खुद पर हैं यकीन तो मुश्किल से मुश्किल काम आप कर सकते हैं.

खुद पर हैं यकीन तो मुश्किल से मुश्किल काम आप कर सकते हैं.

यदि किसी व्यक्ति को कोई मुश्किल काम सौंपा जाता है तो उस काम का परिणाम उसी समय तय हो जाता है। यदि व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ काम करने को राजी होता है तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। जबकि, व्यक्ति अगर उस काम से डर जाता है तो सफलता मिलने में संदेह रहता है। किसी भी काम में सफल होने के लिए यहां बताई जा रही बातों का भी ध्यान रखना चाहिए…

  1. स्वयं की प्रशंसा न करें।
  2. विपरीत परिस्थिति आए तो भी आत्मविश्वास बनाएं रखें।
  3. जितना आवश्यक हो, उतना ही काम करें।
  4. अत्यधिक आत्मविश्वास में कोई काम न करें।
  5. मन में किसी प्रकार की शंका न रखें।

इस प्रसंग से समझें इन बातों का महत्व

रामायण में प्रसंग है कि जब वानर सेना माता सीता की खोज करने गई, तब 400 किमी लंबा समुद्र लांघकर लंका जाना बड़ी चुनौति थी। अंगद ने कहा मैं जा तो सकता हूं, लेकिन समुद्र पार करके फिर लौट पाऊंगा, इसमें संदेह है। अंगद ने खुद की क्षमता और प्रतिभा पर संदेह जताया। जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति याद दिलाई।

अपनी योग्यता समझते ही हनुमान आत्मविश्वास से भरकर बोले कि अभी एक ही छलांग में समुद्र लांघकर लंका उजाड़ देता हूं और रावण सहित सारे राक्षसों को मारकर माता सीता को ले आता हूं। तब जामवंत ने कहा कि तुम सिर्फ सीता मैया का पता लगाकर लौट आना। प्रभु राम खुद रावण का संहार करेंगे। हनुमान ने एक ही उड़ान में समुद्र को लांघ लिया। रास्ते में सुरसा और सिंहिका ने रोका भी, लेकिन उनका आत्मविश्वास नहीं डोला।

इस प्रसंग से हमें समझना चाहिए कि जब हम किसी काम पर निकलते हैं तो अक्सर मन विचारों से भरा होता है। आशंकाएं, कुशंकाएं और भय भी पीछे-पीछे चलते हैं। जब तक हम खुद पर ही भरोसा नहीं करेंगे, हमारे प्रयास कभी सौ फीसदी नहीं होंगे। इसलिए किसी भी काम में सफलता पाने के लिए खुद पर विश्वास होना बहुत जरूरी है।

थायी सफलता के लिए ध्यान रखें ये सूत्र

कुछ लोग सफलता के लिए शार्टकट अपनाते हैं, लेकिन शार्टकट से मिली सफलता ज्यादा दिन नहीं टिकती। इसलिए अगर लंबे समय तक सफल रहना है तो शार्टकट से बचिए। सफलता स्थायी तभी होती है, जब उसे स्वयं संघर्ष करके हासिल किया जाएगा और ये बातें भी ध्यान रखी जाएंगी…

  1. सफलता पाने के लिए गलत तरीका न अपनाएं।

 

  1. काम में देरी होने पर भी संघर्ष से पीछे न हटें।
  2. उन लोगों को न भूलें, जिन्होंने आपकी मदद की।

 

श्रीकृष्ण एक ही दिन में जीत सकते थे महाभारत युद्ध

महाभारत के युद्ध को अकेले श्रीकृष्ण एक ही दिन में जीत सकते थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ पांडवों का मार्गदर्शन ही किया। वे चाहते तो पांडवों की ओर से कोई सैनिक नहीं मारा जाता और युद्ध जीता जा सकता था। अर्जुन ने भी श्रीकृष्ण से कहा था कि आप केवल मुझे सही रास्ता दिखाइए, युद्ध में अपनी शक्ति से जीतना चाहता हूं, मुझे आपकी सेना नहीं चाहिए। पांडवों ने पूरे युद्ध में खुद कोई अधर्म नहीं किया, कोई नियम नहीं तोड़ा, वे तो बस वो ही करते गए जो श्रीकृष्ण बताते रहे।

इसका कारण यह था कि अगर श्रीकृष्ण युद्ध जीत कर युधिष्ठिर को राजा बना देते तो पांडव कभी उस सफलता का मूल्य नहीं समझ पाते। सफलता के साथ शांति और संतुष्टि ये दो भाव होना जरूरी है। अगर हम अशांत और असंतुष्ट हैं तो इसका सीधा अर्थ यह है कि हमने सफलता के लिए कोई शार्टकट अपनाया है। शार्टकट से मिली सफलता अस्थायी होती है और यही भाव हमारे मन को अशांत करता है।

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