दमा के मरीज़ को मछली जरूर खानी चाहिए, इससे होता हैं ज़बरदस्त फायदा।

दमा के मरीजों को क्यों खानी चाहिए मछली? इससे क्या फायदा होता है?

अस्थमा यानी दमा फेफड़ों में होने वाला रोग हैं, जिसमे श्वसन मार्ग में रुकावट आ जाती है। मतलब की यह बीमारी फेफड़ों से वायु मार्ग में बाधा पैदा करती है। जिसकी वजन से सांस लेने वाली नली में सूजन हो जाती हैं या फिर सांस नली का मार्ग संकरा हो जाता है। जिससे वायु सही तरह से पास नहीं हो पाती हैं और परिणामस्वरूप सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है।

दमा के लक्षण की बात की जाये तो थकान होना, गले में खराश होना, सांस लेने के दौरान घबराहट होना, खांसी के दौरान दर्द महसूस होना, सर्दी होना, सीने में जकड़न होना आदि होते हैं।

एक रिसर्च की माने तो दमा का इलाज अगर सही तरीके से किया जाये और दमा की बीमारी में मछली भरपूर मात्रा में खायी जाये तो, यह बीमारी काफी हद तक ठीक हो सकती है। मतलब साफ हैं की दमा के मरीज़ को मछली जरूर खानी चाहिए। इससे अस्थमा की बीमारी में फायदा होता है। आइये जानते हैं दमा रोग होने पर मछली का सेवन करना कैसे फायदेमंद होता है।

अस्थमा की बीमारी में मछली खाने के फायदे :-

मछली को नियमित रूप से खाने पर कई सारी बीमारियाँ वैसे भी दूर हो जाती हैं। अस्थमा के रोगियों को अस्थमा से सम्बंधित समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए मछली का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसमें फैटी एसिड पाए जाते हैं जो दमा रोग में फायदेमंद होते है। दमा के मरीजों को हफ्ते में एक बार मछली जरूर खानी चाहिए। इससे उन्हें सांस लेने में आसानी होती है, साथ ही गले की खराश, सूजन, संकरी श्वसननली आदि भी ठीक होने लगते हैं।

मछली पकाते समय न करे यह गलतियां।

आपको जानकर हैरानी होगी की दमा के जो मरीज़ हफ्ते में 2 बार मछली को खाते हैं। उन मरीजों में लगभग 90% दमा की समस्याएं कम हो जाती है।

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मछली के तेल का सेवन भी होता हैं फायदेमंद :-

समुंदरी फिश, साल्मन फिश, टूना फिश और कॉड लीवर को मिला कर फिश ऑयल बनाया जाता है। मछली के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता हैं जो दमा के रोगियों को आराम दिलाता हैं। अगर दमा के मरीज़ मछली के तेल का सेवन करते है तो उनकी बीमारी जल्दी ठीक होने लगती है।

यह गले की सूजन को दूर करता हैं। जिन बच्चों श्वास दमा की शिकायत हैं, उन्हें फिश ऑयल का सेवन जरूर करना चाहिए।

कितनी मात्रा में लेना चाहिए मछली का तेल और क्या हैं सावधानी :-

दमा पेशेंट को रोजाना 3 ग्राम मछली के तेल का सेवन करना चाहिए। अगर वह ज्यादा मात्रा में फिश ऑयल को लेते हैं तो इससे उन्हें नुकसान हो सकता हैं। मछली के तेल को ज्यादा मात्रा में सेवन करने से दस्त की समस्या, सांस से जुड़ी समस्याएं और नाक से खून निकलना जैसी समस्याएं हो सकती है।

अस्थमा यानि दमा की बीमारी को दूर करने के लिए उपयोगी घरेलु नुस्खे और आहार।

इसके अलावा अगर आप अस्थमा की दवाईयां खा रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही फिश ऑयल का सेवन करे। फिश ऑयल न सिर्फ अस्थमा के रोग को दूर करता हैं, बल्कि इससे आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस, अल्जाइमर की बीमारी और दिल की बीमारियों को दूर करने में भी मदद मिलती हैं।

अगर आप अस्थमा के मरीज़ हैं तो आप फिश थेरेपी का भी उपयोग कर सकते हैं। इससे भी अस्थमा की बीमारी से छुटकारा पाने में मदद मिलती हैं।

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