हिन्दू धर्म में मुंडन क्यों करवाया जाता हैं?

मुंडन क्यों करवाया जाता हैं?

सभी धर्मों के कुछ विशेष रीती-रिवाज, विश्वास और परम्पराएं होती हैं। हिन्दू धर्म में मनुष्य के 16 संस्कार बताये गये हैं। जैसे की जन्म, मृत्यु, विवाह, नामकरण जैसे अवसरों पर कई सारी परम्पराओं का पालन किया जाता हैं। हिन्दू धर्म में सिर मुंडवाने यानी मुंडन करवाने की परम्परा भी हैं। हिन्दू धर्म में मुंडन करवाने की परम्परा प्राचीन युग से ही चली आ रही हैं। बाल कटवाना यानि मुंडन करवाना कई मौकों पर जरूरी हो जाता हैं। ज्यादातर लोग पवित्र स्थानों जैसे की काशी और तिरुपति आदि में सिर का मुंडन करवाते हैं। उनका यह मानना हैं की यह धार्मिक स्थान काफी ज्यादा पवित्र हैं और यहाँ पर मुंडन करवाना शुभ रहेगा।

बाल अहंकार के प्रतीक माने गये हैं, इसलिए इसे भगवान के आगे चढ़ाया जाता हैं। कई लोग मन्नत पूरी होने के बाद अपने बालों का दान अपने इष्टदेव को करते हैं। आइये जानते हैं मुंडन क्यों करवाया जाता हैं? यानी हिन्दू धर्म में सिर का मुंडन कब और क्यों किया जाता हैं?

हिन्दू धर्म में मुंडन करवाने की परम्परा :-

बच्चे का मुंडन करवाना

हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य का पुनर्जन्म होता ही हैं। ऐसी मान्यता हैं की बच्चे का मुंडन करवाने के बाद वह अपने पिछले जन्म के बन्धनों से मुक्त हो जाता हैं। बाल घमंड और अहंकार के प्रतीक हैं। यही कारण है की बालों का मुंडन भगवान के आगे करवा कर यानी भगवान को अपने केशों का दान करके हम अपने अहंकार को त्याग देते हैं। ऐसा भी विश्वास हैं की मुंडन कराने से मन के बुरे विचार समाप्त हो जाते हैं।

■ मन्नत पूरी होने के बाद सर मुंडाना

कई लोग ऐसे होते हैं जिन्होंने कोई मन्नत मांगी हुई होती हैं। जैसे ही उनकी मन्नत पूरी होती हैं, वे अपना सर मुंडवा लेते हैं। मन्नत के पूरा होने के बाद वह अपने बाल अपने इष्टदेव या भगवान को अर्पित करते है। इस परम्परा का दृश्य तिरुपति और वाराणसी जैसे धार्मिक स्थलों पर ज्यादा देखने को मिलता है।

■ अंतिम संस्कार के बाद मुंडन कराना

किसी मनुष्य की मृत्यु होने के बाद उसका दाह संस्कार किया जाता हैं। अंतिम संस्कार करने के बाद उस मनुष्य के बंधू-बांधव, पुत्र-पौत्र आदि अपने सिर का मुंडन करवाते हैं। इसके पीछे कारण यह हैं की जब पार्थिव शरीर को जलाया जाता है तो इससे कुछ हानिकारक बैक्टीरिया हमारे शरीर में चिपक जाते हैं। नदी में स्नान करना और धूप में बैठने का महत्व भी इसलिए ज्यादा हैं। सिर में चिपके हुए जीवाणुओं को पूरी तरह निकालने हेतु मुंडन कराया जाता हैं।



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