बबूल के पेड़ के फायदे

बबूल के पेड़ के फायदे

बबूल के पेड़ को कीकर का पेड़ भी कहा जाता हैं। इसके पेड़ की मुलायम टहनियों को दातुन की तरह इस्तेमाल किया जाता हैं। बबूल की दातुन करने से न सिर्फ दांत हेल्दी रहते हैं, बल्कि शरीर की कई बीमारियाँ भी दूर रहती हैं। बबूल में पित्त और कफ का नाश करने वाले गुण पाए जाते हैं।

बबूल की गोंद वात और पित्त का नाश करने वाली होती हैं। यह घाव को भरने वाला, जलन दूर करने वाला और रक्तशोधक का काम करता हैं। बबूल का पेड़ आयुर्वेदिक गुणों से भरा हुआ पेड़ हैं। आइये जानते हैं बबूल के पेड़ के फायदे क्या हैं? क्योंकि बबूल की पत्तियां, गोंद और छाल सभी चीजों का इस्तेमाल कई सारी बिमारियों के उपचार में किया जाता हैं।

बबूल के पेड़ के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके :-

■ आँखों में पानी आने की समस्या

अगर आँखों से पानी आने की प्रॉब्लम हैं तो 250 ग्राम बबूल की पत्तियों को पानी में तब तक उबाले, जब तक पानी आधा एक चौथाई न हो जाये। फिर इस पानी को भर कर रख ले। इसके पश्चात सुबह-शाम आँखों की पलकों को इससे धोते रहे।

■ जलने और चोट लगने के बाद

बबूल के पत्ते का इस्तेमाल घाव लगने, चोट लगने या जलने पर प्रयोग किया जा सकता हैं। यह दाग को लगने से रोकता हैं, इसके लिए बबूल की पत्तियों को पीस कर ज़ख्म पर लगाये।

■ दांतों की समस्याओं के लिए

बबूल की छाल की दातुन करने से दांतों और मसूड़ो को फायदा होता हैं। इससे दांतों की सड़न और मसूड़ो से खून आना बंद हो जाता हैं। बबूल की दातुन करने से दांत एकदम साफ हो जाते हैं। दांतों की सफाई करने के लिए 60 ग्राम बबूल का कोयला, 24 ग्राम रोस्ट की गयी फिटकरी और 12 ग्राम काला नमक मिला कर मंजन बनाये। इस मंजन का इस्तेमाल दांतों को साफ करने के लिए नियमित रूप से करे।

■ कंजक्टिरवाइटिस होने पर

आँख आने यानी कंजक्टिावाइटिस की समस्या होने पर सोने से पहले कंजक्टि वाइटिस वाली आँख पर बबूल के ताज़े पत्ते पीस कर लगा ले। फिर इसे किसी साफ कपड़े से बाँध ले। सुबह उठकर इसे खोल दे, एक या 2 दिन इस उपाय को अजमाने से आँख में होने वाला दर्द और लालिमा ख़त्म हो जाएगी।

■ खांसी दूर करने के लिए

बबूल की नर्म पत्तियों को पानी में उबाल कर काढ़ा बनाये। इसे दिन में 2 से 3 बार पीने से सीने में होने वाला दर्द और खांसी दूर हो जाती हैं। खांसी से छुटकारा पाने के लिए बबूल की गोंद को मूंह में रख कर चूसने से भी फायदा होता हैं।

■ डायरिया दूर करे

बबूल डायरिया को दूर करने की क्षमता रखता हैं। बबूल की ताज़ी पतियों को सफ़ेद और काले जीरे के साथ पीस कर 12 ग्राम दिन में 3 बार खाने से डायरिया दूर होने लगता हैं। इसी तरह बबूल की छाल का काढ़ा बना कर दिन में 3 बार पीने से भी डायरिया ठीक हो जाता हैं

■ टॉन्सिल्स का इलाज

बबूल की छाल का काढ़ा बना कर काला नमक मिलाये और इससे गरारे करे। ऐसा करने से टॉन्सिल्स ठीक होने लगती हैं।

■ लिकोरिया का उपचार

स्त्रियों में होने वाली लिकोरिया की बीमारी को दूर करने के लिए बबूल की छाल मददगार होती हैं। बबूल की छाल का काढ़ा बना कर पीने से काफी ज्यादा लाभ मिलता हैं।

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■ एक्जिमा में फायदेमंद

25 ग्राम आम की छाल और 25 ग्राम बबूल की छाल को एक लीटर पानी में उबाल कर एक्जिमा वाली जगह पर इसकी भाप से सेंकाई करे। सिकाई के बाद उस स्थान पर घी लगा दे। इसके अलावा बबूल की ताज़ी पत्तियों को पीस कर एक्जिमा वाली त्वचा पर लगाना चाहिए। इससे एक्जिमा की बीमारी से निजात पाने में आसानी होती हैं।








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