गणेश जी से सम्बंधित कुछ ऐसी बातें, जिनका रहस्य शायद ही आप जानते हो?

गणेश जी का वाहन चूहा क्यों हैं ?

हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य देव गणेश जी महाराज हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश भक्तों को बुद्धि, ज्ञान और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। गणेश के नाम का शाब्दिक अर्थ होता हैं भयानक और भयंकर। गणेश जी की उपासना करना हर किसी के लिए मंगलकारी हैं। वैसे तो गणेश जी का स्वरूप विकट है, लेकिन इनके अर्थ कुछ अलग ही हैं। मलतब की धार्मिक दृष्टि से गणेश जी के स्वरूप के मतलब कुछ ही निकलते हैं। आइये जानते है गणेश जी के बारे में ऐसी रोचक बातें और जानकारी, जिनका वास्तिक रहस्य कुछ अलग ही होता है। जैसे की गणेश जी वाहन चूहा (मूषक) क्यों हैं? आदि।

गणेश जी से जुड़े रहस्य और उनकी सच्चाई :-

■ गणपति जी की सूंड का रहस्य जानिए

गणपति जी की सूंड हिलती डुलती रहती हैं। जो की उनके सचेत होने का संकेत देती हैं। इसके संचालन से दुःख और गरीबी समाप्त होती हैं। इससे अनिष्टकारी शक्तियाँ भयभीत होकर भागने लगती है। भगवान श्री गणेश की सूंड बड़े-बड़े दुष्टों को डरा देती है। इस सूंड से गणेश जी ब्रह्मा पर फूल और पानी बरसाते हैं। गणेश जी की सूंड के दायीं और बायीं ओर होने का भी अपना ही एक अलग महत्व होता हैं।

■ गणेश जी की सवारी चूहा क्यों हैं?

गणपति बाप्पा की शारीरिक बनावट की तुलना में उनका वाहन मूषक काफी ज्यादा छोटा हैं। आखिर गणेश जी की सवारी मूषक होने का रहस्य क्या हैं? दरअसल मूषक का काम किसी भी चीज़ को कुतरना होता हैं। वह चीर-फाड़ करके उस चीज़ की अच्छी तरह से विशलेषण करता हैं। गणेश जी बुद्धि के दाता हैं। इसी तरह चूहा भी तर्क-वितर्क करने में माहिर हैं। कांट-छांट करने में मूषक की कोई बराबरी नहीं हैं। मूषक के इन्ही गुणों से प्रभावित होकर गणेश जी ने चूहे को अपना वाहन बनाया हैं।

■ भगवान श्री गणेश के लम्बे कान

गणपति बाप्पा के कान लम्बे हैं, इसलिए उन्हें गजकर्ण के नाम से भी जाना जाता हैं। लम्बे कान वाले काफी ज्यादा भाग्यशाली होते हैं। लम्बे कानों के पीछे का रहस्य यह हैं की वह सबकी सुनते हैं और अपनी बुद्धि एवं विवेक का इस्तेमाल करके नए काम की शुरुवात करते हैं। बड़े कान इस बात की ओर भी इशारा करते हैं की प्रत्येक प्राणी को हमेशा चौकना रहना चाहिए।

■ गणेश जी का बड़ा पेट

गजानन गणेश जी का पेट काफी ज्यादा बड़ा हैं। इसलिए उनका एक नाम लंबोदर भी हैं। लंबोदर होने की वजह से वह हर अच्छी और बुरी बातों को पचा लेते हैं। साथ ही किसी भी तरह का निर्णय काफी सूझ-बूझ के साथ ही लेते हैं। गणेश जी समस्त वेदों और पुराणों के ज्ञाता भी हैं। उन्हें नृत्य और संगीत की कलाओं का भी ज्ञान हैं। बड़ा पेट इस बात की ओर भी इशारा करता हैं की सभी मनुष्यों को अपने अंदर ज्ञान को समाहित कर लेना चाहिए, यानी की ज्ञान जितना भी ज्यादा क्यों न हो, उसे ग्रहण कर लेने की क्षमता रखनी चाहिए।







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