जब पांडवों में सिर्फ सहदेव ने अपने पिता पांडू की इच्छा पूरी की।

पांडवों में सिर्फ सहदेव ने पिता पांडू का मांस खाया

आइये आज ऐसी महाभारत की ऐसी घटना के बारे में जानते हैं, जिसके बारे में काफी कम लोग ही जानते हैं। क्या आपको पता हैं की पांडवों के पिता पांडू की मृत्यु के पश्चात पांडवों में एकमात्र सहदेव ने उनकी इच्छा को पूरा किया था। आइये जानते हैं की महाराज पांडू की ऐसी कौन सी इच्छा थी, जिसे सिर्फ सहदेव ने ही पूरा किया।

पांडू कौन थे?

पांडू महर्षि व्यास और अम्बालिका के पुत्र थे। उनके ज्येष्ठ भ्राता धृतराष्ट्र थे। लेकिन धृतराष्ट्र अंधे थे, इसलिए पांडू को हस्तिनापुर का सम्राट बनाया गया। उनकी 2 पत्नियाँ थी कुंती और माद्री।

महाराज पांडू को मिला श्राप

महाभारत की कहानी के अनुसार एक बार महाराज पांडू शिकार करने के लिए गये। एक ऋषि और उसकी पत्नी ने मृग-मृगनी का रूप धारण किया था और वे दोनों मृग-मृगनी बन कर सम्भोग कर रहे थे। महाराज पांडू ने सम्भोग करते हुए मृग पर बाण चला दिया। यह बाण मृग बने ऋषि को जा लगा। इस पर ऋषि अपने रूप में आ गये और मरते-मरते उन्होंने महाराज पांडू को श्राप दिया की जिस दिन महाराज पांडू सम्भोग करेंगे, उसी क्षण उनकी मृत्यु हो जाएगी। इस श्राप की वजह से महाराज पांडू निसंतान हो गये। इसके पश्चात वह अपना सारा राज्यपाठ त्याग कर वन में चले गये। उनके साथ उनकी दोनों पत्नियाँ कुंती और माद्री भी साथ थी।

कुंती और माद्रि ने वरदान के जरिये पांडवों को जन्म दिया

वन में रहते हुए महाराज पांडू काफी उदास रहते थे। लेकिन उन्हें जब ज्ञात हुआ की रानी कुंती को विवाह से पूर्व दुर्वासा ऋषि से वरदान प्राप्त था। जिसके अनुसार वह किसी भी देवता के मंत्र का आह्वान करके उनसे सन्तान प्राप्त कर सकती थी। इसके बाद महाराज पांडू की आज्ञा से रानी कुंती ने माद्री को भी यह मंत्र बताया। फिर उन दोनों ने देवताओं का आह्वान करके पांडव पुत्रों की प्राप्ति की। माता कुंती के तीन पुत्र युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन थे, जबकि माद्री के 2 पुत्र नकुल और सहदेव हुए।

महाराज पांडू की मृत्यु

ऋषि के श्राप के कारण महाराज पांडू ने राजपाट त्याग दिया था। वह वह अपनी रानियों और अपने पुत्रों के साथ वन में रहते थे। एक दिन पांडू माद्री के साथ वन में घूम रहे थे। लेकिन वह माद्री के रूप को देख कर अपने आप पर नियन्त्रण नहीं रख पाए। उसके पश्चात उन्होंने माद्री के साथ सम्भोग कर लिया। जिसके तुरंत पश्चात श्राप के कारण महाराज पांडू की मृत्यु हो गयी। तो दूसरी ओर माद्री ने महाराज पांडू की मृत्यु का कारण स्वयं को माना और रानी माद्री ने भी अपने प्राण त्याग दिए।

महाराज पांडू की अंतिम इच्छा

महाराज पांडू यह मानते थे की पांडव उनके पुत्र हैं। लेकिन वे वरदान से प्राप्त हुई उनकी संतान हैं, न की उनके शरीर से उत्पन्न सन्तान। इसलिए महाराज पांडू चाहते थे की उनके मृत्यु के पश्चात उनके शरीर का मांस पाँचों पांडव खा ले। जिससे वह उनके वास्तव के पिता बन जाये और उनका ज्ञान और कौशल सभी पांडवों को मिल सके। लेकिन प्रचलित कथा के अनुसार पांडवों में सिर्फ सहदेव ही अकेले पांडव थे, जिन्होंने अपने पिता की अंतिम इच्छा को पूरा किया।

कहा जाता है की सहदेव ने अपने पिता पांडू के मष्तिष्क के तीन हिस्से खाए। जब सहदेव ने मष्तिष्क का पहला हिस्सा खाया तो उन्हें भूतकाल का ज्ञान हो गया, जब उन्होंने दुसरा हिस्सा खाया तो उन्हें वर्तमान का ज्ञान हो गया और जब उन्होंने मष्तिष्क के तीसरे हिस्से को खाया तो उन्हें भविष्य में होने वाली सभी घटनाओं के बारे में ज्ञान हो गया।

सहदेव को भगवान श्री कृष्ण ने दिया श्राप

जैसा की आपको पता चल गया हैं की जब सहदेव ने महाराज पांडू के मष्तिष्क का तीसरा भाग खाया तो उन्हें भविष्य के बारे में सभी जानकारियों का पता लग चूका था। अतः यह कहा जा सकता हैं की भगवान श्री कृष्ण के बाद सहदेव ही ऐसे थे, जिन्हें महाभारत के युद्ध के बारे में पहले से पता था। लेकिन तब भगवान श्री कृष्ण ने सहदेव को श्राप दिया की अगर सहदेव भविष्य में होने वाली घटनाओं और अपनी इस शक्ति का वर्णन किसी से करेंगे तो उसी क्षण सहदेव की मृत्यु हो जाएगी। इस प्रकार यह कहा जा सकता हैं की सहदेव को भविष्य में होने वाली सभी घटनाओं और महाभारत के युद्ध के नतीजे आदि का पहले से पता था। लेकिन उन्होंने अपनी इस शक्ति को किसी के सामने प्रस्तुत नहीं किया।



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