भागवत पुराण में कलियुग को लेकर की गयी भविष्यवाणी।

भागवत पुराण में कलियुग को लेकर की गयी भविष्यवाणी।

धार्मिक पुराणों में चार युग माने गए हैं। जिनके नाम यह हैं सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। प्रत्येक युग की अपनी अलग-अलग विशेषताए हैं। जैसे की सतयुग के मनुष्य में किसी भी प्रकार का लालच, इर्षा या विकृति नहीं थी। जबकि त्रेतायुग में समाज में बुराई जमनी शुरू हो गयी है, द्वापरयुग तक आधे से ज्यादा मनुष्यों के अंदर बुराईयाँ आ चुकी थी। और अंतिम युग कलियुग, जो की भयंकर युग में से एक हैं।

कलियुग में पाप और अनाचार का बोलबाला ज्यादा है। कलियुग के बारे में यह माना जाता हैं की शायद की इस युग में कोई ऐसा मनुष्य मिल पाए, जिसके अंदर कोई पाप न हो।

भागवत पुराण में मिलता हैं कलियुग का वर्णन :-

प्राचीन काल के दौरान भागवत पुराण में कलियुग को लेकर कई सारी भविष्यवाणियों का वर्णन मिलता हैं। भागवत पुराण में कलियुग को लेकर कई सारी बातें पहले ही लिखी जा चुकी है।

जैसे की भागवत पुराण के अनुसार कलियुग में किसी मनुष्य के अच्छे कुल की पहचान उसके अमीर होने से होगा। धन की प्राप्ति के लिए मनुष्य अपने सगे-संबंधियों को भी क्षति पहुचाने में पीछे नहीं हटेंगे।
कलियुग के शुरुवात होने की पहचान :-

कलियुग के शुरुवात होने की पहचान के बारे में विष्णु पुराण में कई सारी बातें बतायी गयी हैं।

1. कलियुग के शुरुवात में स्त्रियाँ अपने बाल काटने लगेंगी। क्योंकि बाल स्त्रियों का लाज और गहना है। जिसके साथ वह छेड़छाड़ करने लगेगी। यह भी कलियुग के शुरू होने की पहचान है।

2. कलियुग के शुरुवात में न सिर्फ महिलाएं अपना बाल काटेंगी, बल्कि बालों के कुदरती रंगों को भी बदलने का प्रयास करेंगी।

आइये जानते हैं भागवत पुराण के अनुसार कलियुग के अंत के समय क्या-क्या हालात होंगे?

1. कलियुग में पृथ्वी भ्रष्ट लोगो से भर जाएगी। जिसकी लाठी होगी, उसकी ही भैंस होगी। मतलब जो ताकतवर होगा, उसकी ही सत्ता होगी।

2. भागवत पुराण के अनुसार कलियुग के अंत से पहले लोग सिर्फ और सिर्फ मछली खा कर जीवित रहेंगे और पृथ्वी पर एक भी गाय नहीं बचेगी। जिसके कारण कलियुग के समाप्ति से पहले मानव सिर्फ बकरी का दूध ही पिएगा।

3. कलियुग की समाप्ति के समय पृथ्वी पर शायद ही ऐसा कोई मनुष्य होगा को जो वैदिक और धार्मिक कार्यों में रुचि लेता हो। वह अपनी मर्ज़ी से ही जीवन जीना पसंद करेगा।

4. पुरुषतत्व का मतलब सिर्फ पुरुष की संभोग शक्ति से ही होगा।

5. कलियुग के अंत आने से पहले मनुष्य की उम्र मात्र 16 वर्ष ही रह जाएगी। 7 से 8 वर्ष की उम्र में लड़कियां गर्भवती होने लगेंगी।

6. कलियुग के अंत में प्रेम, धर्म और सहयोग की भावना मनुष्य के अंदर से बिलकुल समाप्त हो जाएगी।

7. शारीरिक इच्छा की पूर्ति के लिए पुरुष और स्त्री एक साथ रहेंगे।

8. कलियुग के अंत आने से पहले स्त्रियाँ बहुत ही कड़वा बोलने लगेंगी। उनके चरित्र में काफी ज्यादा गिरावट आ चूका होगा। उनके ऊपर न ही पति और न ही पिता का वश होगा।

9. कलियुग के विनाश के समय धरती से तीर्थस्थान समाप्त हो चुके होंगे। तारों की रौशनी भी कम हो चुकी होगी।

10. कलिकाल में मौसम पूरी तरह से अनिंत्रित हो जायेंगे। बहुत ज्यादा गर्मी, बहुत ज्यादा ठंडी, बाढ़ और सूखा जैसी परस्तिथियाँ होने लगेंगी। मनुष्यों में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ पैदा होने लगेंगी।

कलियुग का अंत करेंगे भगवान विष्णु के कल्कि अवतार :-

कलियुग में जब ऐसे हालत उत्पन्न हो जायेंगे तो भगवान विष्णु कलियुग का अंत करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लेंगे, इस अवतार को कल्कि अवतार कहा जायेगा। पौराणिक तथ्यों के अनुसार यह कहा जा सकता हैं की उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में संभल नामक स्थान में कल्कि अवतार होगा। भगवान कल्कि के पिता नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा। वे अपने माता-पिता की पांचवी संतान होंगे।

कल्कि अवतार दैवीय शक्तियों से परिपूर्ण होगा। उनका रंग स्वेत और सुंदर होगा, लेकिन क्रोध में आने पर भंयकर रूप हो जायेगा। कल्कि अवतार अस्त्र-शस्त्र से भरा हुआ होगा। कल्कि अवतार के पास सफेद रंग का घोड़ा वाहन होगा। भगवान कल्कि सभी दुष्ट व्यक्तियों का विनाश करके पुनः पृथ्वी पर सतयुग की स्थापना करेंगे।



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