कोई जगह थी और न ही उन्हें कोई नौकरी मिली।

वह यह भी कहते हैं की वह लगभग 60 जगहों पर नौकरी मांगने के लिए गये। लेकिन उन्हें कंही भी नौकरी नहीं मिली। द्रव्य आगे कहते हैं की, “तब मुझे अहसास हुआ की लोगो के लिए नौकरी की क्या अहमियत होती हैं।“ द्रव्य को एक बेकरी में नौकरी मिल गयी। उन्होंने अपने आपको गुजरात के एक  गरीब परिवार का बेटा बताया। इसके बाद उन्होंने कॉल सेंटर, जूतों की दूकान और MacDonald में नौकरी की।

पुरे महीने अलग-अलग जगहों पर काम करने से उन्होंने महीने भर में 4000 रुपये कमाए। द्रव्य यह भी कहते हैं की कोच्ची में रहने के दौरान उन्हें हर रोज खाने के लिए सिर्फ 40 रुपये के लिए काफी ज्यादा संघर्ष करना पड़ता था। साथ ही लॉज में रहने के लिए रोजाना 250 रुपये भी लगते थे।




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