जानिए 10 ऐसी परम्पराएं जिनके पीछे छुपा हैं वैज्ञानिक कारण।

ऐसी परम्पराएं और रीति-रिवाज को अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं.

भारत एक ऐसा देश हैं जहाँ पर कई सारे रीति-रिवाज और परम्पराएं निभाई जाती हैं। जैसे की कोई शुभ काम करने से पहले या यात्रा पर जाने से पहले दही-शक्कर खाया जाता हैं। हिन्दू धर्म में ऐसी ही कई सारी परम्पराएं मौजूद हैं जो की अन्धविश्वास नहीं हैं। क्योंकि इन परम्पराओं के पीछे वैज्ञानिक कारण भी छुपे हुए हैं। यानी की इन्हें अंधविश्वास मानना आपकी बड़ी भूल हैं। आइये जानते है ऐसी ही कुछ रोचक बातें और परम्पराएं और उनके पीछे छिपा हुआ वैज्ञानिक कारण।

हिन्दू धर्म में की जाने वाली परम्पराएं जिनका हैं वैज्ञानिक आधार :-

■ व्रत रखना

व्रत को हमेशा धर्म के साथ जोड़ कर देखा जाता है। परन्तु उपवास रखने से न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से लाभ होता हैं, बल्कि इसके पीछे साइंटिफिक कारण भी मौजूद हैं। आयुर्वेद के अनुसार जो लोग अपने पेट को दुरुस्त रखना चाहते हैं, उन्हें हफ्ते में एक दिन उपवास जरूर रखना चाहिए। मनुष्य का पाचन तन्त्र 24 घंटे तक काम करते रहता हैं। जब आप एक दिन उपवास रखते हैं या फिर हल्का भोजन करते हैं तो आपके पाचन तन्त्र को आराम मिलता हैं और उसकी थकान दूर होती हैं।

■ हाथ जोड़ कर नमस्ते करना

दोनों हाथों को जोड़कर नमस्ते करना भारतीय परम्परा का अभिन्न हिस्सा रहा हैं। दोनों हाथों को जोड़ कर बड़ों को नमस्कार करने से एक तो हम उनको सम्मान देते हैं। साथ ही इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपे हुए हैं, ऐसा करने से आपके शरीर को ही फायदा होता है। दोनों हाथों को जोड़ने से कुछ ऐसी पॉइंट्स दबते हैं, जिनका सीधा सम्न्बंध कान, नाक, आँख, ह्रदय आदि के अंगो से होता हैं। इस तरह आप एक्वा प्रेशर पद्धति का प्रयोग अजमाने में ही करने लगते हैं।

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■ सूर्य ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलना

आपको यह अन्धविश्वास लग सकता है, लेकिन सूर्य ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। सूर्य ग्रहण के वक्त धरती की गुरुत्वाकर्ष लहरे कमजोर हो जाती हैं। साथ ही सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणें डायरेक्ट धरती पर पड़ती हैं। अगर कोई मनुष्य उन अल्ट्रा-वायलेट किरणों के कांटेक्ट में आता हैं तो उसे स्किन कैंसर के अलावा स्किन की बीमारियाँ या फिर अन्य बीमारियाँ हो सकती हैं। इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान घर से बाहर जाने से परहेज़ करे। इसे अंधविश्वास न माने।

■ बैठ कर टॉयलेट करना

भारतीय लोग प्राचीन काल में बैठ कर टॉयलेट करते थे। मतलब की अब घरों में इंग्लिश टॉयलेट सीट का इस्तेमाल किया जाने लगा हैं। लेकिन कई घरों में इंडियन टॉयलेट सीट अभी भी लगी हुई हैं। दरअसल मल त्याग करते समय इंसान की नेचुरल पोजीशन होनी चाहिए। इससे आँतों की मसल्स पर प्रेशर पड़ता है। इस तरह से मल बिना किसी परेशानी के गुदा द्वार के जरिये बाहर निकल जाता हैं। वहीँ दूसरी ओर इंग्लिश सीट में बैठ कर टॉयलेट करने से आंतों की मांसपेशियों को आराम नहीं मिलता है और पेट अच्छी तरह से साफ ही नहीं हो पाता है। धीरे-धीरे ऐसा होने पर भविष्य में पाइल्स जैसी खतरनाक बीमारी आपको हो सकती हैं।

■ परीक्षा से पहले या किसी शुभ कम को करने से पहले दही-शक्कर खाना

दही शरीर को ठंडक देती है। इसलिए इसे खाने से मन शांत हो जाता हैं। चीनी खाने से बॉडी को एनर्जी मिलती हैं, जिसके कारण आप कोई भी काम पूरी ऊर्जा के साथ कर पाते है। इसलिए परीक्षा में जाने से पहले या फिर यात्रा या कोई भी महत्वपूर्ण शुभ काम करने से पहले दही-चीनी को खाया या खिलाया जाता हैं। इसलिए इसे अंधविश्वास न मानिये, बल्कि इसे ख़ुशी के साथ स्वीकार कीजिये।

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■ स्त्रियों का पैर में बिछिया पहनना

ज्यादातर बिछिया को पैर के अंगूठे के साथ वाली दूसरी ऊँगली में धारण किया जाता है। दरअसल पैर की इस ऊँगली में बिछिया पहनने से महिलाओं को काफी ज्यादा फायदा होता हैं। पैर की ऊँगली की नस का सम्बन्ध स्त्रियों के गर्भाशय और ह्रदय से होता है। इस ऊँगली में बिछिया पहनने से उन्हें गर्भाशय और दिल की बीमारियाँ होने का ख़तरा कम हो जाता है।

■ भोजन ग्रहण करने से पहले पानी का छिड़काव करना

प्राचीन युग के लोग खाना खाने से पहले अपनी प्लेट के चारों ओर हाथों से पानी का छिड़काव करते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था की प्राचीन काल में लोग भूमि पर बैठ कर भोजन करते थे। उनकी प्लेट जमीन से टच होती थी। जिसके कारण जमीन पर रेंगने वाले कीड़े रेंगते हुए उनकी प्लेट में चढ़ जाते थे। लेकिन प्लेट के आसपास चारों और पानी का छिड़काव कर देने से भोजन के पास कीड़े नहीं फटक पाते थे।

■ जमीन पर बैठ कर भोजन करना

जमीन पर बैठ कर भोजन करने से पाचन क्रिया में वृद्धि होती है। जमीन पर बैठ कर खाना खाने के दौरान आपका शरीर खाना लेने के लिए कभी आगे झुकता हैं तो कभी पीछे की ओर वापिस आता हैं। ऐसा करने से पेट में खाना पचाने वाला एसिड, सिक्रीट होने लगता हैं। जिससे भोजन आसानी के पच जाता हैं।

■ चांदी के बर्तन में खाना खाना

बॉडी को चांदी की भी जरूरत पड़ती हैं। इसलिए जब भोजन को चांदी के थाली या कटोरी में रखा जाता हैं तो चांदी के गुण भोजन में समाहित हो जाते हैं। इससे चांदी के तत्व आसानी के साथ भोजन के जरिये शरीर को प्राप्त हो जाते हैं।

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■ तांबे के बर्तन का पानी पीना

तांबे के बर्तन या लोटे में रात भर रखा हुआ पानी सुबह खाली पेट पीने से फायदा होता हैं। कॉपर में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेंट्री गुण मौजूद होते है जो ज़ख्म को जल्दी भरने का काम करते है। कॉपर पाचन क्रिया को उत्तेजित करता हैं और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता हैं। इसलिए जब तांबे के बर्तन में पानी को रखा जाता हैं तो कॉपर के गुण पानी में मिल जाते है।




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