मानसिक प्रताड़ना से बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी पर पड़ता हैं बुरा असर।

इमोशनल एब्यूज के नुकसान.

आज का युग घमंड और दिखावे का युग हैं, जिसके कारण इस दुनिया में कई ऐसे बुरे लोग भी हैं जो अपने रुतबे और पॉवर की वजह से किसी भी व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने से भी भी बाज़ नहीं आते हैं। स्कूल में बच्चे कई बार इमोशनल एब्यूज और ऑफिस में बड़े लोग इमोशनल एब्यूज का शिकार बनते ही रहते हैं। अगर किसी व्यक्ति या बच्चे को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाये तो वह इंसान अंदर से पूरी तरह से टूट जाता हैं।

इमोशनल एब्यूज से उभरने में इंसान को काफी ज्यादा समय भी लग जाता हैं। अगर कोई इन्सान या बच्चा थोड़े से समय के लिए मानसिक प्रताड़ना (इमोशनल एब्यूज) का शिकार होता हैं, तो उसे ठीक होने की सम्भावना बनी रहती हैं। लेकिन अगर कोई बच्चा या व्यस्क लम्बे समय तक मानसिक प्रताड़ना का शिकार होता रहता हैं और हमेशा मानिसक प्रताड़ना से पीड़ित रहता हैं तो ऐसा इंसान जिन्दगी में कभी भी कुछ हासिल नहीं कर पाता हैं। उसके लिए जिंदगी एक बोझ ही बन जाती है।

शोर्ट टर्म में इमोशनल एब्यूज से ग्रस्त होने के नुकसान :-
इमोशनल एब्यूज कई तरह से हो सकता हैं। जिस किस्म का मानसिक प्रताड़ना होती हैं, उसी के अनुसार इंसान के उपर असर पड़ता हैं। जैसे की सबके सामने डांट देना या सबके सामने बेज्जती कर देना आदि से भी कुछ लोग इतने ज्यादा आहात हो जाते हैं की वह लोग मानसिक बिमारियों के शिकार बन जाते हैं। असल में शारीरिक प्रताड़ना से भी कंही अधिक ख़तरा मानसिक प्रताड़ना का होता हैं। क्योंकि इससे कोई भी मनुष्य पुरी तरह से निराश और दुःख में चला जाता हैं।

आइये जाने इमोशनल एब्यूज का शिकार हुए इंसान के बिहेवियर में क्या-क्या बदलाव आने लगते हैं?

■ गुस्सा जल्दी आना

इमोशनल एब्यूज से पीड़ित लोग बहुत ही जल्दी क्रोधित होने लगते हैं। ऐसे लोग अकेले में उस शख्स को गाली देने लगते हैं, जो उन्हें हमेशा परेशान करते रहता हैं। कई बार यह भी देखा जाता हैं की जिस व्यक्ति के द्वारा वह मानसिक रूप से प्रताड़ित होते हैं, उनके प्रति उनका रवैया नेगेटिव हो जाता हैं। यानी की वह उस व्यक्ति के हर बात में नेगेटिविटी तलाश करने लगते है। कई बार ऐसे लोग अकेला होने पर फूट-फूट कर रोने भी लगते हैं।

■ हमेशा कंफ्यूज रहना

चाहे बड़े हो या बच्चे जब भी कोई इंसान इमोशनल एब्यूज से पीड़ित होता हैं तो उसे यह समझ नहीं आता है की किस हालात में कैसा बर्ताव करना चाहिए। यानी की वह आसपास की मौजूदा स्तिथि को समझने में नाकामयाब होने लगते हैं और हमेशा कंफ्यूज रहते हैं। ज्यादातर मामले में वह खुद को समझाने का प्रयास करते रहते हैं की जो भी उनके साथ बुरा हुआ है, वह शीघ्र की सही हो जायेगा।

■ सेल्फ-कॉन्फिडेंस में कमी आना

इन सबकी वजह से मानसिक रूप से प्रताड़ित रहने वाले लोगो में आत्म-विश्वास की काफी ज्यादा कमी आने लगती हैं। ऐसे लोग अपने आप को किसी लायक नहीं समझते हैं। कुछ ही दिनों के अन्दर उनका दिमाग नकारात्मक विचारों से भर जाता हैं। ऐसी स्तिथि होने पर वह किसी से बात करने और आँखें मिलाने से भी कतराने लगते हैं। साथ ही खुद को हमेशा लाचार और दयनीय महसूस करने लगते है।

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अगर कोई बच्चा इमोशनल एब्यूज का शिकार हैं तो वह बड़ों के मुकाबले काफी ज्यादा परेशान रहता हैं। इससे बच्चे के अंदर किसी भी बात को लेकर कोई कॉन्फिडेंस नहीं होता हैं। कई बार माता-पिता अपने बच्चों को दुसरे बच्चे के साथ बार-बार तुलना करके उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। इसलिए पेरेंट्स को ऐसा नहीं करना चाहिए, साथ ही कई बार बच्चा स्कूल या कॉलेज में जाकर भी भी अन्य बच्चों के द्वारा इमोशनल एब्यूज का शिकार बन जाता हैं। ऐसे में विशेष करके बच्चों को मानसिक प्रताड़ना से बचाने की कोशिश करनी जरूरी हैं।

■ गिल्ट और डर महसूस होना

ज्यादातर मामलों में इमोशनल एब्यूज का शिकार हुआ इंसान खुद को ही इन बुरी परिस्तिथियों के लिए जिम्मेवार मानने लगता हैं। ऐसे में मानसिक रूप से प्रताड़ित हुआ व्यक्ति, मानसिक प्रताड़ना देने वाले इंसान से हमेशा डरने लगता हैं। मानसिक रूप से प्रताड़ित हुआ व्यकित सभी हालातों में खुद को दोषी मानने लगता हैं, जिसके कारण उसके मेंटल हेल्थ पर काफी बुरा असर पड़ता हैं।

लॉन्ग टर्म में मानसिक प्रताड़ना से होने वाले साइड-इफेक्ट्स :-

जिन लोगो का बचपन हमेशा इमोशनल एब्यूज में बीता हैं। उन लोगो की ज़िन्दगी में इससे इतना ज्यादा गहरा असर पड़ चूका होता हैं की ऐसे लोग पूरी जिन्दगी भर नेगेटिव थॉट्स और बुरे विचारों से उभर ही नहीं पाते हैं। तो दूसरी ओर अगर कोई बड़ी उम्र वाला व्यक्ति इमोशनल एब्यूज का शिकार होता हैं तो वह इसे झेल लेता है, लेकिन फिर भी उसके व्यवहार में काफी ज्यादा बदलाव आ ही जाते है। आइये जानते हैं की अगर कोई बच्चा या बड़ा ज्यादा समय तक मासिक प्रताड़ना (इमोशनल एब्यूज) का शिकार बने रहता हैं तो उसमें क्या-क्या बदलाव या कमियां आने लगती हैं।

► ऑफिस या स्कूल में बुरा प्रदर्शन करना

इमोशनल एब्यूज से शिकार हुआ इंसान न तो घर में खुश रहता हैं और न ही बाहर जाकर खुश रहता हैं। उसकी प्रोफेशनन लाइफ पर बुरा असर पड़ता हैं। जिसके कारण बच्चे अपनी पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाते हैं और अपना पूरा समय इधर-उधर गलत आदतों में बिता देते हैं। जिसके कारण वह पढ़ाई में कमजोर होने लगते हैं। वैसे उन बच्चों में बौद्धिक क्षमता होती हैं की वह अच्छे विद्यार्थी बन सके, लेकिन इमोशनल एब्यूज के बुरे प्रभाव के कारण खुद को कमजोर और लाचार मानने लगते हैं। जिसके कारण वह स्टडी में कुछ भी अच्छा नहीं कर पाते है।

► नींद न आने की समस्या होना

प्रतिदिन बॉस से या किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा प्रताड़ित होने से इंसान की मनोस्थिति काफी ज्यादा ख़राब हो जाती है। इसलिए जब वह सोने के लिए जाते हैं तो उन्हें अच्छी नींद भी नहीं आती है। इससे बच्चे और बड़े दोनों ही नींद न आने की बीमारी से पीड़ित होने लगते हैं।

► डिप्रेशन की समस्या होना

अगर कोई इंसान लम्बे समय तक भावनात्मक रूप से शोषित होता रहेगा तो निश्चित ही वह एक न दिन पूरी तरह से टूट ही जायेगा। वह खुद को अकेला महसूस करने लगता हैं और उन्हें किसी की मदद की भी जरूरत पड़ती हैं तो वह किसी के पास मदद मांगने से कतराने लगते है। उनका नजरिया समाज के प्रति पूरी तरह से अलग हो जाता है। जिससे ऐसे लोग आगे चलकर डिप्रेशन यानि अवसाद के मरीज़ बन जाते हैं। जिन लोगो का बचपन और किशोरअवस्था इमोशनल एब्यूज के प्रेशर में बिता हैं। ऐसे लोग आगे चलकर अपनी लाइफ में खुश नहीं रह पाते है और किसी के साथ खुद को एडजस्ट नहीं कर पाते हैं।

जरूर पढ़े :इन आदतों के कारण आप डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं।

► खान पान में परिवर्तन आना

अगर किसी का मन नहीं लग पाए तो ऐसा व्यक्ति हमेशा परेशान रहने लगता हैं, जिससे उसके खानपान में बदलाव आने लगते है। इमोशनल एब्यूज से पीड़ित बच्चे और बड़े दोनों ही न तो खाना समय पर खाते हैं और न ही उन्हें भोजन करने में दिलचस्पी रहती हैं। उनकी भोजन के प्रति यह बेरुखी धीरे-धीरे करके उनकी आदत बन जाती है, जिसके कारण उनका शरीर कमजोर हो जाता है और वे बिमारियों के शिकार भी बन जाते है।

► नशीले पदार्थों का सेवन करना

कई दिनों तक परेशान होने के बाद पीड़ित इंसान अपनी लाइफ में खुश होने के तरीके ढूँढने लगता हैं। ऐसी हालत में ज्यादातर लोग ड्रग्स, शराब और कई बुरी आदतों में फंस जाते हैं। तो दूसरी ओर बच्चे कम उम्र में स्मोकिंग करने लगते हैं और कई बार तो वह शराब पीना भी शुरू कर देते हैं।

► गुस्सा ज्यादा आना

कई बार ऐसा होता हैं की परेशान करने वाला इंसान आपकी नज़रों के सामने हो और आप चाह कर भी उसे सबक नहीं सिखा पा रहे हो तो ऐसे सिचुएशन में आप अपना गुस्सा किसी दुसरे पर निकालने लगते हैं। यह इमोशनल एब्यूज से शिकार हुए पीड़ितों का महत्वपूर्ण लक्षण हैं। ऐसी हालत में बच्चें स्कूल में अपने फ्रेंड्स के साथ लड़ने लगते हैं और बड़े ऑफिस में अपने दोस्तों और घर में अपने बीवी-बच्चों, माता-पिता पर गुस्सा निकालने लगते हैं। हालाँकि ऐसा करने के बावजूद वे लोग अंदर से काफी डरे भी हुए होते हैं।

► किसी पर भरोसा नहीं करते

बार-बार किसी के द्वारा प्रताड़ित होने के बाद इंसान इस स्तिथि में पहुँच जाता हैं की अब उसे पुरे समाज से ही भरोसा उठ जाता है और वह सामाजिक रूप से अकेले रहना पसंद करने लगता हैं। ऐसे लोग न तो अब परिवार वालों पर भरोसा करते हैं और न ही किसी अन्य शख्स पर। उन्हें बस यही लगता हैं की सामने वाला कोई भी व्यक्ति क्यों न हो, वह उसकी मुश्किलों को हल करने में उसकी मदद नहीं करेगा, बल्कि वह उसे नुकसान ही पहुचायेगा। इसी तरह का रवैया बच्चें भी अपनाने लगते हैं। वह भी किसी को अपना मानने से कतराने लगते हैं और उन्हें भी किसी की बात पर कोई भरोसा नहीं रह जाता हैं।

► एब्यूजर की तरफ लगाव होना

यह सबसे खतरनाक सिचुएशन होती है। कई मामलों में पीड़ित होने वाले इंसान प्रताड़ित करने वाले व्यक्ति के प्रति झुकाव महसूस करने लगते है। क्योंकि वो ऐसा सोचने लगते हैं की पीड़ा पहुचाने वाला इंसान एक दिन उनके बारे में अच्छा सोचेगा। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हो पाता हैं।

► स्वयं को हानि पहुचाने लगना

जो लोग लॉन्ग टर्म तक इमोशनल एब्यूज का शिकार बने रहते है। ऐसे लोग काफी हद तक मेंटल डिसऑर्डर के मरीज़ बन जाते हैं। वे अपने आप को ही नुकसान पहुचाने लगते हैं। एडल्ट लोग गुस्से में आकर खुद को ही चोट पहुचाने लगते है। कई बार तो सुसाइड करने की भी कोशिस करते है। दूसरी ओर छोटे बच्चे भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बाद गुस्से में आकर खुद को नुकसान पंहुचा लेते हैं।

जरूरी टिप्स :- किसी भी तरह का शोषण अगर किसी के साथ किया जा रहा हैं, चाहे वो शारीरिक रूप से हो या मानसिक रूप से, वह हर तरह से गलत ही होता है। अगर आप अपने आसपास किसी ऐसे इंसान या बच्चे को देखते हैं, जो लगातार मानसिक प्रताड़ना में जी रहा हैं। तो आप उस बच्चे या व्यक्ति की मदद जरूर करे। साथ ही शोषण करने वाले शख्स को भी वार्निंग दे। खास करके छोटे बच्चों को अगर यह समस्या हैं तो उनकी मदद तो हर हाल में जरूर करे। इससे उन्हें इस बुरी स्तिथि में जल्दी उभरने में आसानी होती हैं।



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