जानिए ग्लूकोमा के बारे में

ग्लूकोमा के बारे में जानिए

आँखें हैं तो दुनिया हैं, क्योंकि बिना आँखों के यह दुनिया बेकार हैं। आँखों में अगर छोटी सी दिक्कत आ जाये तो आपको इसे नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए। क्योंकि छोटी की परेशानी भी आँखों में बड़ी समस्या होने की वजह बन सकती हैं। इसलिए आँखों की अच्छी तरह से देखभाल करने की जरूरत हैं। 40 साल की उम्र के बाद ज्यादातर लोगो की आँखों में प्रॉब्लम्स होने लगती है। परन्तु आज के युग में अब तो छोटे बच्चों को भी आँखों से जुड़ी समस्याएं परेशान करने लगी है। आज के लेख में ग्लूकोमा के बारे में जानेंगे। आइये जानते हैं ग्लूकोमा की जानकारी और इससे बचने के तरीके आदि।

आखिर में ग्लूकोमा क्या हैं?

ग्लूकोमा को हिंदी में काला मोतियाँ कहते हैं जो की आँखों की एक सिरियस बीमारी हैं। यह ऐसी खामोश बीमारी हैं जो बिना किसी भनक के चुपके से आँखों की रोशनी को मिटा देता हैं। इसके प्रति सचेत रहने पर ही आप इस खतरनाक बीमारी से बच सकते है। ग्लूकोमा आँखों के nerves को लगातार नुकसान पहुचाते हुए धीरे-धीरे करके आँखों की रौशनी को समाप्त कर देता हैं। इससे आँखों में अंधापन आ जाता है।

ग्लूकोमा, डायबिटीज, अनुवांशिकता, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बिमारियों की वजह से होता है। आँखों से दिखाई देने वाले दृश्यों को दिमाग तक पहुचाने वाली नसों को काला मोतियाँ की वजह से हानि पहुचने लगती हैं। संदेश ऑप्टिक नर्व के जरिये ही ब्रेन में पहुचते हैं। लेकिन ग्लूकोमा इसी नर्व को हानि पहुचाता हैं, जिससे आपकी दृष्टि कमजोर होने लगती हैं। अगर उचित समय पर इसका इलाज न करवाया गया तो इससे आप हमेशा के लिए अंधे भी हो सकते है।

ग्लूकोमा के लक्षण जानिए

यह बीमारी बिना किसी लक्षण के विकसित होती रहती हैं। यह एक या दोनों आँखों में हो सकता हैं। ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं, जिसकी वजह से उनकी आँखों की दृष्टि डैमेज हो सकती है। वैसे तो यह बीमारी 40 साल की उम्र के बाद होती हैं, लेकिन कई बार कंजेनाइटल ग्लूकोमा शिशुओं को भी हो सकता है।

छोटे बच्चों में होने वाला कंजेनाइटल ग्लूकोमा जन्मजात होता हैं। आँखों में पानी आना, कॉर्निया का धुंधलापन होना, आँखों का बड़ा होना और आँखों में लालिमा होना इसके लक्षण हो सकते हैं।

40 साल की उम्र के बाद इसके लक्षण :-

आँखों में दर्द होना, सिर और पेट में तेज़ दर्द होना, चश्मे का नंबर लगातार बदलते रहना, धुंधला दिखाई देना या आँखों के आगे अँधेरा छाना, रात के समय कम दिखाई देना, सीधा देखने पर आँखों के किनारे से दिखाई न देना आदि।

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2 प्रकार का होता हैं ग्लूकोमा

■ बंद कोण यानी प्राइमरी एंगल क्लोजर ग्लूकोमा

यह आमतौर पर कम ही होता हैं। यह अधेड़ उम्र में होता हैं। इस तरह के ग्लूकोमा के बारे में मरीज़ को शुरुवाती दौर में ही पता चल जाता हैं। इसमें ज्यादा धुंधला दिखाई देने लगता है। आँखों में तेज़ दर्द होने के साथ उल्टियाँ भी आने लगती है।

■ खुला यानि क्रोनिक सिंपल ग्लूकोमा

यह ग्लूकोमा सबसे ज्यादा लोगो को होता हैं। इसमें आँखों की पुतली पर धीरे-धीरे करके प्रेशर पड़ता हैं। इसके बारे में तब पता चल पाता है, जब ऑप्टिक नर्व काफी हद तक डैमेज हो चुकी होती हैं।

ग्लूकोमा के फैक्ट्स :-

इस समय 6 करोड़ से भी ज्यादा लोग ग्लूकोमा की बीमारी के मरीज़ हैं। भारत में ज्यादातर अंधेपन के मरीज़ ग्लूकोमा रोग के कारण अंधे हुए हैं। भारत में लगभग एक करोड़ लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं, जिसमे से डेढ़ लाख लोग नेत्रहीन हो चुके हैं।

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ग्लूकोमा से बचने का तरीका :-

इसके लिए समय-समय पर अपने आँखों की जांच करवाते रहे। आँखों में तनिक भी परेशानी आने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

ग्लूकोमा का इलाज :-

इसके ट्रीटमेंट के लिए कई सारे तरीको का इस्तेमाल किया जाता हैं। आमतौर पर इसका इलाज दवाइयों के जरिये किया जाता है। ग्लूकोमा अगर ज्यादा बढ़ गया है तो लेजर ट्रीटमेंट या ऑपरेशन के जरिये भी ठीक किया जाता है। शुरुवात दौर में ही इसका उपचार करवाना मरीज़ के लिए अच्छा रहता है।



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