जिमीकंद (सूरन) की सब्जी खाने के फायदे जानिए।

जिमीकंद (सूरन) के फायदे.

जिमीकंद जमीन के निचे उगने वाली सब्जी हैं। दरअसल यह एक कंद है, जिसकी सब्जी बना कर खाया जाता हैं। जिमीकंद को सूरन एवं ओल के नाम से भी जाना जाता हैं। जिमीकंद खाने के फायदे कई सारे हैं, क्योंकि यह औषधीय गुणों से भरी हुई हैं। जिमीकंद इतनी ज्यादा गुणकारी है की इसे जड़ी-बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं। Health Benefits of Jimikand (Elephant Foot Yam) in Hindi.

जिमीकंद में कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?

जिमीकंद की सब्जी में विटामिन सी, विटामिन बी-1, बी-6, फाइबर, फोलिक एसिड, और नियासिन भरपूर मात्रा में मौजूद होता हैं। इसके अलावा यह कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स से भी भरा हुआ हैं। अगर आप इसकी सब्जी का नियमित सेवन करते हैं तो निश्चित ही आप कई सारी बिमारियों से बचे रहते हैं। आइये जानते हैं जिमीकंद को क्यों खाना चाहिए? जिमीकंद के फायदे क्या हैं?

जिमीकंद की सब्जी खाने से शरीर को होने वाले लाभ :-

■ पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद

यह पोटैशियम का अच्छा स्रोत हैं, इसलिए इसका सेवन करने से पाचन क्रिया दुरुस्त बनती हैं। साथ ही पेट की कब्ज़ भी दूर होती हैं। इसके अलावा इसे खाने से बॉडी का ख़राब कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम होने लगता हैं।

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■ वजन को कण्ट्रोल में रखे

जिमीकंद में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है। इसलिए इसका सेवन करने से आपका पेट लम्बे समय तक भरा-भरा सा रहता हैं। जिसकी वजह से आपको जल्दी और बार-बार भूख नहीं लगती है। जिसके कारण आप ओवरईटिंग करने से बच जाते है। ऐसे में अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो जिमीकंद को अपनी डाइट में जरूर शामिल करे। इससे वजन को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती हैं।

■ ब्रेन के लिए लाभकारी

जिमीकंद का सेवन करने से दिमाग तेज़ बनता हैं। जो व्यक्ति नियमित रूप से जिमीकंद को खाता हैं, उसे अल्जाइमर रोग (भूलने की बीमारी) होने का ख़तरा काफी ज्यादा कम हो जाता है। इसलिए दिमाग को तेज़ बनाना चाहते है तो जिमीकंद को अपनी डाइट में शामिल करना न भूले।

■ विटामिन बी-6 का बेस्ट सोर्स

अगर बॉडी में विटामिन बी-6 की मात्रा हो तो इससे व्यक्ति को दिल की बीमारियाँ नहीं होती हैं। विटामिन बी-6 हार्ट बीट रेट और ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल करने का काम करता है। जिमीकंद में यह विटामिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे ब्लड प्रेशर सही बना रहता है, जिससे हार्ट हेल्दी रहता हैं। जिमीकंद में ओमेगा-3 फैटी एसिड की भी अच्छी मात्रा होती हैं, जो रक्त के थक्के को जमने से रोकता हैं।

■ रेड ब्लड सेल्स को इनक्रीज करे

सूरन में कॉपर की बढ़िया मात्रा होती हैं जो रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाने में मददगार हैं। इससे ब्लड फ्लो को बेहतर बनाये रखने में आसानी होती हैं। इसमें पाया जाने वाला आयरन, रक्त संचार को ठीक बनाने का काम करता हैं।

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■ पाइल्स और दस्त में उपयोगी

जिमीकंद का प्रयोग बवासीर, सांस, खांसी, कृमिरोग और दस्त के इलाज में किया जाता है। यह बवासीर से आराम दिलाता हैं, जिसके कारण इसे अर्शीघ्न के नाम से भी जाना जाता हैं। अगर लीवर की प्रॉब्लम से पीड़ित हैं, जिमीकंद आपके लिए किसी औषिधि से कम नहीं हैं। वातरोग होने पर इसका सेवन करना लाभकारी हैं।

■ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

सूरन में एंटीऑक्सीडेंट भारी मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इसमें बीटा-कैरोटीन भी होता हैं। जिसके कारण यह शरीर को कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में सहायता करता हैं।

■ साँस और स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करे

अगर इसे फोड़े-फुंसी, अल्सर या किसी भी तरह के चमड़ी की बिमारियों पर लगाया जाये तो इससे काफी ज्यादा फायदा होगा। इसके अलावा इसका सेवन करने से कफ और साँस से जुड़ी प्रॉब्लम्स भी दूर होती हैं।

■ गठिया और अस्थमा की बीमारी में लाभकारी

जिमीकंद में एंटी-इन्फ्लेमेंट्री गुण पाए जाते हैं जो गठिया और अस्थमा की बीमारी से आराम दिलाते हैं। इसलिए गठिया और दमा के रोगियों को जिमीकंद को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

जरूरी सावधानी :- आयुर्वेद की माने तो जिन लोगो कुष्ठ या किसी भी तरह का चर्म रोग हुआ हैं, उन्हें जिमिकंद का सेवन नहीं करना चाहिए। जिमीकंद चरपरा, कसैला, खुजली करने वाला, ड्राय, कफ और बवासीर रोगनाशक हैं। इसलिए इसे कभी-कभी ही खाना चाहिए। लेकिन खाना जरूर चाहिए, क्योंकि यह आयरन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है, जिससे शरीर को फायदा होता है।



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