शंख बजाने के फायदे और शंख के प्रकार जानिए।

शंख कितनी तरह के होते हैं? शंख बजाने से सेहत को क्या-क्या फायदे होते है?

भारत में पूजा-पाठ के दौरान शंख बजाने का नियम प्राचीन काल से चला आ रहा हैं। हिन्दू धर्म में शंख का विशेष महत्व माना गया हैं। भारत के मंदिरों और पूजा घरों में शंख आसानी के साथ मिल जायेगा। क्योंकि पूजा घरों में शंख रखना काफी ज्यादा शुभ माना जाता हैं। शंख को बजाने से न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से फायदा होता हैं, बल्कि इससे सेहत को भी ढेर सारे लाभ होते हैं। शंखनाद करने से इससे निकलने वाली ध्वनी आसपास की नेगेटिव एनर्जी को समाप्त करके चारों ओर पॉजिटिव एनर्जी का संचार करती हैं। आइये जानते हैं शंख बजाने के फायदे क्या हैं और शंख क्यों बजाना चाहिए।

शंख बजाने के फायदे :-

■ टेंशन से छुटकारा दिलाये

अगर आपको टेंशन ज्यादा रहता हैं तो आपको शंख जरूर बजाना चाहिए। क्योंकि शंखनाद करते समय दिमाग से सभी तरह के बुरे और तनावपूर्ण विचार ख़त्म होने लगते हैं। शंख बजाने से टेंशन से राहत पाने में आसानी होती हैं।

■ गुदाशय के लिए फायदेमंद

शंखनाद करने से मूत्राशय, डायफ्राम, फेफड़े और पेट के निचले हिस्से और गर्दन की मसल्स को खास लाभ होता हैं। इससे इन सभी अंगो की अच्छी तरह से कसरत हो जाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैं की शंख बजाने से गुदाश्य की मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता हैं। जिससे गुदाशय के मसल्स मजबूत बनते हैं और कई प्रकार की समस्याओं से बचने में आसानी होती हैं।

■ दिल के लिए लाभकारी

जो व्यक्ति नियमित रूप से शंख बजाता हैं, उसे कभी भी दिल का दौरा नहीं पड़ता हैं। शंखनाद करने से हार्ट के सभी ब्लॉकेज खुल जाते हैं। शंख बजाने का फायदा यह भी हैं इससे आप बार-बार सांस भरकर छोड़ते रहते हैं, जिससे फेफड़े भी हेल्दी बने रहते हैं। जो बच्चे हकलाते हैं, उन्हें शंख जरूर बजाना चाहिए, इससे हकलाहट की समस्या को दूर करने में मदद मिलती हैं

■ प्रोस्टेट ग्रन्थि के लिए फायदेमंद

शंख को बजाने से प्रोस्टेट मसल्स की कसरत हो जाती हैं। इससे यूरिनरी ब्लैडर की एक्सरसाइज होने लगती हैं, जिससे मूत्रपथ से सम्बंधित बीमारियाँ होने का खतरा कम हो जाता हैं। क्योंकि शंख बजाने से प्रोस्टेट ग्रन्थि पर प्रेशर पड़ता हैं, जिससे प्रोस्टेट की सेहत में सुधार आता हैं। इससे प्रोस्टेट वृद्धि को रोकने में आसानी होती हैं। साथ ही इससे प्रोस्टेट में सूजन भी नहीं होती हैं।

■ गैस्ट्रिक प्रॉब्लम से राहत दिलाये

शंखनाद करने से रेक्टल मसल्स सिकुड़ती और फैलती रहती हैं। जिससे इनकी कसरत आसानी के साथ हो जाती हैं। इससे गैस्ट्रिक और पेट से जुड़ी कई सारी समस्याओं से मुक्ति पाने में आसानी होती हैं। शंख बजाने का लाभ यह भी की इससे छाती की मांसपेशियों की टोनिंग होती हैं।

■ चेहरे की झुर्रियां दूर करे

जब भी आप शंख बजाते हैं तो आपके चेहरे के मसल्स में खिंचाव आने लगता हैं। इसलिए शंख बजाने से चेहरे की झुर्रियां अपने आप ही समाप्त होने लगती हैं।

■ नेगेटिव एनर्जी दूर करे

जहाँ पर शंख की ध्वनि सुनाई देती है, उस जगह पर नेगेटिव एनर्जी समाप्त हो जाती हैं। ऐसा विश्वास किया जाता हैं की शंख को बजाने से ॐ की ध्वनी निकलती हैं, जो आसपास की नकारात्मक शक्तियों को मिटाने का काम करती हैं।

■ थायरॉयड ग्रंथि के लिए फायदेमंद

शंख को बजाने से थाइरोइड ग्लैंड और वोकल कोड्स की कसरत हो जाती हैं। इस तरह यह बोलने में होने वाली प्रॉब्लम को दूर करने का काम करता हैं।

■ बैक्टीरिया का नाश करे

शंख की आवाज से वातावरण में उपस्तिथ कई सारे जीवाणु-कीटाणु मर जाते हैं। शंख की ध्वनि से मच्छर भी दूर भाग जाते हैं। इस बात की पुष्टि कई सारे सारे वैज्ञानिक टेस्ट के बाद की गयी हैं। इस बात को साबित करने वाले महान वैज्ञानिक जेसी बॉस थे, जिन्होंने अपने परीक्षणों के द्वारा जीवाणुओं के नष्ट होने की पुष्टि की थी।

■ शंख में रखा हुआ पानी भी होता हैं फायदेमंद

रातभर शंख में पानी भर कर रखने के बाद सुबह इस शंख वाले पानी से स्किन की मालिश करने से स्किन से सम्बन्धित कई सारी बीमारियाँ दूर हो जाती हैं। इसके अलावा पेट दर्द हो रहा है और पाचन तंत्र खराब रहता हैं तो शंख में रखे हुए जल को पीने से काफी ज्यादा आराम मिलता हैं। रात के समय शंख में पानी भर कर रखे और सुबह इस शंख वाले पानी में गुलाब जल मिला कर बालों को साफ करे, इससे बालों के सफ़ेद होने की समस्या छुटकारा मिलता हैं। नहाने के बाद शंख को त्वचा पर हल्के-हल्के रगड़ने से भी त्वचा चमकदार बनने लगती हैं।

धार्मिक दृष्टि से शंख क्यों बजाना चाहिए और इससे क्या-क्या लाभ होंगे?

आपने स्वास्थ्य के नजरिये से ऊपर जाना की शंख बजाने से सेहत को क्या-क्या फायदे होते हैं। अब आप धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जानिए की शंख बजाने और शंख को घर में रखने से मनुष्य को क्या-क्या फायदे होते हैं।

वास्तुशास्त्र के अनुसार शंख में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ने लगती हैं। शंख की ध्वनी से सोई हुई भूमि जागृत होकर शुभ फल देने वाली बन जाती हैं।

शंख की आवाज को सुनकर लोग पूजा-पाठ के लिए प्रेरित होते हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता हैं की शंख की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शंख की आवाज को सुनकर भूत-पिचास, डाकनी, शाकनी और दुष्ट आत्माएं दूर भागती हैं।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार शंख में जल भर कर रखने और इसे छिड़कने से वातावरण शुद्ध हो जाता है।

पुराणों के अनुसार जो मनुष्य नियमित रूप से शंख बजाता हैं, उसे श्वास से सम्बंधित बीमारियाँ नहीं होती हैं। शंख को बजाने से फेफड़ों की एक्सरसाइज हो जाती हैं। अगर किसी को सांस से रिलेटेड बीमारियाँ हैं तो उसे शंख जरूर बजाना चाहिए।

वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में शंख होता हैं, वहां पर धन की देवी लक्ष्मी का निवास होता हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार शंख माता लक्ष्मी का भाई हैं। क्योंकि शंख भी माँ लक्ष्मी की तरह ही सागर से ही उत्पन्न हुआ हैं। शंख समुन्द्रमंथन के दौरान निकले गये 14 रत्नों में से एक हैं।

शंख में रखे गये पानी को पीने से हड्डियाँ और दांत मजबूत बनते हैं। शंख में कैल्शियम, सल्फर और फॉस्फोरस होता हैं, जिससे इसमें रखे गये पानी में यह सभी गुण समाहित हो जाते हैं, जिससे यह हड्डियों और दांतों के लिए लाभकारी हैं।

शंख इसलिए भी शुभ हैं क्योंकि इसे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों ही अपने हाथों में धारण करते हैं।

आयुर्वेद की माने तो शंखोदक भष्म के सेवन से पेट की बीमारियाँ, पीलिया, पथरी आदि ठीक हो जाती हैं। लेकिन इसका उपयोग करने से पहले जानकार आयुर्वेदिक वैद्य का परामर्श जरूर लेना चाहिए।

शंख के जल से अभिषेक करने से माता लक्ष्मी काफी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं और दरिद्रता दूर होती हैं।

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पूजा के दौरान शंख बजाने पर वातावरण पवित्र और शुद्ध बन जाता हैं। जहाँ तक शंख की ध्वनि सुनाई देती हैं, इस ध्वनि को सुनकर लोगो के अंदर सकरात्मक विचार उत्पन्न होने लगते हैं। जिससे उन्हें काफी ज्यादा अच्छा महसूस होता हैं।

शंख बजाते समय इन बातों का रखे ख्याल :-

► अगर आपको मोतियाबिंद, हर्निया या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हैं तो आपको शंख नहीं बजाना चाहिए। इससे इन अंगो पर प्रेशर पड़ता हैं, जिससे आपकी समस्या और भी ज्यादा गंभीर हो सकती हैं।

► ज्यादातर लोग शंख बजाते समय अपनी नाक की बजाये अपने मूंह से श्वास डालते हैं। यह एक आम गलती हैं, जब भी आप अपने मूंह से सांस डालते हैं, जो हवा को बरकरार रखने के लिए नहीं हैं, तो यह हवा पेट में चली जाती हैं। ऐसे में शंख बजाते समय हमेशा अपने नाक से श्वास डाले।

► अगर आप शंख बजाना सीख रहे है तो कोशिस करे किसी विशेषज्ञ के द्वारा ही शंख बजाना सीखे। क्योंकि लापरवाही से शंख बजाने पर आपके आँख और कान के मसल्स को हानि पहुँच सकती हैं। इससे आपके डायफ्राम के टूटने का भी ख़तरा हो सकता हैं।

शंख कितनी प्रकार के होते हैं और इनके क्या फायदे हैं?

जैसा की आपको पता ही होगा की शंख भी अलग-अलग तरह के होते हैं। आइये जानते हैं शंख कितनी प्रकार के होते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के शंखों का क्या महत्व हैं। वैसे तो प्रकृति में 50,000 से भी ज्यादा प्रकार के शंख पाए जाते हैं, लेकिन कुछ विशेष शंखों के बारे में जानते हैं।

1. पांचजन्य शंख

वास्तु दोष को दूर करने के लिए पांचजन्य शंख सबसे असरकारी होता हैं। इसकी ध्वनी से शत्रुओं के मन में भय पैदा होता हैं। इसका शंखनाद विजय प्रप्ति का संकेत होता हैं। यह वास्तु दोषों को शांत कर देता हैं।

2. विष्णु शंख

विष्णु शंख घर के अशांत, अस्वस्थ्य और बीमार वातावरण को नष्ट करता हैं। घर के अंदर अगर लड़ाई-झगड़े ज्यादा होते हैं तो घर में विष्णु शंख की स्थापना करनी चाहिए। साथ ही घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व भाग में फर्श पर दरी या कालीन नहीं बिछानी चाहिए। घर के अंदर और बाहर कांटेदार पौधे न लगाए। घर के मुख्य दरवाजे पर शीशा न लगाये, साथ ही घर की के सामने सहारा लेकर चढ़ने वाली बेलें भी न लगाये। घर की घड़ी को कभी भी बंद न होने दे।

3. गुरु शंख

इस शंख को जल से शालिग्राम जी (विष्णु प्रतीक शिला) को स्नान करा कर तुलसी जल अर्पित करने से स्मरण शक्ति में सुधार आता हैं। इससे शिक्षा में तेज़ी के साथ प्रगति होती हैं। विद्यार्थियों के लिए यह शंख और इससे किया जाने वाला उपाय विशेष रूप से लाभकारी होता हैं।

4. दक्षिणावर्ती शंख

दक्षिणावर्ती शंख कुदरत का दिया हुआ वरदान हैं। इसे शांतिदायक और धन समृद्धि कारक माना गया हैं। दक्षिणावर्ती शंख सीधे हाथ (दायें हाथ) की तरह खुलता हुआ दिखाई देता हैं। वैसे तो प्रकृति में ज्यादातर शंख वामवर्ती ही उत्पन्न होते हैं। लेकिन थोड़ी मात्रा में दक्षिणावर्ती शंख भी कुदरती रूप से पैदा होते हैं। यानी की यह कहा जाये की दक्षिणावर्ती शंख दुर्लभ शंखों में से एक है तो यह अतिकथनी नहीं होगी। आज कल तो बाज़ार में नकली दक्षिणावर्ती शंख मिलने लगे है। लेकिन प्राकृतिक रूप से उत्पन्न हुआ दक्षिणावर्ती शंख ही लाभदायक होता हैं।

5. चंद्र शंख

यह विष्णु शंख ही हैं, इसकी आकृति अर्ध-चंद्राकर होती हैं। इसलिए इसे चंद्र शंख कहा जाता हैं। इस शंख को घर में रखने से दरिद्रता और गरीबी दूर हो जाती हैं।

6. कलानिधि शंख

धन प्राप्ति में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए कलानिधि शंख सहायता करता हैं। इस शंख को किसी भी पूर्णिमा, गुरुपुष्य, रविपुष्य योग, प्रदोष और नवरात्रों के दौरान बजाना चाहिए। इससे धन प्राप्ति में आने वाली रुकावटें अपने आप समाप्त हो जाती हैं।

7. श्याम शंख

श्याम शंख को शनि शंख भी कहते हैं। जिन लोगो की साढ़े साती चल रही हो या शुरू हुई हो, उन्हें यह शंख अपने पास जरूर रखना चाहिये। इससे शनि देव के प्रकोप को शांत करने में मदद मिलती हैं और अचानक ही धन-धान्य की प्राप्ति होने लगती हैं।

8. नीलकंठ शंख

अगर किसी व्यक्ति को सांप, बिच्छू या किसी विषैले जीव ने काट लिया हैं तो इस शंख में देसी गाय का गौमूत्र भर कर डंक वाली जगह पर उस गौमूत्र को लगाना चाहिए। इससे विषैले जीव का जहर जल्दी उतरने लगता हैं। नीलकंठ शंख जिस घर में विराजमान होता हैं, उस घर में बिच्छू-साँप जैसे जहरीले जानवर और कीड़े नहीं रहते हैं।

9. देवेज्य शंख

देवेज्य शंख पाप और श्राप मुक्तिदायक हैं। इससे जादू-टोना, टोटके आदि से बचने में आसानी होती हैं। यह घर से इन सभी प्रकार की समस्याओं को दूर भगाता हैं। ज्योतिष के अनुसार यह शांती और समृद्धि कारक हैं।

10. सीप शंख

सीप शंख को घर में रखने से मन एकाग्र होने लगता हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती हैं। यह मोतियों का कवच है। ज्योतिषियों के अनुसार जिन जातकों का चन्द्रमा कमजोर हैं या फिर जिनका मन अस्थिर रहता हैं, उन्हें चन्द्रमा की दशा में सीप शंख गले में पहनना चाहिए।

11. कामधेनु गौमुखी शंख

कामधेनु और गोमुखी शंख के ऊपर का हिस्सा गाय के सिंग के जैसा दिखाई देता हैं। इसकी आकृति ऐसी हैं की इसे आसानी के साथ बजाया नहीं जा सकता हैं। लेकिन जो लोग इस शंख को बजाने में सक्षम हो जाते हैं, उनके फेफड़े सच में काफी ज्यादा मजबूत और स्वस्थ्य बन जाते हैं।

12. बाघ शंख

बाघ शंख (टाइगर शंख) को घर में रखने से भूत-प्रेत, अदृष शक्तियों और जानवरों से लगने वाला भय समाप्त हो जाता हैं। बाघ शंख भूत-प्रेत, दुष्ट शक्तियों की बाधाओं से छुटकारा दिलाने का काम करता हैं।

13. अन्नपूर्णा शंख

अन्नपूर्ण शंख के नाम से ही स्पष्ट है की यह घर में धनधान्य की सम्पन्नता लाता हैं। जिस घर में अन्नपूर्णा शंख रखा जाता हैं, वहां पर कभी भी किसी भी चीज़ की कमी नहीं रहती हैं, खास करके भोजन की कमी तो कभी भी नहीं रहती हैं। इस शंख में माँ अन्नपूर्णा का निवास होता हैं। इस शंख में रात भर जल भर कर रखने के बाद सुबह इस जल को पीने से पेट के विकार दूर हो जाते हैं।

14. हीरा शंख

यह शंख शुक्र दोष को दूर करता हैं और प्रेम में आने वाली बाधाओं का निवारण करने में सहायक होता हैं। अगर इस शंख को अभिमंत्रित करके स्थापित कर दिया जाये तो कमजोर शुक्र ग्रह की कृपा अनुकूल होने लगती हैं। इस शंख को घर में रखने से सम्पन्न होते हैं और पति-पत्नी में प्रेम ज्यादा बढ़ने लगता हैं।

15. एरावत शंख

देवऋषि नारद जी ने एरावत शंख को सिद्ध किया था। इसलिए वह संसार में कंही भी भ्रमण कर सकते हैं। अगर आपको कंही से भी यह शंख प्राप्त हो जाये तो समझिये आपकी सभी मनोकामनाए पूर्ण हो सकती हैं। वैसे तो एरावत शंख किसी को प्राप्त ही नहीं हो पाता हैं।

16. मोती शंख

मोती शंख से ही उच्चतम गुणवत्ता वाला मोती भी उत्पन्न होता हैं। इस शंख में गंगाजल भर कर पीने से दिल और सांस से सम्बंधित बिमारियों के इलाज में मदद मिलती हैं।

17. वामवर्ती शंख

इसे बायें हाथ से पकड़ा जाता हैं। यह शंख आसानी से नहीं मिल पाते हैं। यह चमत्कारिक और दुर्लभ शंख हैं, जिसके कारण यह काफी मूल्यवान हैं। इस शंख को घर में रखने से दरिद्रता समाप्त होती हैं और धन-धान्य की वृद्धि  होती हैं।

18.  मध्यावर्ती शंख

यह शंख मूंह के बीच से खुलता हैं। मध्यावर्ती शंख भी दुर्लभ शंखों में से एक हैं, जिसकी स्थापना से सभी मनोकामनाओं की पूर्ती होती हैं।

19. देवी शंख

इस शंख को माँ आदिशक्ति अपने हाथों में धारण करती हैं। यह शंख काफी दुर्लभ है, इस शंख को जो मनुष्य 9 बार बजाता है, उसे दुर्गा सप्तशती के पाठ करने जितना फल प्राप्त होता हैं। इस शंख से पूजा करने से माता लक्ष्मी बहुत ही शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं। देवी शंख शंख माला से अभिमंत्रित करके आचमन करने से अपार धन और सुख की प्राप्ति होती हैं।

20. लक्ष्मी शंख

जो जातक अपने घर में लक्ष्मी शंख रखता हैं, उसके घर में कभी भी धन की कमी नहीं हो पाती हैं। ऐसा माना जाता है की लक्ष्मी शंख में स्वयं देवी लक्ष्मी निवास करती हैं।

21. गणेश शंख

इस शंख की आकृति भगवान गणेश जी के रूप में हैं। इसी कारण इसे गणेश शंख कहा जाता हैं। यह काफी दुर्लभ और चमत्कारिक शंख हैं। गणेश शंख के सिर्फ दर्शन करने से ही सभी संकट दूर हो जाते हैं और धनोपार्जन के साधन उत्पन्न होते हैं। इस शंख में जल भर कर अगर गर्भवती स्त्री को पिलाया जाये तो होने वाली संतान का जीवन सुखमय रहता हैं। इस शंख का जल पीने से पीलिया की बीमारी में भी फायदा होता हैं।

22. मणिपुष्पक शंख

महाभारत काल में सहदेव जी मणिपुष्पक शंख को बजाते थे। इसका मूंह पूरा खुला रहता हैं। इस शंख को बजाने से ह्रदय रोग नहीं होता हैं। मणिपुष्पक शंख को घर में रखने से परिवार के सभी सदस्यों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।



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