ब्लड कैंसर क्यों होता हैं, कितने प्रकार का हैं और इसके लक्षण क्या हैं?

ब्लड कैंसर क्यों होता हैं, कितने प्रकार का हैं और इसके लक्षण क्या हैं?

ब्लड कैंसर, कैंसर का ही एक रूप हैं जो रक्त, अस्थि मज्जा और लसिका प्रणाली में होता हैं। ब्लड कैंसर में आमतौर पर असामान्य रक्त सेल्स विकसित होते हैं। ब्लड कैंसर किसी को भी हो सकता हैं। ब्लड कैंसर तीन प्रकार का होता हैं। 20 वीं सदी के बाद कैंसर के एडवांस तकनीक के चलते हैं इसका इलाज अब संभव हैं। लेकिन अगर इसकी शुरुवाती अवस्था के बारे में पता चल जाये तो ही रोगी पूरी तरह से ठीक हो सकता हैं। ब्लड कैंसर होने के बाद रोगी सही चिकित्स्य द्वारा नार्मल लाइफ जी सकता हैं। लेकिन ब्लड कैंसर होने के शुरुवाती दौर पर ही पता लगने पर ही इसका इलाज संभव हैं, अन्यथा नहीं हैं।

चलिए जानते हैं ब्लड कैंसर होने के क्या कारण होते हैं?

इन्फेक्शन

किसी खास किस्म के इन्फेक्शन होने पर आपको ब्लड कैंसर होने का खतरा हो सकता हैं।

HIV और AIDS

एचआईवी और एड्स जैसे इन्फेक्शन होने पर इम्यून सिस्टम कमजोर बनता हैं। जिससे ब्लड कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता हैं।

इम्युनिटी का कमजोर होना

अगर आपकी बॉडी की इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हैं तो आपको ब्लड कैंसर होने का ख़तरा होता हैं।

रेडिएशन थेरेपी

अगर किसी दुसरे कैंसर के इलाज में इस्तेमाल किये जाने वाले रेडिएशन थेरेपी का हाई डोज़ दिया जा रहा हैं तो रोगी को ब्लड कैंसर हो सकता हैं।

ब्लड कैंसर कितनी तरह के होते हैं?

ब्लड कैंसर 3 प्रकार के होते हैं। इनका नाम ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर, लिंफोमाज ब्लड कैंसर और मल्टीपल मायलोमा ब्लड कैंसर हैं।

मल्टीपल मायलोमा ब्लड कैंसर

मल्टीपल मायलोमा ब्लड कैंसर के मरीज़ ज्यादातर बूढ़े लोग होते हैं। इसमें वाइट ब्लड सेल्स के एक प्रकार प्लाजमा प्रभावित होते हैं। इसके उपचार के लिए कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और दूसरी दवाईओं का इस्तेमाल किया जाता हैं।

लिंफोमाज ब्लड कैंसर

लिंफोमाज ब्लड कैंसर एक प्रकार के सफेद रक्त कोशिकाओं को प्रभावित कर लिम्फोसाइट्स में होता है। इस ब्लड कैंसर के लक्षण ट्यूमर की जगह पर साइज़ पर निर्भर करते हैं। इसकी शुरुवात होने पर गर्दन में, बाजुओं के नीचे, पेट और जांघो के बीच वाले हिस्से में सूजन होने लगती हैं। इसका ट्रीटमेंट कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के द्वारा किया जाता हैं।

ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर

ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर होने पर कैंसर सेल्स खून बनाने के प्रोसेस पर दखल देने लगते हैं। ल्यूकेमिया खून के साथ ही अस्थि मज्जा पर भी अटैक करता हैं। इसकी वजह से मरीज़ को चक्कर आना, खून की कमी होना, कमजोरी होना और हड्डियों में दर्द बने रहने की समस्या होने लगती हैं। ल्यूकेमिया होने का पता ब्लड टेस्ट के जरिये ही चलता हैं, जिसमे एक खास किस्म के ब्लड सेल्स को गिना जाता हैं। ल्यूकेमिया का उपचार कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के जरिये ही किया जाता हैं। कुछ खास मामलो में अगर जरूरी हो तो अस्थि मज्जा (बॉन मेरो) को ट्रांसप्लांट भी किया जा सकता हैं।

ब्लड कैंसर होने पर इसका लक्षण क्या क्या होते हैं?

ब्लड कैंसर की पहचान के लिए जरूरी हैं इसके लक्षण को पहचाना जाये। अगर आप इसके लक्षणों (Symptoms) को पहचान लेते हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टर से सम्पर्क करके इसका ट्रीटमेंट करवाना शुरू कर दे। आइये जानते हैं ब्लड कैंसर को पहचाने के लिए कुछ खास लक्ष्ण। ब्लड कैंसर की पहचान के लिए इसके symptoms की जानकारी बहुत ही जरूरी हैं। बिना देरी किये डॉक्टर से सम्पर्क करना ही इससे बचने का एकमात्र तरीका हैं।

हड्डियों और जोड़ो में दर्द होना

हड्डियों और जोड़ो में दर्द होना सिर्फ आर्थराइटिस या ऑस्टियोपोरोसिस के कारण ही नहीं होता हैं, यह भी खून के कैंसर होने का संकेत हो सकता हैं। ब्लड कैंसर बॉन मेरो में होने वाला रोग हैं जो हड्डियों और जोड़ो के आस पास ज्यादा मात्रा में पाया जाता हैं। यह मेरो में वाइट ब्लड सेल्स के बढ़ जाने के कारण होता हैं।

वज़न लगातार कम होने लगता हैं

ब्लड कैंसर होने पर व्यक्ति का वज़न असामान्य तरीके से लगातार कम होने लगता हैं। अगर बिना किसी कोशिश के वज़न कम होने लगे तो यह ब्लड कैंसर होने के प्राथमिक लक्षण हो सकते हैं।

पेट की प्रॉब्लम होना

असामान्य वाइट ब्लड सेल्स लीवर में जमा होने लगते हैं, जिससे पेट में सूजन और दूसरी समस्याएं होने लगती हैं। इस तरह की सूजन होने पर आपकी भूख भी कम हो जाती हैं। थोड़ा सा भोजन करने पर आपका पेट भरा-भरा सा लगने लगता हैं। ऐसे में आपको डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

थकान महसूस होना

ब्लड कैंसर होने पर मरीज़ को ज्यादातर थकान और कमजोरी महसूस होने लगती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि खून में रेड ब्लड सेल्स की संख्या कम हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति में खून की कमी हो जाती हैं।

लिम्फ नोड्स का बढना

लिम्फ नोड्स में बदलाव आना भी ब्लड कैंसर की निशानी हो सकती हैं। लिम्फ नोड्स या गले में एक गाँठ या सूजन होने पर बिना समय गवाएं डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

बार-बार इन्फेक्शन होना

ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीज़ बार-बार इन्फेक्शन का शिकार हो जाता हैं। जब शरीर में ल्यूकेमिया के सेल्स बढ़ते हैं तो मरीज़ को गले, मूंह, फेफड़े, स्किन आदि के इन्फेक्शन होने लगते हैं।

बहुत ज्यादा खून बहना

शरीर में ल्यूकीमिया सेल्स का असामान्य निर्माण अस्थि मज्जा को स्वस्थ रक्त कोशिकाओं को बनाने से रोकता है जैसे प्लेटलेट्स। प्लेटलेट्स कोशिकाओं का ही एक हिस्सा होता हैं जो चोट लगने पर ज्यादा खून बहने से रोकता हैं। लेकिन इसकी कमी होने पर मरीज़ को नाक से खून, पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग, मसूड़ो से खून आने की समस्या होने लगती हैं।

अचानक बुखार होने लगता हैं

बुखार भी ब्लड कैंसर होने का एक लक्षण हो सकता हैं, क्योंकि ब्लड कैंसर होने पर रोगी की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती हैं। जिससे मरीज़ को बार-बार बुखार होने लगता हैं। ब्लड कैंसर ल्यूकेमिया में ज्यादातर बुखार आने के लक्षण दिखाई देते हैं।



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