दुनिया के अलग-अलग कैलेंडर के बारे में जानिए.

कैलंडर के बारे में रोचक जानकारी

वैसे तो एक जनवरी को पुरे विश्व में नया साल मनाया जाता हैं। लेकिन भारतीय हिन्दू कैलेंडर में नए साल की शुरुवात चैत्र नवरात्रि से होता हैं। यह एक ऐसा दिन हैं जिसे सभी लोग अपने अपने तरीके से मनाते हैं। कई जगहों पर सुबह-सुबह लोग प्रभात फेरी निकालते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और एक दुसरे को हिन्दू नव वर्ष की शुभकामनाये भी देते हैं। भारतीय कैलेंडर को विक्रम संवत भी कहा जाता हैं। यह चीनी कैलेंडर और अंग्रेजी कैलेंडर से भिन्न हैं। आइये जानते हैं दुनिया में और कौन कौन से कैलेंडर हैं? इनका महत्व क्या हैं? यानी की अलग-अलग कैलेंडर के बारे में जानकारी।

■ विक्रम संवत

विक्रम संवत हिन्दू कैलेंडर हैं, जिसकी शुरुवात 58 ईस्वी पूर्व हुई थी। यह हिन्दू पंचांग पर आधारित हैं, इसकी शुरुवात सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। ब्रह्म पुराण के अनुसार इस नववर्ष के दिन यानी चैत्र माह में ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी। इसे उगाड़ी या युगादि के नाम से भारत के कई राज्यों में मनाया जाता हैं। यह संवत हिन्दू माह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी गुड़ी पड़वा से प्रारम्भ होता हैं। बारह महीने का एक वर्ष और हफ्ते में सात दिन रखने की शुरुवात विक्रम संवत से ही शुरू हुई थी। बारह राशियां बारह सौर मास हैं। बारह माह बारह चंद्र मास है। चंद्र की 15 कलाएं तिथियां हैं। यह हिन्दू पंचाग और उसकी सभी धार्मिक गतिविधियों में उचित बैठने वाला कैलेंडर हैं। इसलिए इसे हिन्दू कैलेंडर के रूप में जाना जाता हैं।

■ इस्लामिक कैलेंडर

इसे हिजरी कैलेंडर के नाम से जाना जाता हैं। हिजरी सन की शुरुवात मोहर्रम माह के पहले दिन से होती हैं। इसकी शुरुवात 622 ईस्वी में हुई। हजरत मुहम्मद साहिब जब मक्का से निकल कर मदीना में बस गये तो इसे ही हिजरत कहा गया। इसी से हिज्र बना और जिस दिन वह मक्का छोड़कर मदीना आये, उसी दिन से हिजरी कैलेंडर की शुरुवात हुई। हिजरी कैलेंडर के बारे में रोचक फैक्ट यह हैं की इसमें चन्द्रमा की घटती-बढ़ती चाल के अनुसार दिनों को नहीं गिना जाता। लिहाज़ा इसके महीने हर साल लगभग 10 दिन पीछे खिसकते रहते हैं।

■ शक संवत

इस कैलेन्डर की शुरुवात विक्रम संवत के बाद हुई। ऐसी मान्यता हैं की इसे शक सम्राट कनिष्क ने सन 78 ईस्वी में शुरू किया था। आजादी के बाद भारत सरकार ने इसी शक संवत में मामूली सा बदलाव करके इसे राष्ट्रिय संवत के रूप में घोषित कर दिया। राष्ट्रीय संवत की शुरुवात 22 मार्च को होती हैं, जबकि लीप ईयर में यह 21 मार्च से शुरू होता हैं। यह संवत सूर्य के मेष राशि में जाने पर शुरू होता हैं।

■ ईसाई नया साल

पूरी दुनिया में इसी दिन को नया साल मनाया जाता हैं। एक जनवरी को मनाया जाने वाला न्यू ईयर ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधरित हैं। इसकी शुरुवात रोमन कैलेंडर से हुई थी, जबकि पारम्परिक रोमन कैलंडर में नव वर्ष की शुरुवात 1 मार्च से होती हैं। विश्व भर में आज जो कैलेंडर प्रचलित हैं, मतलब की जिसका इस्तेमाल हम कर रहे हैं, इसे पॉप ग्रेगोरी अष्टम ने सन 1582 में बनाया था। ग्रेगोरी ने इसमें लीप ईयर का भी प्रावधान किया था। इसे अंग्रेजी कैलेंडर के नाम से भी जाना जाता हैं।

■ पारसी नववर्ष

पारसी धर्म में नववर्ष को नवरोज के रूप में मनाया जाता हैं। इसकी शुरुवात 3000 साल पहले हुई थी। अमूमन 19 अगस्त को पारसी धर्मावलम्बी नवरोज का त्यौहार मनाते हैं। नवरोज का मतलब होता हैं नया दिन। इस दिन पारसी मंदिर अज्ञारी में खास प्राथनाएं की जाती हैं।

■ बौद्ध संवत

बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग बुध पूर्णिमा के दिन को नये साल के रूप में मनाते हैं। कुछ लोग 17 अप्रैल को नया साल मनाते हैं, तो कुछ लोग 21 मई को बौद्ध नववर्ष की शुरुवात मानते हैं। बर्मा, थाईलैंड, कंबोडिया, श्रीलंका और लाओ में रहने वाले बौद्ध अनुयाई 7 अप्रैल को बौद्ध नववर्ष मनाते हैं।

■ सिख नववर्ष

इसे सिख नानकशाही कैलेंडर कहा जाता हैं। इसके अनुसार होला मोहल्ला यानि होली के दुसरे दिन नए साल की शुरुवात होती हैं।

■ जैन नववर्ष

जैन संवत में नववर्ष की शुरुवात दीपावली के अगले दिन से होता हैं। भगवान महावीर के मोक्ष प्राप्ति के अगले दिन से इसकी शुरुवात होती हैं। इसे वीर निर्वाण संवत भी कहते हैं। लगभग 527 ईस्वी पूर्व महावीर स्वामी को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी।




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