शिव पार्वती जी की पूजा करने की सम्पूर्ण विधि जानिए।

शिव पार्वती जी की पूजा करने की सम्पूर्ण विधि जानिए।

अगर आप भी भगवान शिव और माता पार्वती जी की पूजा करना चाहते हैं और पूजन करने की विधि जानना चाहते हैं तो यह लेख पूरा जरूर पढ़े। शिव पार्वती जी की पूजा कैसे की जाती हैं? शिव पार्वती जी की पूजा करने के लिए किन सामग्रियों की आवश्यकता होती हैं और उनका पूजन करने का तरीका क्या हैं? इन सभी जानकारी को आप निचे पढ़ सकते हैं।

शिव पार्वती जी का पूजन करने के लिए जरूरी सामग्री :-

देव मूर्ती के स्नान के लिए तांबे का लोटा, ताम्बे का पात्र, जल का कलश, दूध, देव मूर्ती को अर्पित किये जाने वाले वस्त्र और आभूषण की आवश्यकता होती हैं। इसके अलावा दीपक, तेल, रूई, धूपबत्ती, अष्टगंध, चावल आदि भी चाहिए। धतुरा, चन्दन, आक के फूल, बेलपत्र, जनेऊ भी चाहिए। प्रसाद के हेतु दूध, मिठाई, फल, सूखे मेवे, नारियल, पंचामृत, शक्कर, पान आदि चाहिए, दक्षिणा में आपकी जो भी श्रध्दा हो।

सबसे पहले सकंल्प करे

किसी भी विशेष मनोकामना की पुरी होने की इच्छा से किये जाने वाले पूजन के लिए संकल्प की जरूरत होती हैं। निष्काम भक्ती बिना संकल्प के भी की जा सकती हैं।

पूजा शुरू करने से पहले संकल्प करे। संकल्प करने के लिए हाथ में जल, फूल और चावल ले। संकल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, वार, तिथि, जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बताये। अब हाथो में लिए गये जल को जमीन पर छोड़ दे।

संकलप का उदाहरण

जैसे 21/4/2015 को श्री शिव- पार्वती का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं ( अपना नाम बोलें ) विक्रम संवत् 2072 को, वैशाख मास के तृतीया तिथि को मंगलवार के दिन, कृतिका नक्षत्र में, भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में महाकाल तीर्थ में इस मनोकामना से (मनोकामना बोलें) श्री शिव-पार्वती का पूजन कर रही/रहा हूँ।

शिव-पार्वती जी की पूजा करने की आसान विधि :-

सबसे पहले गणेश जी की उपासना करे। गणेश जी को स्नान करवाए और उन्हें वस्त्र अर्पित करे। पुष्प, गंध, अक्षत से उनका पूजन करे।

फिर देव मूर्ती में शिव पार्वती जी को स्नान करवाए। स्नान से पहले जल से शिव पार्वती जी का पूजन करे। फिर पंचामृत से स्नान करवाए, फिर दुबारा से जल से स्नान करवाए।

शिव पार्वती जी को वस्त्र अर्पित करे। वस्त्रों के बाद गले में फूलों की माला और आभूषणों को पहनाये। अब तिलक करे और ‘‘ऊँ साम्ब शिवाय नमः’’ का जाप करते हुए भगवान शिव को अष्टगंध का तिलक लगाये। फिर ‘‘ऊँ गौर्ये नमः’’ बोलते हुए माता पार्वती को कुमकुम का तिलक लगाये।

अब अगरबत्ती जलाये और उसे शिव-पार्वती को दिखाए। फिर धुप और दीप अर्पित करे। फिर शिव पार्वती जी को फूल अर्पित करे। फिर घी या तेल का दीपक जलाये। दीपक से आरती करे और आरती करने के बाद परिक्रमा करे। अब नैवेद्य अर्पित करे। अब भगवान शंकर और माता गौरी को बेलपत्र से पूजा करे। कनेर के फूल अर्पित करे। उमा शंकर जी की पूजा करते समय ‘‘ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः’’ मंत्र का जाप करते रहे।



अगर लेख अच्छा लगा हो तो निचे सोशल मीडिया बटन से अपने दोस्तों में शेयर करना न भूले, क्योंकि आपका एक शेयर इस वेबसाइट को आगे जारी रखने के लिए हमें प्रेणना देगा...

इन्हें भी जरूर पढ़े...

जानिए प्रदोष व्रत के बारे में.
ज्वाला देवी शक्तिपीठ से जुड़ी 7 ऐसी बातें, जो इसे बनाती हैं और भी खास
कौन से देवी-देवता पर कौन सा फूल चढ़ाना चाहिए?
रावण से सीखे कौन से काम नहीं करने चाहिए?
समुद्र मंथन में बाली ने लिया था देवो की ओर से भाग, उसी में से निकली थी पत्नी तारा!
गलत अर्थ न निकाले इस "ढोल गंवार क्षुद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी" दोहे को!
दिवाली की तरह दुनिया में मनाये जाने वाले रोशिनी के त्यौहार।
यह चीज़े बुरी किस्मत लेकर आती हैं, इन्हें घर में न रखे।
जानिए कौन से पेड़ घर में नेगेटिव एनर्जी को पैदा करते हैं।
भागवत पुराण में कलियुग को लेकर की गयी भविष्यवाणी।
इस काम को करने से भगवान शंकर हो जाते हैं नाराज़।
जानिए मृत्यु आने से ठीक पहले मनुष्य के साथ क्या-क्या होता हैं।