श्री दुर्गा पूजन की सम्पूर्ण विधि जानिए।

श्री दुर्गा पूजन की सम्पूर्ण विधि जानिए।

अगर आप माँ दुर्गा की पूजा करना चाहते हैं और आपको श्री दुर्गा पूजन की सम्पूर्ण विधि की जानकारी चाहिए तो यह लेख जरूर पढ़े।

श्री दुर्गा पूजन करने के लिए जरूरी सामग्रियां :-

तांबे का लोटा, दूध, देवी मूर्ती का स्नान करवाने के लिए ताम्ब्र पात्र, जल का कलश, धूपबत्ती, देव मूर्ती को अर्पण किये जाने वाले आभूषण और वस्त्र। तेल, रूई, कुमकुम, दीपक, चावल, गुड़हल का पुष्प, नारियल। इसके अलावा प्रसाद के लिए आपको दूध, मिठाई, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर), ड्राई फ्रूट्स, पान, शक्कर और दक्षिणा आदि की जरूरत पड़ेगी।

सर्वप्रथम संकल्प ले

माता दुर्गा की पूजा करने से पहले संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेने के लिए हाथों में फूल, चावल और जल ले। फिर जिस दिन पूजा कर रहे हैं, उस वार, तिथि, जगह का नाम और अपना नाम को लेकर अपनी इच्छाओं को बोले। अब हाथों में लिए गये जल को भूमि पर छोड़ दे।

संकल्प का उदाहरण

जैसे 28/3/2015 को श्री दुर्गा का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं ( अपना नाम बोलें ) विक्रम संवत् 2072 को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को कृतिका नक्षत्र में, मंगलवार को, भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में महाकालेश्वर तीर्थ में इस मनोकामना से (मनोकामना बोलें) श्री दुर्गा का पूजन कर रही/ रहा हूं।

दुर्गा जी की पूजा करने का तरीका :-

अगर आप अपनी मनोकामनाओं को पूर्ति के लिए माँ दुर्गा की पूजा कर रहे हैं तो पूजा में प्रयोग होने वाले सभी सामग्री और सभी नियमो का पालन करने की जरूरत पड़ती हैं। माँ दुर्गा का पूजन करना काफी ज्यादा कठीन होता हैं। वैसे तो निष्काम भक्ति (बिना किसी मनोकामना की पूर्ति की इच्छा) से पूजा करने के लिए माता दुर्गा जी को किसी खास सामग्री को अर्पित करने की जरूरत नहीं पड़ती हैं, लेकिन मनोकामनाओ या इच्छा की पूर्ति के लिए किये जाने वाली पूजा में उपरोक्त बताये गये सामग्रियों की आवश्यकता होती ही हैं। लेकिन निष्काम पूजा करने के लिए आप सिर्फ पुष्प, गंध, धुप, दीप, अक्षत आदि से ही माता दुर्गा की पूजा कर सकते हैं, जिससे माँ दुर्गा आप पर प्रसन्न भी हो जाती हैं।

किसी भी पूजा को प्रारंभ करने से पहले श्री गणेश जी का पूजन करना जरूरी माना जाता हैं। इसके लिए भगवान गणेश जी को स्नान करवाए और फिर उन्हें वस्त्र अर्पण करे। अब गणपति जी को पुष्प, अक्षत, धुप, गंध आदि अर्पित करे।

इसके पश्चात आप देवी दुर्गा की पूजा करनी प्रारम्भ कर दे। इसके लिए माता दुर्गा की देव मूर्ति को स्थापित करे। मूर्ति में माँ दुर्गा का आहवाहन करे। आवाहन का मतलब बुलाना होता हैं, यानी आप माँ को बुलाये। माता दुर्गा को स्नान करवाए। अब माँ को वस्त्र अर्पित करे। वस्त्रों के बाद माता दुर्गा को आभूषण पहनाये। फिर देवी माँ की मूर्ति को फूलों की माला पहनाये। माता को सुगन्धित इत्र अर्पित करे। अब देवी माँ की मूर्ति को कुमकुम और अष्टगंध से तिलक लगाए। अब अगरबत्ती, धुप जलाकर माँ की पूजा करे। माता दुर्गा जी की पूजा में अरहुल (गुड़हल) का फूल जरूर अर्पित करे। 11 से 21 चावल के दानो को अर्पित करे। फिर भक्तिपूर्वक घी या तेल का दीपक जलाये। फिर माता की आरती करे। आरती करने के बाद परिक्रमा करे। अब माँ दुर्गा को नेवैद्य अर्पित करे। माता दुर्गा की पूजा करते समय “ॐ दुं दुर्गायै नमः” के मंत्र का जाप करते रहे।

देवी माँ की पूजा पुरी होने के बाद उन्हें नारियल का भोग लगाए। इसके लिए माता दुर्गा की मूर्ती के आगे नारियल अर्पित करे। 10 से 15 मिनट बाद नारियल को फोड़ दे। अब प्रसाद को देवी माँ को अर्पित करदे, जैसे की आप मिठाई, पंचामृत को माँ को चढ़ा कर भक्तो में बाँट दे।

क्षमा प्राथना करे

देवी माँ की पूजा में अगर कोई त्रुटी रह गयी हैं तो इसके लिए माता दुर्गा से क्षमा प्राथना करे। इसके लिए आप यह भी कहे की हे माता, हम तो आपके बालक हैं, अगर हमारी पूजा में कोई भूल हो गयी तो हमें आप क्षमा प्रदान करे।








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