हनुमान जी से जुड़ी रोचक बातें और तथ्य

हनुमान जी से जुडी रोचक बातें

हनुमान जी कलियुग में साक्षात् रहने वाले प्रमुख्य देव हैं। हनुमान जी भगवान शंकर के रुद्रावतार है और भगवान श्री राम के अमिट भक्त हैं। आप में से ज्यादातर लोग बजरंगबली हनुमान जी के बारे में जानते ही हैं। लेकिन हनुमान जी से जुड़ी हुई कुछ रोचक बातें और तथ्य ऐसे हैं, जिनके बारे में कई लोगो को जानकारी नहीं होगी। आइये जानते हैं पवनपुत्र हनुमान जी के बारे में ऐसे रहस्य के बारे में जानिए, जिनका वर्णन रामायण सहित कई सारे धार्मिक ग्रंथो में मिलता हैं।

हनुमान जी के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी :-

1) हनुमान जी बचपन से भगवान श्री राम को अपना अराध्य देव मानते थे। इसलिए जब वह भगवान श्री राम से मिले तो प्रसन्नता के चलते रोने लगे।

2) हनुमान जी की माता अंजनी पूर्वजन्म में एक अप्सरा थी। श्राप के कारण उन्हें पृथ्वीलोक पर जन्म लेना पड़ा। और इसी जन्म में उन्हें भगवान शिव के रुद्रावतार की माता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

3) हनुमान जी भगवान शंकर के अवतार हैं। वह भक्ति, शक्ति, विद्या और दृढ़ता के प्रतीक हैं।

4) एक बार माता सीता ने हनुमान जी को अपने हाथों से बना हुआ भोजन करने के लिए निमंत्रण दिया। उसके बाद जब हनुमान जी माता सीता के बनाये गये भोजन को खाने के लिए बैठे तो वह इतना ज्यादा खाने लगे की भोजन समाप्त हो गया। परन्तु अभी तक हनुमान जी का पेट भरा ही नहीं था। इससे चिंतित हो कर माता सीता ने प्रभु श्री राम से इसका हल पुछा। भगवान श्री राम के कथन अनुसार माता सीता ने तब हनुमान जी को तुलसी के पत्ते खाने के लिए दिए। जिसके पश्चात हनुमान जी का पेट भर गया और उनकी क्षुदा शांत हुई। हनुमान जी ने माता सीता को कहा की हे माता अगर आप पहले ही मेरे प्रभु की प्रिय तुलसी का प्रसाद दे देती तो आपके द्वारा बनाया गया भोजन रसोई से समाप्त ही नहीं होता।

5) जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गये तो हनुमान जी वैध सुषेण के कहने पर संजीवनी बूटी लेने के लिए द्रोण पर्वत पर गये। लेकिन उन्हें संजीवनी बूटी की पहचान नहीं थी, इसलिए वह पुरे का पूरा पर्वत ही अपने हाथों पर उठा कर ले आये।

6) गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गयी हनुमान चालीसा का पाठ मंगलवार और शनिवार के दिन करने से हनुमान जी की कृपा भक्तों पर हमेशा बनी रहती हैं।

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7) हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं, लेकिन उनका एक पुत्र भी हैं। हनुमान जी का विवाह नहीं हुआ, लेकिन उनका पुत्र कैसे हो सकता हैं? इसका उत्तर यह हैं की जब हनुमान जी ने सोने की लंका में अपनी पूँछ से आग लगा दिया। तो अपनी पूँछ में लगी आग को बुझाने के लिए लंका में मौजूद नदी में कूदे। हनुमान जी का पसीना छिटक गया, यह पसीना एक मछली के मुख में चला गया। उसी मछली के अंदर से मकरध्वज नामक हनुमान जी के पुत्र का जन्म हुआ।

8) जब रावण के मौसी का पुत्र भगवान श्री राम और लक्ष्मण को पाताल ले गया। यानी अहिरावण और महिरावण ने प्रभु श्री राम और लक्ष्मण का हरण कर लिया और उन्हें पाताल की देवी को बलि चढ़ाने की कोशिश की। तो हनुमान जी अपने प्रभु राम और लक्ष्मण जी को बचाने के लिए पाताल लोक चले गये। पाताल के द्वार पर उनकी भेंट अपने पुत्र मकरध्वज से हुई। लेकिन मकरध्वज अहिरावण और महिरावण का सेवक था। जिसके कारण उसे हनुमान जी से युद्ध करना पड़ा। अंत में हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज को बाँध दिया। उसके बाद उन्होंने अहिरावण और महिरावण को अपनी चतुराई और बल से वध कर दिया। प्रभु श्री राम चन्द्र ने फिर हनुमान पुत्र मकरध्वज को पाताल लोक का राजा बना दिया।

हनुमान जी का जाप कैसे करना चाहिए?

9) एक बार हनुमान जी माता सीता को सिन्दूर लगाते हुए देखा। जब हनुमान जी माता सीता से सिंदूर लगाने का कारण पूछा तो माता सीता ने उत्तर दिया की यह सिन्दूर प्रभु श्रीराम के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक हैं। यह जानने के बाद हनुमान जी ने अपने पुरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। यह दर्शाने के लिए वह अपने प्रभु श्री राम जी से कितना प्रेम करते हैं। भगवान श्री राम ने जब हनुमान जी का यह रूप देखा तो उन्होंने हनुमान जी को वरदान दिया की आज से जो भक्त आपको सिन्दूर अर्पित करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी। इसी वजह से हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाया जाता हैं और हनुमान जी का शरीर सिंदूरीलाल हैं।

10) बाल समय में हनुमान जी को भूख लगी तो उन्होंने माता अंजनी के कहने पर लाल रंग का फल खाने की सोची। उन्होंने उगते हुए सूर्य देव को लाल रंग का फल समझा। उसे खाने के लिए हनुमान जी आकाश में उड़ गये। उसी दिन राहू ने सूर्य ग्रहण लगाना था। लेकिन हनुमान जी ने राहू को वहा से मार-मार कर भगा दिया। और सूर्य देव को अपने मूंह में निगल लिया। इससे पुरे संसार में अँधेरा छा गया। राहू के बरगलाने पर देवराज इंद्र ने गुस्से में आकर बालक मारुती के जबड़े पर अपने ब्रज से प्रहार कर दिया। जिससे बालक मारुती मूर्छित होकर गिर पड़े।

हनुमान जी ने सूर्य देव को क्यों निगल लिया था?

11) हनुमान जी के पिता वानरराज केसरी हैं। परन्तु वायुदेव यानी पवन देव हनुमान जी के धर्म पिता हैं। इसलिए हनुमान जी को पवनसुत या पवनपुत्र भी कहा जाता हैं। जब पवनदेव ने बालक मारुती पर इंद्र के प्रहार से मूर्छित होते हुए देखा तो वह क्रोधित हो गये और पुरी पृथ्वी से वायु को अपनी ओर खीच लिया। जिससे संसार के सभी प्राणियों का जीवन संकट में पड़ गया। इसके बाद ब्रह्म देव और सभी देवताओं के समझाने पर पवन देव ने वायु को दुबारा से प्रवाहित किया। इस घटना के बाद हनुमान जी का जबड़ा टूट गया, क्योंकि इंद्र देव ने हनुमान जी के हनु यानि जबड़े पर वार किया था। संस्कृत भाषा में “हनु” का अर्थ है “जबड़ा” और “मान” का अर्थ है “विरूपित करना”l हनुमान जी का नाम पहले मारुती था, लेकिन इस घटना के बाद उनका नाम हनुमान के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मूर्छा से उठने के बाद सभी देवताओं ने हनुमान जी को कई सारे वरदान दिए, जिसमे ब्रह्मा जी ने उन्हें सभी अस्त्र-शस्त्र से मुक्त होने का वरदान दिया।

12) एक बार माता सीता ने हनुमान जी को मोतियों की माला भेंट की। हनुमान जी मोतियों को तोड़-तोड़ कर देखने लगे। इस पर विभीषण जी ने इसका कारण पुछा तो हनुमान जी ने बताया की वह इन मोतियों के अंदर प्रभु श्री राम और माता सीता के रूप को देख रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक इन मोतियों में कुछ भी दिखाई नहीं दिया हैं और यह मोती उनके लिए बेकार हैं। इसके बाद विभीषण जी ने कहा तो फिर क्या आपके शरीर में भगवान श्री राम और माता सीता बसते हैं। इतना सुनते ही हनुमान जी ने राज्यदरबार में अपना सीना चीर कर दिखाया, जिसमे भगवान श्री राम और माता सीता का चित्र बना हुआ था।

13) हनुमान जी ने अपनी शिक्षा भगवान सूर्य देव से ग्रहण की थी। सूर्य देव हनुमान जी के गुरु बने।

14) बाल समय में हनुमान जी को भगवान शंकर ने बंदर बना दिया और स्वयं मदारी बन कर अयोध्या आये। भगवान शंकर और हनुमान जी ने भगवान श्री राम चन्द्र के बाल्य रूप का दर्शन किया। भगवान राम ने हनुमान जी को वचन दिया की वह भविष्य में उनसे जरूर मिलेंगे।

15) अंतिम समय में जब भगवान श्री राम चन्द्र ने अपना शरीर सरयू नदी में त्यागा तो हनुमान जी को भगवान श्री राम चन्द्र ने यह वरदान दिया की आप महाप्रलय तक पृथ्वी पर रहेंगे। हनुमान जी को अजर होने का वरदान भी मिला यानी की वह कभी भी बूढ़े नहीं होंगे। इसलिए यह माना जाता है की जहा पर भगवान श्री राम की कथा की जाती है, वहां पर स्वयं हनुमान जी अदृश्य रूप में आकर भाग लेते हैं। हनुमान जी को सच्चे मन से याद करने से वह अपने भक्तों की सभी मनोकामनाए पूरी करते है।

16) हनुमान जी ने शनि देव का घमंड भी नष्ट किया था। साथ ही हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बन्धनों से मुक्त भी करवाया था। इस पर शनि देव ने हनुमान जी को वरदान दिया की आज से वह किसी भी हनुमान भक्त को नहीं सतायेंगे। इसलिए जो मनुष्य मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करता हैं और हनुमान चालीसा का जाप करता हैं, उसे शनिदेव कष्ट नहीं देते हैं।

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17) हनुमान की वर्णन महाभारत में भी मिलता हैं। वह ध्वज के रूप में अर्जुन के रथ पर सवार रहे। यहाँ तक की कर्ण के द्वारा चलाये गये बाण को उन्होंने महाभारत का युद्ध समाप्त होने तक रोके रखा। जब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को रथ से तुरंत उतरने के लिए कहा था तो अर्जुन भी अचंभित हो गये, क्योंकि उनका रथ उसी समय अग्नि में जल कर भस्म हो गया। इस पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया की हनुमान जी ने कर्ण के बाण को अपनी शक्ति से रोके रखा था, इसलिए इतने दिनों तक रथ को कोई हानि नहीं हुई।

जरूर पढ़े :– जानिए रामायण के 4 ऐसे पात्र जो महाभारत में भी मिलते हैं।

18) महाभारत में यह भी वर्णन मिलता हैं की हनुमान जी ने पांडव पुत्र भीम और अर्जुन का घमंड भी तोड़ा था।

19) दक्षिण भारत में हनुमान जी को आंजनेय के नाम से पूजा जाता हैं।



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