मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने के फायदे जानिए।

मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने के फायदे जानिए।

क्या आपको पता हैं की प्राचीन युग में लोग मिट्टी के बर्तन में खाना पकाते थे। आज साइंस ने कितनी भी ज्यादा उन्नति कर ली हैं, लेकिन हकीकत यह हैं की मिट्टी की हांडी में भोजन पका कर खाना, प्रेशर कुकर में भोजन पका कर खाने से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना पका कर खाने से शरीर की कई सारी बीमारियाँ दूर होती हैं। इस बात की पुष्टि मॉडर्न साइंस भी करता हैं।

मिट्टी की हांडी में पकाया गया भोजन सेहत के लिए क्यों अच्छा हैं?

आयुर्वेद का यह मानना हैं की भोजन को पकाते समय उसे वायु से संपर्क रहना चाहिए। परन्तु प्रेशर कुकर के भाप से भोजन पकता नहीं, बल्कि उबलता हैं। भोजन हमेशा धीरे-धीरे करके ही पकना चाहिए। इससे खाना टेस्टी होने के साथ ही पौष्टिक भी होता हैं। मिट्टी के बर्तन में चाहे खाना धीमे धीमे ही क्यों न पके, लेकिन यह खाना सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता हैं। इसके अलावा यह भी माना जाता हैं की जो भोजन जल्दी पकता हैं, वह सेहत के लिए हानिकारक होता हैं।

मनुष्य के शरीर को प्रतिदिन 18 तरह के माइक्रो न्यूट्रीएंट्स तत्वों को आवश्यकता पड़ती हैं। जो सिर्फ मिट्टी से भी प्राप्त हो सकते हैं। जैसे की मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिप्सम, सिलिकॉन, सल्फर आदि। मिट्टी में यह सभी गुण पाए जाते हैं और यहीं कारण हैं की आज भी हमारे मंदिरों में प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता हैं, क्योंकि मिट्टी के बर्तन को पवित्र माना जाता हैं। जबकि प्रेशर कुकर एल्युमिनियम का होता हैं जो सेहत के लिए हानिकारक हैं। इसमें खाना पकाने से टी.बी., मधुमेह, लकवा और अस्थमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करना चाहिए। आइये जानते हैं मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से सेहत को क्या क्या फायदे होते हैं?

मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से सेहत को होने वाले लाभ :-

■ माइक्रो न्यूट्रीएंट्स में कमी नहीं आती हैं

आपको जानकर हैरानी होगी की मिट्टी के बर्तन में पकाई गयी दाल में माइक्रो न्यूट्रीएंट्स 100% तक बने रहते हैं। वहीँ प्रेशर कुकर में पकाई दाल में 87% पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। जबकि पीतल के बर्तन में दाल पकाने पर 7% पोषक तत्व ख़त्म हो जाते हैं। जबकि कांसे के बर्तन में दाल को पकाने से 3% पोषक तत्व गायब हो जाते हैं।

■ दूध और दूध से बनने वाली व्यंजनों के लिए बेस्ट

बंगाली लोग मिष्टी दोई या दही मिट्टी के बर्तन में ही पकाते हैं। मिट्टी के बर्तन में नार्मल दही जमाने से भी दही के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी के बर्तन में दूध डाल कर पियेंगे तो इससे दूध और भी ज्यादा टेस्टी लगेगा। क्या आपने कभी मिट्टी से बनी कुल्हड़ में चाय या दूध डालकर पिया हैं, क्योंकि जब आप कुल्हड़ में दूध या चाय को डालते हैं तो मिट्टी की खुशबू दूध या चाय में मिक्स हो जाती हैं, जिससे यह चाय और दूध और भी ज्यादा टेस्टी लगने लगते हैं।

■ भोजन ज्यादा टेस्टी बने

वैसे तो मिट्टी के बर्तन में भोजन पकने में थोड़ा अधिक समय लग जाता हैं, लेकिन अगर स्वाद की बात करे तो यह अन्य बर्तनों में पकाए गये भोजन के मुकाबले कई गुणा ज्यादा स्वादिष्ट होता हैं। अगर आप भोजन में सौंधी सौंधी महक का आनंद लेना चाहते हैं तो मिट्टी के बर्तन में पकाया गया भोजन खाए। एक बार मिट्टी के बर्तन में पकाया गया खाना कर तो देखिए, आपको एक अलग ही स्वाद का अनुभव होगा।

■ भोजन जल्दी खराब नहीं होता

मिट्टी के बर्तन में बनाया गया खाना जल्दी ख़राब नहीं होता हैं। इसके अतरिक्त मिट्टी में पकाए गये भोजन में पोषक तत्वों की कमी भी नहीं हो पाती हैं।

सारांश :- मिट्टी के बरतन में भोजन पका कर खाने से सेहत को प्रेशर कुकर में पकाए गये भोजन के मुकाबले से ज्यादा फायदा होता हैं। हालांकि भोजन के पकने में ज्यादा समय लग सकता हैं। लेकिन स्वाद और गुणों के मामले में यह श्रेष्ठ हैं। लेकिन बहुत कम लोग ही इस सच को मनेंगे, लेकिन लम्बा और हेल्दी जीवन जीना चाहते हैं तो मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल जरूर करे।







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